CONCEPTUAL RATIONALE
जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में उपस्थित वर्षा की सूक्ष्म बूंदों पर आपतित होता है, तो ये बूंदें छोटे प्रिज्म (Prism) की भांति कार्य करती हैं। प्रकाश की किरणें सबसे पहले वायु से जल की बूंद में प्रवेश करते समय अपवर्तित (Refracted) होती हैं, फिर जल की बूंद के भीतर विभिन्न रंगों में विभक्त होकर वर्ण-विक्षेपित (Dispersed) होती हैं। तत्पश्चात बूंद की आंतरिक सतह से पूर्ण आंतरिक परावर्तित (Total Internally Reflected) होकर बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तित होती हैं [1]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) अपवर्तन, विक्षेपण तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन
STEP-BY-STEP EXPLANATION
अवतल दर्पण (Concave Mirror) के प्रतिबिम्ब निर्माण के नियमों के अनुसार [2]:
- जब वस्तु अनंत (Infinity) पर रखी होती है, तो प्रकाश की समानांतर किरणें फोकस पर मिलती हैं, जिससे प्रतिबिम्ब अत्यधिक छोटा तथा बिंदु आकार (Highly Diminished / Point-sized) बनता है। अतः X = अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार)।
- जब वस्तु वक्रता केंद्र C (Center of Curvature) पर रखी होती है, तो प्रतिबिम्ब भी C पर ही बनता है और इसका आकार वस्तु के बिल्कुल बराबर होता है। अतः Y = समान आकार (Same size)।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (D) X- अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार), Y- समान आकार
FORMULA USED
- श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance in Series): Req = R1 + R2
- ओम का नियम (Ohm’s Law): I = V / Req
- जूल का तापन नियम (Joule’s Law of Heating): H = I2 × R × t
STEP-BY-STEP SOLUTION
1. परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध (Req):
Req = 2 Ω + 4 Ω = 6 Ω
2. परिपथ में प्रवाहित कुल धारा (I):
I = VReq = 6 V6 Ω = 1 A
3. श्रेणीक्रम संयोजन में दोनों प्रतिरोधकों में समान धारा (1 A) प्रवाहित होगी। अतः 4 Ω वाले प्रतिरोधक में 5 सेकंड में क्षय हुई ऊष्मा (H):
H = (1 A)2 × 4 Ω × 5 s = 1 × 4 × 5 = 20 Joule (J)
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (C) 20 J
FORMULA USED
- रेखीय आवर्धन (Linear Magnification): m = h2h1 = –vu
- दर्पण सूत्र (Mirror Formula): 1f = 1v + 1u
STEP-BY-STEP SOLUTION
1. आवर्धन सूत्र से वस्तु की दूरी (u) ज्ञात करना:
m = -0.51.0 = -0.5
–vu = -0.5 ⇒ -(-30)u = -0.5 ⇒ 30u = -0.5
u = 30-0.5 = -60 cm
2. दर्पण सूत्र का प्रयोग करके फोकस दूरी (f) ज्ञात करना [3]:
1f = 1v + 1u = 1-30 + 1-60 = -2 – 160 = -360 = –120
f = -20 cm
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) -20 cm
CONCEPTUAL RATIONALE
वैद्युत उपकरणों के सही संयोजन के नियम [3, 4]:
- अमीटर (Ammeter): इसे सदैव मुख्य परिपथ के साथ श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है तथा इसका धनात्मक ध्रुव (+) बैटरी के धनात्मक सिरे से जुड़ना चाहिए।
- वोल्टमीटर (Voltmeter): इसे विभवांतर मापने के लिए प्रतिरोधक के साथ समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है और इसका धनात्मक ध्रुव (+) भी बैटरी के धनात्मक सिरे की ओर होता है।
परिपथ चित्र (ii) में अमीटर श्रेणीक्रम में तथा वोल्टमीटर समांतर क्रम में सही ध्रुवता (Polarity) के साथ संयोजित हैं।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) (ii)
CONCEPTUAL RATIONALE
धारावाही परिनालिका (Current-carrying Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (Magnetic Field Lines) समानांतर तथा समान दूरी पर स्थित सीधी रेखाएं होती हैं। यह इस बात का संकेत है कि परिनालिका के अंदर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (Uniform Magnetic Field) रहता है [3]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (C) सभी बिंदुओं पर समान होती है
CONCEPTUAL RATIONALE
वाहनों की हेडलाइटों तथा टॉर्चों में अवतल दर्पण परावर्तक (Concave Reflector) के रूप में कार्य करता है। जब प्रकाश स्रोत (बल्ब) को अवतल परावर्तक के फोकस के अत्यधिक निकट (Very close to focus) रखा जाता है, तो परावर्तन के पश्चात प्रकाश का एक शक्तिशाली समानांतर किरण-पुंज (Strong Parallel Beam) प्राप्त होता है [4]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) परावर्तक के फोकस के अत्यधिक निकट
CONCEPTUAL RATIONALE
1. इस अभिक्रिया में अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है, अतः यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) है [4]।
2. अभिक्रिया के फलस्वरूप बेरियम सल्फेट (BaSO4) का एक अघुलनशील श्वेत अवक्षेप (White Precipitate) बनता है, इसलिए यह एक अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) भी है [4]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (C) (ii) तथा (iv)
STEP-BY-STEP EXPLANATION
सही रासायनिक सूत्रों का मिलान इस प्रकार है [5]:
- 1. विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder): कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड → CaOCl2 (iii)
- 2. बेकिंग सोडा (Baking Soda): सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट → NaHCO3 (iv)
- 3. धोने का सोडा (Washing Soda): सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट → Na2CO3 · 10H2O (i)
- 4. प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris): कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट → CaSO4 · ½H2O (ii)
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (A) 1-(iii), 2-(iv), 3-(i), 4-(ii)
CONCEPTUAL RATIONALE
एथेन (Ethane – C2H6) के एक अणु में दो कार्बन परमाणु (C) परस्पर एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करके एकल सहसंयोजी आबंध (Single Covalent Bond) बनाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन-तीन हाइड्रोजन परमाणुओं (H) के साथ इलेक्ट्रॉन युग्म का साझा करता है [6]। चित्र (B) एथेन की सही बिंदु संरचना दर्शाता है।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) चित्र B
CONCEPTUAL RATIONALE
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उच्च सांद्रता के कारण वे ऊष्मा की उत्तम चालक होती हैं। सभी धातुओं में सिल्वर (Silver – Ag) ऊष्मा का सर्वोत्तम चालक है, तथा इसके पश्चात कॉपर (Copper – Cu) का स्थान आता है [6]। (मर्करी और लेड ऊष्मा के तुलनात्मक रूप से कुचालक हैं)।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (A) सिल्वर तथा कॉपर
CONCEPTUAL RATIONALE
चाँदी (Silver – Ag) की वस्तुएं वायुमण्डलीय सल्फर/हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) गैस के साथ संक्षारित (Corroded) होकर काले रंग के सिल्वर सल्फाइड (Ag2S) की पतली परत बना लेती हैं [7]। अतः अभिकथन और कारण दोनों पूर्णतः सही हैं।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (A) अभिकथन और कारण दोनों सही हैं
CONCEPTUAL RATIONALE
यह साल्वे प्रक्रम (Solvay Process) द्वारा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (बेकिंग सोडा – NaHCO3) के निर्माण की रासायनिक अभिक्रिया है। इस प्रक्रिया में सह-उत्पाद के रूप में अमोनियम क्लोराइड (NH4Cl) प्राप्त होता है, अतः यौगिक X = NH4Cl [5, 7]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) NH4Cl
CONCEPTUAL RATIONALE
इंसुलिन, टेस्टोस्टेरोन तथा एड्रेनेलिन मानव शरीर में ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक यानी हॉर्मोन (Hormones) हैं [5]। इसके विपरीत, टाइलिन (Ptyalin/Salivary Amylase) लार में उपस्थित एक पाचक एंजाइम (Enzyme) है जो स्टार्च को माल्टोज़ में बदलता है। अतः टाइलिन अन्य तीनों से विषम है।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (C) टाइलिन
CONCEPTUAL RATIONALE
पत्तियों में रंध्र छिद्र (Stomatal Pore) का खुलना और बंद होना द्वार कोशिकाओं (Guard Cells) की स्फीति (Turgidity) पर निर्भर करता है। जब परासरण द्वारा जल द्वार कोशिकाओं में प्रवेश करता है, तो वे स्फीत (Swell) होकर वक्र हो जाती हैं जिससे छिद्र खुल जाता है। जब जल बाहर निकलता है, तो कोशिकाएं श्लथ (Shrink) हो जाती हैं और छिद्र बंद हो जाता है [5]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) कथन तथा कारण दोनों सही हैं
STEP-BY-STEP EXPLANATION
सही मिलान की व्याख्या [8]:
- (i) तंत्रिका तंत्र: न्यूरॉन का संवेदी भाग द्रुमिका (Dendrite) है → (ब)
- (ii) हृदय: मानव हृदय के मुख्य कोष्ठ अलिंद तथा निलय (Atrium & Ventricle) हैं → (अ)
- (iii) छुईमुई: स्पर्श करने पर होने वाली गति स्पानुकुंचन (Nastic Movement) कहलाती है → (द)
- (iv) एड्रेनेलिन हॉर्मोन: यह अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) से स्रावित होता है → (स)
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) (i)-ब, (ii)-अ, (iii)-द, (iv)-स
CONCEPTUAL RATIONALE
बीज के अंकुरण (Seed Germination) के विभिन्न भाग [8]:
- भाग a: प्रांकुर (Plumule) – यह भावी प्ररोह (Shoot System) बनाता है।
- भाग b: बीजपत्र (Cotyledon) – यह भ्रूण के लिए खाद्य भंडारण करता है।
- भाग c: मूलांकुर (Radicle) – यह भावी जड़ (Root System) बनाता है।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (C) प्रांकुर, बीजपत्र और मूलांकुर
CONCEPTUAL RATIONALE
मेंडेल के प्रभाविता के नियम (Law of Dominance) के अनुसार, बीज का गोल आकार (R) झुर्रीदार आकार (r) पर तथा पीला रंग (Y) हरे रंग (y) पर पूर्णतः प्रभावी है [9]। इसलिए F1 पीढ़ी के सभी पौधे विषमयुग्मजी गोल और पीले (Round and Yellow) बीज वाले होंगे।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (A) गोल और पीले
CONCEPTUAL RATIONALE
खाद्य श्रृंखला (Food Chain) के विभिन्न पोषी स्तरों (Trophic Levels) में अजैव निम्नीकरणीय हानिकारक रसायनों (Non-biodegradable Pesticides) की सांद्रता में उत्तरोत्तर होने वाली वृद्धि को जैव आवर्धन (Biological Magnification) कहते हैं [9]।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (B) खाद्य श्रृंखला में पीडकनाशी एवं रसायनों का अत्यधिक संचित होना
CONCEPTUAL RATIONALE
मानव मादा जनन तंत्र के रेखाचित्र में संकेतांक ‘A’ पार्श्व में स्थित बादाम के आकार के प्राथमिक जननांग अंडाशय (Ovary) को प्रदर्शित करता है [9]। अंडाशय का मुख्य कार्य मादा युग्मक (अंडकोशिका/Egg) का निर्माण करना तथा एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्राव करना है।
FINAL ANSWER
सही विकल्प: (D) अंडाशय
FORMULA / RAY DIAGRAM RULES USED
उत्तल दर्पण (Convex Mirror) द्वारा प्रतिबिम्ब बनने के मुख्य नियम:
- मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित प्रकाश किरणें परावर्तन के पश्चात मुख्य फोकस F (Focus) से आती हुई प्रतीत होती हैं।
- वक्रता केंद्र C (Center of Curvature) की दिशा में आपतित किरण परावर्तन के बाद उसी मार्ग पर वापस लौट जाती है।
STEP-BY-STEP EXPLANATION
1. स्थिति 1 (जब बिंब अनंत पर स्थित हो):
- प्रतिबिंब का स्थान (Position): दर्पण के पीछे मुख्य फोकस F पर बनता है।
- प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature): आभासी एवं सीधा (Virtual and Erect)।
- प्रतिबिंब का आकार (Size): अत्यधिक छोटा अर्थात बिंदु आकार (Highly Diminished / Point-sized)।
2. स्थिति 2 (जब बिंब अनंत तथा ध्रुव P के बीच स्थित हो):
- प्रतिबिंब का स्थान (Position): दर्पण के पीछे ध्रुव P तथा फोकस F के बीच बनता है।
- प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature): आभासी एवं सीधा (Virtual and Erect)।
- प्रतिबिंब का आकार (Size): बिंब (वस्तु) से छोटा (Diminished)।
FINAL ANSWER
निष्कर्ष: उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा एवं छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। अनंत पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब फोकस पर बिंदु रूप में तथा सीमित दूरी पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब P व F के मध्य वस्तु से छोटा बनता है।
(i) (क) वाक्य का संशोधन (Correction of Statement A):
- त्रुटि (Error): दिए गए वाक्य में निकट दृष्टि दोष (Myopia) की परिभाषा गलत लिखी गई है।
- वैज्ञानिक तथ्य: निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास की वस्तुएं तो स्पष्ट देख लेता है, परंतु दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता।
- संशोधित सही वाक्य: “निकट दृष्टि दोषयुक्त (Myopic) व्यक्ति निकट रखी वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से देख सकता है, परंतु दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता।“
(i) (ख) वाक्य का संशोधन (Correction of Statement B):
- त्रुटि (Error): प्रिज्म में सभी रंगों का विचलन समान नहीं होता।
- वैज्ञानिक तथ्य: वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) के कारण अलग-अलग तरंगदैर्घ्य (Wavelength) के प्रकाश अलग-अलग कोणों पर विचलित होते हैं। बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक तथा लाल रंग का विचलन सबसे कम होता है।
- संशोधित सही वाक्य: “किसी प्रिज्म से गुजरने के पश्चात, प्रकाश के विभिन्न वर्ण आपतित किरण के सापेक्ष अलग-अलग (विभिन्न) कोणों पर झुकते हैं। बैंगनी वर्ण सबसे अधिक तथा लाल वर्ण सबसे कम कोण पर झुकता है।“
(ii) आयताकार काँच के स्लैब से अपवर्तन (Refraction through Rectangular Glass Slab):
- जब प्रकाश किरण वायु (विरल माध्यम / Rare Medium) से काँच (सघन माध्यम / Dense Medium) में प्रवेश करती है, तो यह अभिलंब (Normal) की ओर झुकती है (i > r)।
- जब प्रकाश किरण काँच से पुनः वायु में निकलती है, तो यह अभिलंब से दूर हटती है।
- निर्गत किरण (Emergent Ray) आपतित किरण (Incident Ray) के समानांतर (Parallel) होती है, परंतु इसमें पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement) उत्पन्न होता है।
FINAL ANSWER
दोनों वाक्यों का सही वैज्ञानिक रूप ऊपर स्पष्ट कर दिया गया है। काँच के स्लैब में निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर निकलती है।
FORMULA USED
- विद्युत सामर्थ्य/ऊष्मा सूत्र (Heat-Power Relation): H = P · t = (V2 / R) · t
- विभवांतर सूत्र (Potential Difference Formula): V = √(H · R / t)
STEP-BY-STEP SOLUTION
1. प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा यानी विद्युत शक्ति (P) की गणना:
P = Ht = 100 J1 s = 100 W (Watt)
2. शक्ति एवं विभवांतर के संबंध P = V2 / R द्वारा विभवांतर (V) ज्ञात करना:
100 = V24 Ω
V2 = 100 × 4 = 400
V = √400 = 20 V
(वैकल्पिक विधि: H = I2Rt ⇒ 100 = I2 × 4 × 1 ⇒ I = 5 A. इसके बाद V = I × R = 5 × 4 = 20 V)।
FINAL ANSWER
प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर (Potential Difference, V) = 20 V (वोल्ट)
1. मुख्य अवयव (Key Components):
- विद्युन्मय तार (Live Wire): लाल रोधन (Red Insulation) युक्त, जो 220 V के उच्च विभव पर होता है।
- उदासीन तार (Neutral Wire): काला रोधन (Black Insulation) युक्त, जो 0 V विभव पर होता है।
- भूसंपर्क तार (Earth Wire): हरा रोधन (Green Insulation) युक्त, जो सुरक्षा हेतु भूमि में दबी तांबे की प्लेट से जुड़ा होता है।
- विद्युत मीटर एवं बोर्ड फ्यूज/MCB: मुख्य आपूर्ति लाइन में लगे होते हैं।
2. परिपथ का वर्णन एवं विशेषताएं (Circuit Features):
- समांतर क्रम संयोजन (Parallel Connection): घरेलू परिपथ में सभी उपकरणों को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है ताकि प्रत्येक उपकरण को 220 V का समान विभवांतर मिले तथा एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण निर्बाध चलते रहें।
- भूसंपर्कन (Earthing): धातु के आवरण वाले उपकरणों (जैसे गीजर, फ्रिज, प्रेस) में क्षरित धारा से विद्युत आघात (Electric Shock) से सुरक्षा प्रदान करता है।
- फ्यूज / MCB: अतिभारण (Overloading) तथा लघुपथन (Short Circuit) के समय धारा अत्यधिक बढ़ने पर पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है।
अथवा (OR)
OR QUESTION SOLUTION: विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
1. तापीय प्रभाव की परिभाषा (Definition):
जब किसी उच्च प्रतिरोध वाले चालक (जैसे नाइक्रोम तार) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक का प्रतिरोध विद्युत ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) में परिवर्तित कर देता है, जिससे चालक अत्यधिक गर्म हो जाता है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Joule’s Heating Effect) कहते हैं।
सूत्र: H = I2 · R · t = V · I · t = (V2 / R) · t
2. व्यावहारिक अनुप्रयोग (Practical Applications):
- विद्युत तापन उपकरण (Electric Heating Appliances): विद्युत हीटर, प्रेस (Electric Iron), गीजर तथा टोस्टर में उच्च प्रतिरोध व उच्च गलनांक वाली नाइक्रोम (Nichrome) मिश्रधातु की कुंडली का प्रयोग किया जाता है।
- विद्युत बल्ब (Electric Bulb): बल्ब में अत्यधिक उच्च गलनांक (3380°C) वाली टंगस्टन (Tungsten) धातु का फिलामेंट लगाया जाता है, जो गर्म होकर तीव्र प्रकाश उत्सर्जित करता है।
- विद्युत फ्यूज (Electric Fuse): परिपथ सुरक्षा हेतु श्रेणीक्रम में कम गलनांक वाली मिश्रधातु (टिन व लेड) का फ्यूज तार लगाया जाता है, जो अतिप्रवाह (Overcurrent) पर पिघलकर परिपथ की रक्षा करता है।
FINAL ANSWER
खण्ड ‘ब’ का उपखण्ड (i) भौतिक विज्ञान सम्पूर्ण हल किया जा चुका है।
(i) लेड नाइट्रेट का तापीय अपघटन (Thermal Decomposition of Lead Nitrate):
2Pb(NO3)2(s) Δ→ 2PbO(s) + 4NO2(g)↑ + O2(g)↑
- व्याख्या: लेड नाइट्रेट Pb(NO3)2 को गर्म करने पर यह अपघटित होकर पीले रंग का लेड ऑक्साइड (PbO), भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) गैस तथा ऑक्सीजन (O2) गैस बनाता है।
(ii) मैंगनीज डाइऑक्साइड की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया:
MnO2(s) + 4HCl(aq) → MnCl2(aq) + 2H2O(l) + Cl2(g)↑
- व्याख्या: इस रेडॉक्स अभिक्रिया में मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) का अपचयन (Reduction) मैंगनीज क्लोराइड (MnCl2) में तथा HCl का ऑक्सीकरण (Oxidation) क्लोरीन गैस (Cl2) में होता है।
(iii) एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification Reaction):
CH3COOH(l) + C2H5OH(l) सांद्र H2SO4→ CH3COOC2H5(l) + H2O(l)
- व्याख्या: एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic Acid) तथा एथेनॉल (Ethanol) अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके मीठी गंध वाला एस्टर यानी एथिल एथेनोएट (CH3COOC2H5) बनाते हैं।
(iv) कॉपर सल्फाइड की जारण/भर्जन अभिक्रिया (Roasting):
2Cu2S(s) + 3O2(g) Δ→ 2Cu2O(s) + 2SO2(g)↑
- व्याख्या: क्युप्रस सल्फाइड (Cu2S) को वायु की उपस्थिति में गर्म (भर्जन) करने पर यह क्युप्रस ऑक्साइड (Cu2O) तथा सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस में परिवर्तित हो जाता है।
FINAL ANSWER
सभी 4 अभिक्रियाओं के पूर्ण संतुलित समीकरण (Balanced Chemical Equations) ऊपर प्रस्तुत किए गए हैं।
(i) कार्बन एवं उसके यौगिकों का ईंधन के रूप में उपयोग:
- कार्बन तथा इसके हाइड्रोकार्बन यौगिक (जैसे मेथेन, एलपीजी, कोयला) वायु में दहन (Combustion) पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
- इनका प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) उपयुक्त होता है और दहन के पश्चात कोई हानिकारक विषैला अवशेष नहीं बचता।
C + O2 → CO2 + ऊष्मा (Heat) + प्रकाश
(ii) आयनिक यौगिकों का उच्च गलनांक:
- आयनिक यौगिकों में धनायन (Cations) तथा ऋणायन (Anions) परस्पर मजबूत स्थिरविद्युत आकर्षण बल (Strong Electrostatic Force of Attraction) द्वारा जुड़े होते हैं।
- इस मजबूत अंतर-आयनिक आबंध (Inter-ionic Bond) को तोड़ने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसीलिए इनका गलनांक (Melting Point) एवं क्वथनांक अत्यधिक उच्च होता है।
(iii) लोहे की कील डुबोने पर कॉपर सल्फेट विलयन का रंग बदलना:
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में आयरन (Fe), कॉपर (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
- लोहा कॉपर सल्फेट विलयन से तांबे को विस्थापित (Displace) कर देता है, जिससे नीले रंग का कॉपर सल्फेट बदलकर हरे रंग के फेरस सल्फेट (FeSO4) में परिवर्तित हो जाता है।
Fe(s) + CuSO4(aq) [नीला] → FeSO4(aq) [हरा] + Cu(s)
(iv) मधुमक्खी के डंक में दर्द एवं जलन का कारण:
- मधुमक्खी के डंक में मेथेनॉइक अम्ल (Methanoic Acid / Formic Acid – HCOOH) उपस्थित होता है।
- जब मधुमक्खी काटती है, तो यह अम्ल त्वचा के अंदर प्रविष्ट हो जाता है, जिससे अम्ल के प्रभाव से दर्द एवं जलन होती है। (दुर्बल क्षार जैसे बेकिंग सोडा लगाने से अम्ल उदासीन हो जाता है)।
FINAL ANSWER
चारों रासायनिक परिघटनाओं के सटीक कारण एवं समीकरण स्पष्ट कर दिए गए हैं।
(i) द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction):
- परिभाषा: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है और नए यौगिक बनते हैं, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण: सोडियम सल्फेट तथा बेरियम क्लोराइड के जलीय विलयन की अभिक्रिया:
Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s)↓ [श्वेत अवक्षेप] + 2NaCl(aq)
(ii) pH स्केल (pH Scale):
- परिभाषा: किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता (H+ ion concentration) को मापने वाले स्केल को pH स्केल कहते हैं। (pH = -log[H+])।
- पैमाना: इसका मान 0 से 14 तक होता है।
- pH < 7 → अम्लीय विलयन (Acidic)
- pH = 7 → उदासीन विलयन (Neutral, जैसे शुद्ध जल)
- pH > 7 → क्षारीय विलयन (Basic)
(iii) मिसेल का निर्माण (Micelle Formation / Cleansing Action of Soap):
- साबुन के अणु (C17H35COONa) के दो सिरे होते हैं:
1. जलरागी सिरा (Hydrophilic Head): आयनिक सिरा जो जल में घुलनशील होता है।
2. जलविरागी सिरा (Hydrophobic Tail): लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ जो तेल/मैले कणों में घुलनशील होती है।
- जल में साबुन घोलने पर अणु इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि हाइड्रोकार्बन सिरा तेल के कण की ओर (केंद्र में) तथा आयनिक सिरा बाहर जल की ओर होता है। इस गोलिया संरचना को मिसेल (Micelle) कहते हैं, जो मैल को खींचकर जल में निलंबित कर देता है।
अथवा (OR)
OR QUESTION SOLUTION: गद्यांश पर आधारित प्रश्न
(i) सबसे नीचे स्थित धातुओं की क्रियाशीलता एवं उदाहरण:
- सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुओं की क्रियाशीलता अत्यधिक कम (सबसे कम अभिक्रियाशील) होती है। ये धातुएं वायुमंडल से अभिक्रिया नहीं करतीं और भूपर्पटी में स्वतंत्र/मुक्तावस्था (Native State) में पाई जाती हैं।
- दो धातुएं: गोल्ड/सोना (Gold – Au) एवं प्लैटिनम (Platinum – Pt) या सिल्वर/चाँदी (Ag)।
(ii) मध्य की धातुओं का भूपर्पटी में रूप:
- सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएं (जैसे Fe, Zn, Pb) भूपर्पटी में मुख्यतः अपने ऑक्साइड (Oxides), सल्फाइड (Sulfides) या कार्बोनेट (Carbonates) अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
(iii) क्रियाशीलता के आधार पर धातुओं का वर्गीकरण:
- अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं को 3 वर्गों (Three Categories) में विभाजित किया गया है:
1. उच्च अभिक्रियाशील धातुएं (High Reactivity Metals – Na, K, Ca)
2. मध्यम अभिक्रियाशील धातुएं (Medium Reactivity Metals – Fe, Zn, Pb)
3. निम्न अभिक्रियाशील धातुएं (Low Reactivity Metals – Cu, Ag, Au)
(iv) सबसे ऊपर स्थित धातुएं एवं निष्कर्षण विधि:
- दो धातुएं: सोडियम (Sodium – Na) तथा पोटैशियम (Potassium – K) या कैल्शियम (Ca)।
- परिष्करण/निष्कर्षण विधि: अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण इन धातुओं के गलित क्लोराइडों का विद्युत अपघटनी अपचयन / परिष्करण (Electrolytic Reduction / Electrolysis) करके शुद्ध धातु कैथोड पर प्राप्त की जाती है।
FINAL ANSWER
खण्ड ‘ब’ का उपखण्ड (ii) रसायन विज्ञान सम्पूर्ण हल किया जा चुका है।
(i) पर्यावरण पर निर्भर लिंग निर्धारण वाले जीव (Non-Genetic Sex Determination):
- कुछ सरीसृपों एवं जीवों में लिंग निर्धारण आनुवंशिक (Genes) न होकर पर्यावरणीय कारकों (जैसे निषेचित अंडे के ऊष्मायन तापमान / Incubation Temperature) पर निर्भर करता है।
- दो उदाहरण: घोंघा (Snail) (जो अपना लिंग बदल सकता है) तथा कछुआ (Turtle) / छिपकली (Agama Lizard)।
(ii) जनकों से संतति में जाने वाला आनुवंशिक सेट (Genetic Material Transfer):
- जनकों (माता-पिता) से संतति में डीएनए (DNA) अणुओं से बने गुणसूत्रों (Chromosomes) का जीन सेट स्थानांतरित होता है।
- प्रत्येक जनक (माता एवं पिता) संतति को गुणसूत्रों का आधा सेट (Half set of Chromosomes – 23 गुणसूत्र) प्रदान करता है, जिससे संतति में द्विगुणित (2n = 46) स्थिति पुनर्स्थापित होती है।
(iii) सूरज के कथन की सत्यता एवं मानव में लिंग निर्धारण की व्याख्या:
- हाँ, हम सूरज की बात से पूर्णतः सहमत हैं। मानवों में लिंग निर्धारण पूरी तरह से आनुवंशिक (Genetic Basis) होता है।
- वैज्ञानिक स्पष्टीकरण:
- मानव कोशिका में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम (Autosomes) तथा 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) होते हैं।
- मादा (स्त्री) में दोनों लिंग गुणसूत्र समान यानी XX होते हैं, जबकि नर (पुरुष) में ये असमान यानी XY होते हैं।
- माता से सदैव X गुणसूत्र वाला युग्मक (अंडकोशिका) प्राप्त होता है। पिता से दो प्रकार के शुक्राणु बनते हैं – 50% X गुणसूत्र वाले तथा 50% Y गुणसूत्र वाले।
- यदि X-अंडकोशिका का निषेचन X-शुक्राणु से होता है, तो संतति पुत्री (XX) होती है। यदि Y-शुक्राणु से होता है, तो संतति पुत्र (XY) होता है।
FINAL ANSWER
निष्कर्ष: मानव में लिंग निर्धारण पिता के लिंग गुणसूत्र (X या Y) द्वारा आनुवंशिक रूप से तय होता है।
REPRODUCTIVE ORGANS OF FLOWER
- पुमंग (Androecium / Stamens) – नर जननांग: इसके दो मुख्य भाग होते हैं—
- परागकोश (Anther): जिसमें परागकण (Pollen Grains) बनते हैं।
- पुंतंतु (Filament): पतली डंडीनुमा संरचना।
- जायांग (Gynoecium / Pistil / Carpel) – मादा जननांग: इसके तीन मुख्य भाग होते हैं—
- वर्तिकाग्र (Stigma): ऊपर चिपचिपा सिरा जहाँ परागकण उतरते हैं।
- वर्तिका (Style): पतली लंबी नलिका।
- अंडाशय (Ovary): निचला फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovule / Egg) उपस्थित होते हैं।
TYPES OF FLOWERS
- 1. एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flower): वे पुष्प जिनमें केवल पुमंग (नर अंग) या केवल जायांग (मादा अंग) उपस्थित होता है।
उदाहरण: पपीता (Papaya), तरबूज (Watermelon), मक्का (Maize)।
- 2. उभयलिंगी पुष्प (Bisexual / Hermaphrodite Flower): वे पुष्प जिनमें नर जननांग (पुमंग) तथा मादा जननांग (जायांग) दोनों एक ही पुष्प में उपस्थित होते हैं।
उदाहरण: गुड़हल (Hibiscus), सरसों (Mustard), मटर (Pea)।
FINAL ANSWER
पुष्प के नर अंग व मादा अंग की उपस्थिति के आधार पर एकलिंगी व उभयलिंगी वर्गीकरण स्पष्ट कर दिया गया है।
(i) चित्र की पहचान (Identification):
- यह चित्र विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों (Ecosystems) जैसे—मैदानी (Forest), घास के मैदान (Grassland) तथा जलीय (Aquatic) पारिस्थितिक तंत्रों में जीवों के बीच खाद्य संबंधों को दर्शाने वाली आहार श्रृंखलाओं (Food Chains) एवं खाद्य जाल (Food Web) से संबंधित है।
(ii) प्रथम पोषी स्तर (First Trophic Level):
- आहार श्रृंखला में प्रथम पोषी स्तर (T1) सदैव उत्पादक यानी स्वपोषी पौधे (Producers / Autotrophs – हरे पौधे व जल-पादप) होते हैं।
(iii) भोजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया (Process of Food Production):
- उत्पादक (हरे पौधे) प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उपयोग करके सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज/कार्बोहाइड्रेट) में बदलते हैं और सभी उपभोक्ताओं के लिए भोजन निर्मित करते हैं।
6CO2 + 12H2O → (सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल) → C6H12O6 + 6O2 + 6H2O
(iv) आहार श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह व रूपांतरण (Energy Flow & Transformation):
- ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (Unidirectional) होता है: सौर ऊर्जा → उत्पादक → शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) → मांसाहारी (द्वितीयक/तृतीयक उपभोक्ता)।
- 10% नियम (Lindeman’s 10% Law): एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर में केवल 10% ऊर्जा ही कार्बनिक पदार्थ के रूप में स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीव की उपापचयी क्रियाओं (Respiration, Growth) तथा ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में व्यय हो जाती है।
FINAL ANSWER
आहार श्रृंखला में ऊर्जा सदैव स्वपोषियों से शाकाहारी व मांसाहारी जीवों की ओर एकदिशीय प्रवाहित होती है।
(i) पुनरुद्भवन (Regeneration):
- व्याख्या: जब किसी पूर्ण रूप से विभेदित जीव का शरीर किसी दुर्घटना से कटकर कई टुकड़ों में टूट जाता है, तो इसकी विशिष्ट कोशिकाएं (Regenerative Cells) विभाजित होकर पुनः पूर्ण नए जीव का निर्माण कर लेती हैं।
- उदाहरण: प्लेनेरिया (Planaria) तथा हाइड्रा (Hydra)।
(ii) मुकुलन (Budding):
- व्याख्या: जीव के शरीर की सतह पर कोशिका विभाजन के कारण एक छोटा उभार बनता है जिसे मुकुल (Bud) कहते हैं। यह मुकुल निरंतर वृद्धि करके एक नन्हे जीव में बदल जाता है और परिपक्व होकर जनक के शरीर से अलग हो स्वतंत्र जीवन जी ता है।
- उदाहरण: हाइड्रा (Hydra) तथा ईस्ट (Yeast)।
(iii) बीजाणु समासंघ (Spore Formation):
- व्याख्या: कवकों के धागे जैसी संरचना (कवकजाल / Hyphae) के ऊपर गोल बीजाणुधानी (Sporangium) पाई जाती है। इसके अंदर गोल, सूक्ष्म एवं मोटे आवरण वाले बीजाणु (Spores) बनते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षित रहकर ये बीजाणु नम सतह मिलने पर अंकुरित होकर नया कवक बनाते हैं।
- उदाहरण: राइजोपस / ब्रेड मोल्ड (Rhizopus / Bread Mould)।
अथवा (OR)
OR QUESTION SOLUTION: वृक्क में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
मानव वृक्क (Kidney) की कार्यात्मक इकाई वृक्काणु (नेफ्रॉन / Nephron) होती है। मूत्र निर्माण प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में संपन्न होती है:
- 1. अतिसूक्ष्म निस्पंदन (Glomerular Filtration / Ultrafiltration):
- वृक्क धमनी की शाखाएं उच्च दाब के साथ रुधिर को केशिकागुच्छ (Glomerulus) में लाती हैं।
- बोमेन सम्पुट (Bowman’s Capsule) की पतली भित्ति से जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण तथा यूरिया छनकर नेफ्रॉन की नलिका में आ जाते हैं (रक्त कोशिकाएं व प्रोटीन नहीं छनते)। इस छनित द्रव को प्रारंभिक निस्पंद कहते हैं।
- 2. वर्णात्मक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption):
- जब यह प्रारम्भिक निस्पंद नेफ्रॉन की कुंडलित नलिका (Tubule) से गुजरता है, तो शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण (Na+, Cl–) तथा जल का रुधिर केशिकाओं द्वारा पुनः अवशोषण कर लिया जाता है।
- 3. नलिकाकार स्रावण (Tubular Secretion):
- केशिकाओं में बचा अतिरिक्त अपशिष्ट (K+ आयन, H+ आयन तथा औषधियां) पुनः नेफ्रॉन नलिका में स्रावित कर दिया जाता है।
- अंत में बचा हुआ सांद्रित द्रव मूत्र (Urine) कहलाता है, जिसमें मुख्य रूप से यूरिया, यूरिक अम्ल, जल व लवण होते हैं। यह मूत्र संग्राहक वाहिनी (Collecting Duct) से होता हुआ मूत्राशय (Urinary Bladder) में एकत्र हो जाता है।
FINAL ANSWER
सम्पूर्ण प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र (Model Paper 824) के सभी 31 प्रश्नों का 100% सटीक, चरणबद्ध एवं स्पष्ट हल पूर्ण हो गया है।