UP Board Class 10 Science Model Paper 2027: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं विज्ञान के आधिकारिक मॉडल पेपर का विस्तृत हल यहाँ उपलब्ध करा दिया है। छात्र मॉडल पेपर हल करने के बाद अपने उत्तरों की आसानी से जाँच कर सकते हैं और कठिन प्रश्नों के सटीक समाधान समझ सकते हैं। इसके अलावा, अभ्यास के लिए सीधे पीडीएफ (PDF) डाउनलोड करने का विकल्प भी उपलब्ध है।
UP Board 10th Model Paper 2027 Solution PDF Download
- जब वस्तु अनंत (Infinity) पर रखी होती है, तो प्रकाश की समानांतर किरणें फोकस पर मिलती हैं, जिससे प्रतिबिम्ब अत्यधिक छोटा तथा बिंदु आकार (Highly Diminished / Point-sized) बनता है। अतः X = अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार)।
- जब वस्तु वक्रता केंद्र C (Center of Curvature) पर रखी होती है, तो प्रतिबिम्ब भी C पर ही बनता है और इसका आकार वस्तु के बिल्कुल बराबर होता है। अतः Y = समान आकार (Same size)।
- श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance in Series): Req = R1 + R2
- ओम का नियम (Ohm’s Law): I = V / Req
- जूल का तापन नियम (Joule’s Law of Heating): H = I2 × R × t
- रेखीय आवर्धन (Linear Magnification): m = h2h1 = –vu
- दर्पण सूत्र (Mirror Formula): 1f = 1v + 1u
- अमीटर (Ammeter): इसे सदैव मुख्य परिपथ के साथ श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है तथा इसका धनात्मक ध्रुव (+) बैटरी के धनात्मक सिरे से जुड़ना चाहिए।
- वोल्टमीटर (Voltmeter): इसे विभवांतर मापने के लिए प्रतिरोधक के साथ समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है और इसका धनात्मक ध्रुव (+) भी बैटरी के धनात्मक सिरे की ओर होता है।
- 1. विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder): कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड → CaOCl2 (iii)
- 2. बेकिंग सोडा (Baking Soda): सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट → NaHCO3 (iv)
- 3. धोने का सोडा (Washing Soda): सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट → Na2CO3 · 10H2O (i)
- 4. प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris): कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट → CaSO4 · ½H2O (ii)
- (i) तंत्रिका तंत्र: न्यूरॉन का संवेदी भाग द्रुमिका (Dendrite) है → (ब)
- (ii) हृदय: मानव हृदय के मुख्य कोष्ठ अलिंद तथा निलय (Atrium & Ventricle) हैं → (अ)
- (iii) छुईमुई: स्पर्श करने पर होने वाली गति स्पानुकुंचन (Nastic Movement) कहलाती है → (द)
- (iv) एड्रेनेलिन हॉर्मोन: यह अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) से स्रावित होता है → (स)
- भाग a: प्रांकुर (Plumule) – यह भावी प्ररोह (Shoot System) बनाता है।
- भाग b: बीजपत्र (Cotyledon) – यह भ्रूण के लिए खाद्य भंडारण करता है।
- भाग c: मूलांकुर (Radicle) – यह भावी जड़ (Root System) बनाता है।
- मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित प्रकाश किरणें परावर्तन के पश्चात मुख्य फोकस F (Focus) से आती हुई प्रतीत होती हैं।
- वक्रता केंद्र C (Center of Curvature) की दिशा में आपतित किरण परावर्तन के बाद उसी मार्ग पर वापस लौट जाती है।
- प्रतिबिंब का स्थान (Position): दर्पण के पीछे मुख्य फोकस F पर बनता है।
- प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature): आभासी एवं सीधा (Virtual and Erect)।
- प्रतिबिंब का आकार (Size): अत्यधिक छोटा अर्थात बिंदु आकार (Highly Diminished / Point-sized)।
- प्रतिबिंब का स्थान (Position): दर्पण के पीछे ध्रुव P तथा फोकस F के बीच बनता है।
- प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature): आभासी एवं सीधा (Virtual and Erect)।
- प्रतिबिंब का आकार (Size): बिंब (वस्तु) से छोटा (Diminished)।
- त्रुटि (Error): दिए गए वाक्य में निकट दृष्टि दोष (Myopia) की परिभाषा गलत लिखी गई है।
- वैज्ञानिक तथ्य: निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास की वस्तुएं तो स्पष्ट देख लेता है, परंतु दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता।
- संशोधित सही वाक्य: “निकट दृष्टि दोषयुक्त (Myopic) व्यक्ति निकट रखी वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से देख सकता है, परंतु दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता।“
- त्रुटि (Error): प्रिज्म में सभी रंगों का विचलन समान नहीं होता।
- वैज्ञानिक तथ्य: वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) के कारण अलग-अलग तरंगदैर्घ्य (Wavelength) के प्रकाश अलग-अलग कोणों पर विचलित होते हैं। बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक तथा लाल रंग का विचलन सबसे कम होता है।
- संशोधित सही वाक्य: “किसी प्रिज्म से गुजरने के पश्चात, प्रकाश के विभिन्न वर्ण आपतित किरण के सापेक्ष अलग-अलग (विभिन्न) कोणों पर झुकते हैं। बैंगनी वर्ण सबसे अधिक तथा लाल वर्ण सबसे कम कोण पर झुकता है।“
- जब प्रकाश किरण वायु (विरल माध्यम / Rare Medium) से काँच (सघन माध्यम / Dense Medium) में प्रवेश करती है, तो यह अभिलंब (Normal) की ओर झुकती है (i > r)।
- जब प्रकाश किरण काँच से पुनः वायु में निकलती है, तो यह अभिलंब से दूर हटती है।
- निर्गत किरण (Emergent Ray) आपतित किरण (Incident Ray) के समानांतर (Parallel) होती है, परंतु इसमें पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement) उत्पन्न होता है।
- विद्युत सामर्थ्य/ऊष्मा सूत्र (Heat-Power Relation): H = P · t = (V2 / R) · t
- विभवांतर सूत्र (Potential Difference Formula): V = √(H · R / t)
- विद्युन्मय तार (Live Wire): लाल रोधन (Red Insulation) युक्त, जो 220 V के उच्च विभव पर होता है।
- उदासीन तार (Neutral Wire): काला रोधन (Black Insulation) युक्त, जो 0 V विभव पर होता है।
- भूसंपर्क तार (Earth Wire): हरा रोधन (Green Insulation) युक्त, जो सुरक्षा हेतु भूमि में दबी तांबे की प्लेट से जुड़ा होता है।
- विद्युत मीटर एवं बोर्ड फ्यूज/MCB: मुख्य आपूर्ति लाइन में लगे होते हैं।
- समांतर क्रम संयोजन (Parallel Connection): घरेलू परिपथ में सभी उपकरणों को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है ताकि प्रत्येक उपकरण को 220 V का समान विभवांतर मिले तथा एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण निर्बाध चलते रहें।
- भूसंपर्कन (Earthing): धातु के आवरण वाले उपकरणों (जैसे गीजर, फ्रिज, प्रेस) में क्षरित धारा से विद्युत आघात (Electric Shock) से सुरक्षा प्रदान करता है।
- फ्यूज / MCB: अतिभारण (Overloading) तथा लघुपथन (Short Circuit) के समय धारा अत्यधिक बढ़ने पर पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है।
- विद्युत तापन उपकरण (Electric Heating Appliances): विद्युत हीटर, प्रेस (Electric Iron), गीजर तथा टोस्टर में उच्च प्रतिरोध व उच्च गलनांक वाली नाइक्रोम (Nichrome) मिश्रधातु की कुंडली का प्रयोग किया जाता है।
- विद्युत बल्ब (Electric Bulb): बल्ब में अत्यधिक उच्च गलनांक (3380°C) वाली टंगस्टन (Tungsten) धातु का फिलामेंट लगाया जाता है, जो गर्म होकर तीव्र प्रकाश उत्सर्जित करता है।
- विद्युत फ्यूज (Electric Fuse): परिपथ सुरक्षा हेतु श्रेणीक्रम में कम गलनांक वाली मिश्रधातु (टिन व लेड) का फ्यूज तार लगाया जाता है, जो अतिप्रवाह (Overcurrent) पर पिघलकर परिपथ की रक्षा करता है।
- व्याख्या: लेड नाइट्रेट Pb(NO3)2 को गर्म करने पर यह अपघटित होकर पीले रंग का लेड ऑक्साइड (PbO), भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) गैस तथा ऑक्सीजन (O2) गैस बनाता है।
- व्याख्या: इस रेडॉक्स अभिक्रिया में मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) का अपचयन (Reduction) मैंगनीज क्लोराइड (MnCl2) में तथा HCl का ऑक्सीकरण (Oxidation) क्लोरीन गैस (Cl2) में होता है।
- व्याख्या: एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic Acid) तथा एथेनॉल (Ethanol) अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके मीठी गंध वाला एस्टर यानी एथिल एथेनोएट (CH3COOC2H5) बनाते हैं।
- व्याख्या: क्युप्रस सल्फाइड (Cu2S) को वायु की उपस्थिति में गर्म (भर्जन) करने पर यह क्युप्रस ऑक्साइड (Cu2O) तथा सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस में परिवर्तित हो जाता है।
- कार्बन तथा इसके हाइड्रोकार्बन यौगिक (जैसे मेथेन, एलपीजी, कोयला) वायु में दहन (Combustion) पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
- इनका प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) उपयुक्त होता है और दहन के पश्चात कोई हानिकारक विषैला अवशेष नहीं बचता।
- आयनिक यौगिकों में धनायन (Cations) तथा ऋणायन (Anions) परस्पर मजबूत स्थिरविद्युत आकर्षण बल (Strong Electrostatic Force of Attraction) द्वारा जुड़े होते हैं।
- इस मजबूत अंतर-आयनिक आबंध (Inter-ionic Bond) को तोड़ने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसीलिए इनका गलनांक (Melting Point) एवं क्वथनांक अत्यधिक उच्च होता है।
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में आयरन (Fe), कॉपर (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
- लोहा कॉपर सल्फेट विलयन से तांबे को विस्थापित (Displace) कर देता है, जिससे नीले रंग का कॉपर सल्फेट बदलकर हरे रंग के फेरस सल्फेट (FeSO4) में परिवर्तित हो जाता है।
- मधुमक्खी के डंक में मेथेनॉइक अम्ल (Methanoic Acid / Formic Acid – HCOOH) उपस्थित होता है।
- जब मधुमक्खी काटती है, तो यह अम्ल त्वचा के अंदर प्रविष्ट हो जाता है, जिससे अम्ल के प्रभाव से दर्द एवं जलन होती है। (दुर्बल क्षार जैसे बेकिंग सोडा लगाने से अम्ल उदासीन हो जाता है)।
- परिभाषा: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है और नए यौगिक बनते हैं, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण: सोडियम सल्फेट तथा बेरियम क्लोराइड के जलीय विलयन की अभिक्रिया:
- परिभाषा: किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता (H+ ion concentration) को मापने वाले स्केल को pH स्केल कहते हैं। (pH = -log[H+])।
- पैमाना: इसका मान 0 से 14 तक होता है।
- pH < 7 → अम्लीय विलयन (Acidic)
- pH = 7 → उदासीन विलयन (Neutral, जैसे शुद्ध जल)
- pH > 7 → क्षारीय विलयन (Basic)
- साबुन के अणु (C17H35COONa) के दो सिरे होते हैं:
1. जलरागी सिरा (Hydrophilic Head): आयनिक सिरा जो जल में घुलनशील होता है।
2. जलविरागी सिरा (Hydrophobic Tail): लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ जो तेल/मैले कणों में घुलनशील होती है। - जल में साबुन घोलने पर अणु इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि हाइड्रोकार्बन सिरा तेल के कण की ओर (केंद्र में) तथा आयनिक सिरा बाहर जल की ओर होता है। इस गोलिया संरचना को मिसेल (Micelle) कहते हैं, जो मैल को खींचकर जल में निलंबित कर देता है।
- सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुओं की क्रियाशीलता अत्यधिक कम (सबसे कम अभिक्रियाशील) होती है। ये धातुएं वायुमंडल से अभिक्रिया नहीं करतीं और भूपर्पटी में स्वतंत्र/मुक्तावस्था (Native State) में पाई जाती हैं।
- दो धातुएं: गोल्ड/सोना (Gold – Au) एवं प्लैटिनम (Platinum – Pt) या सिल्वर/चाँदी (Ag)।
- सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएं (जैसे Fe, Zn, Pb) भूपर्पटी में मुख्यतः अपने ऑक्साइड (Oxides), सल्फाइड (Sulfides) या कार्बोनेट (Carbonates) अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
- अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं को 3 वर्गों (Three Categories) में विभाजित किया गया है:
1. उच्च अभिक्रियाशील धातुएं (High Reactivity Metals – Na, K, Ca)
2. मध्यम अभिक्रियाशील धातुएं (Medium Reactivity Metals – Fe, Zn, Pb)
3. निम्न अभिक्रियाशील धातुएं (Low Reactivity Metals – Cu, Ag, Au)
- दो धातुएं: सोडियम (Sodium – Na) तथा पोटैशियम (Potassium – K) या कैल्शियम (Ca)।
- परिष्करण/निष्कर्षण विधि: अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण इन धातुओं के गलित क्लोराइडों का विद्युत अपघटनी अपचयन / परिष्करण (Electrolytic Reduction / Electrolysis) करके शुद्ध धातु कैथोड पर प्राप्त की जाती है।
- कुछ सरीसृपों एवं जीवों में लिंग निर्धारण आनुवंशिक (Genes) न होकर पर्यावरणीय कारकों (जैसे निषेचित अंडे के ऊष्मायन तापमान / Incubation Temperature) पर निर्भर करता है।
- दो उदाहरण: घोंघा (Snail) (जो अपना लिंग बदल सकता है) तथा कछुआ (Turtle) / छिपकली (Agama Lizard)।
- जनकों (माता-पिता) से संतति में डीएनए (DNA) अणुओं से बने गुणसूत्रों (Chromosomes) का जीन सेट स्थानांतरित होता है।
- प्रत्येक जनक (माता एवं पिता) संतति को गुणसूत्रों का आधा सेट (Half set of Chromosomes – 23 गुणसूत्र) प्रदान करता है, जिससे संतति में द्विगुणित (2n = 46) स्थिति पुनर्स्थापित होती है।
- हाँ, हम सूरज की बात से पूर्णतः सहमत हैं। मानवों में लिंग निर्धारण पूरी तरह से आनुवंशिक (Genetic Basis) होता है।
- वैज्ञानिक स्पष्टीकरण:
- मानव कोशिका में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम (Autosomes) तथा 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) होते हैं।
- मादा (स्त्री) में दोनों लिंग गुणसूत्र समान यानी XX होते हैं, जबकि नर (पुरुष) में ये असमान यानी XY होते हैं।
- माता से सदैव X गुणसूत्र वाला युग्मक (अंडकोशिका) प्राप्त होता है। पिता से दो प्रकार के शुक्राणु बनते हैं – 50% X गुणसूत्र वाले तथा 50% Y गुणसूत्र वाले।
- यदि X-अंडकोशिका का निषेचन X-शुक्राणु से होता है, तो संतति पुत्री (XX) होती है। यदि Y-शुक्राणु से होता है, तो संतति पुत्र (XY) होता है।
- पुमंग (Androecium / Stamens) – नर जननांग: इसके दो मुख्य भाग होते हैं—
- परागकोश (Anther): जिसमें परागकण (Pollen Grains) बनते हैं।
- पुंतंतु (Filament): पतली डंडीनुमा संरचना।
- जायांग (Gynoecium / Pistil / Carpel) – मादा जननांग: इसके तीन मुख्य भाग होते हैं—
- वर्तिकाग्र (Stigma): ऊपर चिपचिपा सिरा जहाँ परागकण उतरते हैं।
- वर्तिका (Style): पतली लंबी नलिका।
- अंडाशय (Ovary): निचला फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovule / Egg) उपस्थित होते हैं।
- 1. एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flower): वे पुष्प जिनमें केवल पुमंग (नर अंग) या केवल जायांग (मादा अंग) उपस्थित होता है।
उदाहरण: पपीता (Papaya), तरबूज (Watermelon), मक्का (Maize)। - 2. उभयलिंगी पुष्प (Bisexual / Hermaphrodite Flower): वे पुष्प जिनमें नर जननांग (पुमंग) तथा मादा जननांग (जायांग) दोनों एक ही पुष्प में उपस्थित होते हैं।
उदाहरण: गुड़हल (Hibiscus), सरसों (Mustard), मटर (Pea)।
- यह चित्र विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों (Ecosystems) जैसे—मैदानी (Forest), घास के मैदान (Grassland) तथा जलीय (Aquatic) पारिस्थितिक तंत्रों में जीवों के बीच खाद्य संबंधों को दर्शाने वाली आहार श्रृंखलाओं (Food Chains) एवं खाद्य जाल (Food Web) से संबंधित है।
- आहार श्रृंखला में प्रथम पोषी स्तर (T1) सदैव उत्पादक यानी स्वपोषी पौधे (Producers / Autotrophs – हरे पौधे व जल-पादप) होते हैं।
- उत्पादक (हरे पौधे) प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उपयोग करके सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज/कार्बोहाइड्रेट) में बदलते हैं और सभी उपभोक्ताओं के लिए भोजन निर्मित करते हैं।
- ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (Unidirectional) होता है: सौर ऊर्जा → उत्पादक → शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) → मांसाहारी (द्वितीयक/तृतीयक उपभोक्ता)।
- 10% नियम (Lindeman’s 10% Law): एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर में केवल 10% ऊर्जा ही कार्बनिक पदार्थ के रूप में स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीव की उपापचयी क्रियाओं (Respiration, Growth) तथा ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में व्यय हो जाती है।
- व्याख्या: जब किसी पूर्ण रूप से विभेदित जीव का शरीर किसी दुर्घटना से कटकर कई टुकड़ों में टूट जाता है, तो इसकी विशिष्ट कोशिकाएं (Regenerative Cells) विभाजित होकर पुनः पूर्ण नए जीव का निर्माण कर लेती हैं।
- उदाहरण: प्लेनेरिया (Planaria) तथा हाइड्रा (Hydra)।
- व्याख्या: जीव के शरीर की सतह पर कोशिका विभाजन के कारण एक छोटा उभार बनता है जिसे मुकुल (Bud) कहते हैं। यह मुकुल निरंतर वृद्धि करके एक नन्हे जीव में बदल जाता है और परिपक्व होकर जनक के शरीर से अलग हो स्वतंत्र जीवन जी ता है।
- उदाहरण: हाइड्रा (Hydra) तथा ईस्ट (Yeast)।
- व्याख्या: कवकों के धागे जैसी संरचना (कवकजाल / Hyphae) के ऊपर गोल बीजाणुधानी (Sporangium) पाई जाती है। इसके अंदर गोल, सूक्ष्म एवं मोटे आवरण वाले बीजाणु (Spores) बनते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षित रहकर ये बीजाणु नम सतह मिलने पर अंकुरित होकर नया कवक बनाते हैं।
- उदाहरण: राइजोपस / ब्रेड मोल्ड (Rhizopus / Bread Mould)।
- 1. अतिसूक्ष्म निस्पंदन (Glomerular Filtration / Ultrafiltration):
- वृक्क धमनी की शाखाएं उच्च दाब के साथ रुधिर को केशिकागुच्छ (Glomerulus) में लाती हैं।
- बोमेन सम्पुट (Bowman’s Capsule) की पतली भित्ति से जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण तथा यूरिया छनकर नेफ्रॉन की नलिका में आ जाते हैं (रक्त कोशिकाएं व प्रोटीन नहीं छनते)। इस छनित द्रव को प्रारंभिक निस्पंद कहते हैं।
- 2. वर्णात्मक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption):
- जब यह प्रारम्भिक निस्पंद नेफ्रॉन की कुंडलित नलिका (Tubule) से गुजरता है, तो शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण (Na+, Cl–) तथा जल का रुधिर केशिकाओं द्वारा पुनः अवशोषण कर लिया जाता है।
- 3. नलिकाकार स्रावण (Tubular Secretion):
- केशिकाओं में बचा अतिरिक्त अपशिष्ट (K+ आयन, H+ आयन तथा औषधियां) पुनः नेफ्रॉन नलिका में स्रावित कर दिया जाता है।
- अंत में बचा हुआ सांद्रित द्रव मूत्र (Urine) कहलाता है, जिसमें मुख्य रूप से यूरिया, यूरिक अम्ल, जल व लवण होते हैं। यह मूत्र संग्राहक वाहिनी (Collecting Duct) से होता हुआ मूत्राशय (Urinary Bladder) में एकत्र हो जाता है।