UP Board 12th Math Model Paper 2027 PDF Download And Exam Pattern.

UP Board 12th Math Model Paper 2027: यूपी बोर्ड द्वारा जारी यूपी बोर्ड 12वीं Maths 2027 की परीक्षा का पैटर्न क्या होगा और 100 अंकों के क्वेश्चन पेपर कहाँ से आएंगे, कितने क्वेश्चंस, Calculus, Vectors और Matrices जैसे महत्वपूर्ण चैप्टर्स के अंक विभाजन और 8 अंक वाले कितने बड़े होंगे। मैथ का मॉडल पेपर 2027 डाउनलोड करने के साथ-साथ देखिए पूरा का पूरा डिटेल्ड एनालिसिस।

Key Highlights

  • बोर्ड एवं सत्र: माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (UPMSP), शैक्षणिक सत्र 2026-27।
  • कक्षा एवं विषय: कक्षा 12वीं – गणित (Mathematics – केवल प्रश्नपत्र)।
  • विषय कोड एवं संकेतांक: विषय कोड-131, संकेतांक-324।
  • कुल पूर्णांक एवं समय: लिखित परीक्षा 100 अंक तथा कुल समय 3 घंटे 15 मिनट।
  • प्रश्नों की कुल संख्या: प्रश्नपत्र में कुल 9 मुख्य प्रश्न दिए गए हैं (उप-प्रश्नों सहित कुल 26 प्रश्न हल करने होंगे)।
  • प्रश्नों के प्रकार: बहुविकल्पीय (1 अंक), अति लघु उत्तरीय (1 अंक), लघु उत्तरीय-I (2 अंक), लघु उत्तरीय-II (5 अंक) तथा विस्तृत उत्तरीय (8 अंक)।
  • आंतरिक विकल्प: प्रश्न संख्या 7, 8 और 9 (प्रत्येक 8 अंक) में शत-प्रतिशत आंतरिक विकल्प (अथवा / OR) उपलब्ध है।

UP Board 12th Math Model Paper 2027 Latest Exam Pattern

माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी कक्षा 12 गणित का यह मॉडल पेपर विद्यार्थियों की वैचारिक समझ, सूत्रों के अनुप्रयोग और चरणबद्ध गणना (Step-by-step Calculation) की क्षमता का समग्र परीक्षण करता है। प्रश्नपत्र के अध्ययन और रणनीति तैयार करने के लिए आरंभिक 15 मिनट का समय दिया गया है।

कक्षा 12वीं गणित में कोई प्रयोगात्मक परीक्षा (Practical Exam) नहीं होती, इसलिए पूरे 100 अंक लिखित परीक्षा के आधार पर ही तय होते हैं। इस प्रश्नपत्र को मुख्य रूप से तीन भागों में समझा जा सकता है:

  1. त्वरित अंक खंड (प्रश्न 1 से 4): 1-1 और 2-2 अंक वाले कुल 26 अंकों के प्रश्न, जो सटीकता और गति की परीक्षा लेते हैं।
  2. मेरिट निर्धारक खंड (प्रश्न 5 व 6): 5-5 अंक वाले कुल 10 प्रश्न, जो अकेले 50 अंकों (आधा प्रश्नपत्र) का भार संभालते हैं।
  3. उच्च भारांक खंड (प्रश्न 7 से 9): 8-8 अंकों के तीन बड़े प्रश्न (कुल 24 अंक), जिनमें से प्रत्येक में अथवा का विकल्प मिलता है।
Section / Question (प्रश्न संख्या) Question Type (प्रश्न प्रकार) Sub-Questions (उप-प्रश्न) To Attempt (हल करने योग्य) Marks per Question (अंक प्रति प्रश्न) Total Marks (कुल अंक)
प्रश्न संख्या 1 बहुविकल्पीय (MCQ) 5 (क से ङ) 5 (सभी अनिवार्य) 1 अंक 05 अंक
प्रश्न संख्या 2 अति लघु उत्तरीय (Very Short) 5 (क से ङ) 5 (सभी अनिवार्य) 1 अंक 05 अंक
प्रश्न संख्या 3 लघु उत्तरीय-I (Short-I) 4 (क से घ) 4 (सभी अनिवार्य) 2 अंक 08 अंक
प्रश्न संख्या 4 लघु उत्तरीय-I (Short-I) 4 (क से घ) 4 (सभी अनिवार्य) 2 अंक 08 अंक
प्रश्न संख्या 5 लघु उत्तरीय-II (Short-II) 5 (क से ङ) 5 (सभी अनिवार्य) 5 अंक 25 अंक
प्रश्न संख्या 6 लघु उत्तरीय-II (Short-II) 5 (क से ङ) 5 (सभी अनिवार्य) 5 अंक 25 अंक
प्रश्न संख्या 7 दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 2 (क, ख – अथवा सहित) 1 (कोई एक) 8 अंक 08 अंक
प्रश्न संख्या 8 दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 2 (क, ख – अथवा सहित) 1 (कोई एक) 8 अंक 08 अंक
प्रश्न संख्या 9 दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 2 (क, ख – अथवा सहित) 1 (कोई एक) 8 अंक 08 अंक
कुल योग (Grand Total) 26 प्रश्न हल करने हेतु – 100 अंक

Section-Wise Detailed Analysis

Question 1 – बहुविकल्पीय प्रश्न (5 अंक)

  • प्रश्नों की संख्या एवं अंक: 5 प्रश्न x 1 अंक = 5 अंक (प्रश्न 1 क से ङ)।
  • प्रश्नों का स्वरूप: इसमें फलन के प्रकार जैसे एकैकी (One-one) व आच्छादक (Onto), संबंध का स्वतुल्य (Reflexive) होना, अवकल समीकरण की घात (Degree of Differential Equation), दो सदिशों के बीच का कोण (Angle between Vectors) तथा सदिश त्रिक गुणन (Scalar Triple Product) के सीधे वैचारिक प्रश्न शामिल हैं।

Question 2 – अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

  • प्रश्नों की संख्या एवं अंक: 5 प्रश्न × 1 अंक = 5 अंक (प्रश्न 2 क से ङ)।
  • प्रश्नों का स्वरूप: इन प्रश्नों के उत्तर सीधे 1-2 चरणों में दिए जाते हैं। इसमें प्रतिलोम त्रिकोणमिति में मुख्य मान (Principal Value), log cos(eˣ) का x के सापेक्ष अवकलन (Differentiation), दिक्-अनुपात से दिक्-कोसाइन (Direction Cosines), मात्रक सदिश (Unit Vector) तथा सप्रतिबंध प्रायिकता P(A/B) (Conditional Probability) के सूत्र आधारित सवाल शामिल हैं।

Question 3 एवं 4 – लघु उत्तरीय प्रश्न-I (8 + 8 = 16 अंक)

  • प्रश्नों की संख्या एवं अंक: 8 प्रश्न x 2 अंक = 16 अंक (प्रश्न 3 के 4 उप-प्रश्न तथा प्रश्न 4 के 4 उप-प्रश्न)।
  • प्रश्नों का स्वरूप:
    • प्रश्न 3: संयुक्त फलन (Composite Functions – gof व fog), आव्यूह की समानता से अज्ञात चरों के मान, sin³x का समाकलन (Integration) तथा दो समांतर सदिशों के घटकों की तुलना।
    • प्रश्न 4: प्राचलिक समीकरणों का अवकलन (Parametric Differentiation – dy/dx), बिंदु व समांतर सदिश से जाने वाली रेखा का सदिश व कार्तीय समीकरण, फलन की सांतत्यता की जाँच (Continuity) तथा स्वतंत्र घटनाओं की प्रायिकता (Independent Events)।

Question 5 एवं 6 – लघु उत्तरीय प्रश्न-II (25 + 25 = 50 अंक)

  • प्रश्नों की संख्या एवं अंक: 10 प्रश्न x 5 अंक = 50 अंक (प्रश्न 5 के 5 उप-प्रश्न और प्रश्न 6 के 5 उप-प्रश्न)।
  • प्रश्नों का स्वरूप: यह संपूर्ण प्रश्नपत्र का सबसे बड़ा भाग (50% भारांक) है:
    • प्रश्न 5: मूल बिंदु से दूरी वाले संबंध को तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) सिद्ध करना, आंशिक भिन्नों या द्विघात रूप द्वारा समाकलन, आव्यूह समीकरण CD – AB = O से आव्यूह D ज्ञात करना, दो रेखाओं के बीच की न्यूनतम दूरी (Shortest Distance between Skew Lines), तथा स्वतंत्र घटनाओं का प्रमेय सिद्ध करना।
    • प्रश्न 6: स्थानीय उच्चतम और स्थानीय निम्नतम मान (Local Maxima & Minima), सदिशों की त्रिभुज असमिका (|a + b| ≤ |a| + |b|), द्वितीय कोटि का अवकलन सिद्ध करना, अवकल समीकरण का विशिष्ट हल (Particular Solution) तथा रैखिक प्रोग्रामन समस्या (Linear Programming Problem – LPP) का आलेखीय विधि से न्यूनतमीकरण।

Question 7, 8 एवं 9 – विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (8 + 8 + 8 = 24 अंक)

  • प्रश्नों की संख्या एवं अंक: 3 प्रश्न x 8 अंक = 24 अंक (प्रत्येक प्रश्न में शत-प्रतिशत अथवा/OR का विकल्प उपलब्ध है)।
  • प्रश्नों का स्वरूप:
    • प्रश्न 7: आव्यूह समीकरण A² – 5A + 6I व सममित/विषम सममित प्रमेय अथवा 3-चर वाले रैखिक समीकरण निकाय को आव्यूह विधि (Matrix Method – X = A⁻¹B) से हल करना।
    • प्रश्न 8: अवकलन के अनुप्रयोग (Applications of Derivatives) — शंक्वाकार टंकी में पानी भरने पर जल स्तर में परिवर्तन की दर (Rate of Change) अथवा महत्तम आयतन वाले लम्बवृत्तीय शंकु का अर्धशीर्ष कोण सिद्ध करना।
    • प्रश्न 9: समाकलन के अनुप्रयोग (Applications of Integrals) — दीर्घवृत्त (x²/4 + y²/9 = 1) से घिरे क्षेत्र का क्षेत्रफल ज्ञात करना अथवा निश्चित समाकलन के प्रगुणों (Properties of Definite Integrals) द्वारा 0 से π/2 तक log sin x dx का मान निगमित करना।

Final Word

यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं गणित का यह प्रश्नपत्र उच्च स्तर की गणना और अवधारणात्मक स्पष्टता की मांग करता है। प्रश्न संख्या 5 और 6 मिलकर 50 अंक बनाते हैं, जबकि अंतिम तीन प्रश्न 24 अंक तय करते हैं। परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आव्यूह व्युत्क्रम (Matrix Inversion), रेखाओं के बीच की न्यूनतम दूरी, उच्चिष्ठ-निम्निष्ठ और निश्चित समाकलन के प्रगुणों का चरणबद्ध लिखित अभ्यास करें, क्योंकि सही प्रक्रिया और सूत्र लिखने पर भी स्टेप-मार्किंग में पूरे अंक मिलते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: यूपी बोर्ड कक्षा 12 2027 गणित का लिखित पेपर कितने अंकों का होगा?

उत्तर: यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं गणित का लिखित प्रश्नपत्र कुल 100 अंकों का होगा। इस विषय में कोई प्रयोगात्मक परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन नहीं होता, इसलिए पूरे 100 अंक केवल इस बोर्ड परीक्षा से निर्धारित होते हैं।

Q2: गणित के प्रश्नपत्र में कुल कितने प्रश्न हल करने होंगे?

उत्तर: प्रश्नपत्र में मुख्य रूप से 9 प्रश्न (प्रश्न संख्या 1 से 9) दिए गए हैं। सभी उप-प्रश्नों को मिलाकर कुल 26 प्रश्न हल करने होते हैं: 1-1 अंक के 10 प्रश्न, 2-2 अंक के 8 प्रश्न, 5-5 अंक के 10 प्रश्न तथा 8-8 अंक के 3 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न।

Q3: क्या कक्षा 12 गणित के पेपर में प्रश्नों में विकल्प (Choices) मिलते हैं?

उत्तर: हाँ, प्रश्न संख्या 7, 8 और 9 (प्रत्येक 8 अंक) में शत-प्रतिशत आंतरिक विकल्प (अथवा / OR) दिया गया है। प्रत्येक 8-अंक वाले प्रश्न में दो प्रश्न दिए होते हैं, जिनमें से परीक्षार्थी को केवल एक प्रश्न हल करना होता है।

Q4: यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं गणित का पेपर हल करने के लिए कितना समय मिलेगा और परीक्षा की पाली क्या होगी?

उत्तर: परीक्षा हल करने के लिए कुल 3 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा (प्रारंभिक 15 मिनट प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए)। यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं की परीक्षाएं सामान्यतः द्वितीय पाली (दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक) में आयोजित की जाती हैं।

UP Board 10th Math Model Paper 2027 PDF Download

UP Board 10th Math Model Paper 2027: UPMSP द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी आधिकारिक मॉडल पेपर के अनुसार, यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं गणित (Mathematics) के नए परीक्षा पैटर्न, 70 अंकों के संपूर्ण अंक विभाजन और प्रश्न संरचना का विस्तृत विश्लेषण यहाँ उपलब्ध है। इस वर्ष की मुख्य बोर्ड परीक्षा में 20 वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न ओ०एम०आर० (OMR) शीट पर तथा 50 अंकों के वर्णनात्मक प्रश्न उत्तर-पुस्तिका में हल करने होंगे। परीक्षा में पूरे 70 अंक प्राप्त करने के लिए कौन-से अध्याय अधिक भारांक रखते हैं, दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में क्या विकल्प मिलेंगे और समय का सटीक प्रबंधन कैसे करें, इसका संपूर्ण शिक्षक-स्तरीय विश्लेषण इस लेख में सरल भाषा में समझें।

Key Highlights

  • बोर्ड एवं सत्र: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP), शैक्षणिक सत्र 2026-27।
  • कक्षा एवं विषय: कक्षा 10वीं – गणित (Mathematics)।
  • विषय कोड एवं संकेतांक: विषय कोड-928, संकेतांक-822।
  • कुल पूर्णांक एवं समय: लिखित परीक्षा 70 अंक तथा हल करने के लिए कुल 3 घंटे 15 मिनट।
  • कुल खंड (Sections): प्रश्नपत्र दो मुख्य खंडों—खंड ‘अ’ (वस्तुनिष्ठ) और खंड ‘ब’ (वर्णनात्मक) में विभाजित है।
  • कुल प्रश्न संख्या: खंड ‘अ’ में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न तथा खंड ‘ब’ में 5 मुख्य प्रश्न (उप-प्रश्नों सहित कुल 17 प्रश्न हल करने होंगे)।
  • आंतरिक विकल्प (Internal Choices): खंड ‘ब’ के प्रश्न संख्या 2 में 6 में से 5 प्रश्न करने की छूट है, जबकि प्रश्न संख्या 3, 4 और 5 (प्रत्येक 6 अंक) में शत-प्रतिशत ‘अथवा’ (OR) का विकल्प उपलब्ध है।

UP Board 10th Math Model Paper 2027 Exam Pattern

माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) द्वारा जारी कक्षा 10वीं गणित का यह मॉडल पेपर विद्यार्थियों की वैचारिक समझ, ज्यामितीय शुद्धता और बीजगणितीय गणना कौशल का संतुलित परीक्षण करता है। परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने और प्रश्नों के चयन के लिए आरंभिक 15 मिनट का समय दिया जाता है।

इस प्रश्नपत्र की संरचना पूर्णतः दोहरे प्रारूप (Dual Pattern) पर आधारित है:

  1. खंड ‘अ’ (20 अंक): इसमें शुद्ध रूप से वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं, जिनके उत्तर ओ०एम०आर० (OMR) शीट पर काले या नीले बॉल पॉइंट पेन से भरने होते हैं।
  2. खंड ‘ब’ (50 अंक): इसमें अति लघु उत्तरीय (Very Short Answer), लघु उत्तरीय (Short Answer) तथा दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) प्रश्न शामिल हैं, जहाँ प्रत्येक चरण (Step-marking) के अंक निर्धारित हैं।

UP Board 10th Math Model Paper 2027 Marks Distribution

Section / Question (खंड एवं प्रश्न) Question Type (प्रश्न प्रकार) Total Questions (कुल प्रश्न) Questions to Attempt (हल करने हेतु प्रश्न) Marks per Question (अंक प्रति प्रश्न) Total Marks (कुल अंक)
खंड ‘अ’ (प्र. 1 से 20) बहुविकल्पीय (MCQ) 20 20 1 अंक 20 अंक
खंड ‘ब’ – प्रश्न 1 अति लघु उत्तरीय (Very Short) 6 (क से च) 6 (सभी अनिवार्य) 2 अंक 12 अंक
खंड ‘ब’ – प्रश्न 2 लघु उत्तरीय (Short Answer) 6 (क से च) 5 (कोई पाँच) 4 अंक 20 अंक
खंड ‘ब’ – प्रश्न 3 दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 2 (अथवा सहित) 1 6 अंक 06 अंक
खंड ‘ब’ – प्रश्न 4 दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 2 (अथवा सहित) 1 6 अंक 06 अंक
खंड ‘ब’ – प्रश्न 5 दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 2 (अथवा सहित) 1 6 अंक 06 अंक
कुल योग (Grand Total) 38 प्रश्न 33 प्रश्न – 70 अंक

UP Board 10th Math Model Paper 2027 Section Wise Analysis

Section A (खंड ‘अ’) – बहुविकल्पीय प्रश्न (20 अंक)

  • प्रश्नों की संख्या एवं अंक: 20 प्रश्न x 1 अंक = 20 अंक।
  • विशेष निर्देश: ओएमआर (OMR) पर एक बार गोला भरने के बाद उसे काटना नहीं है और न ही व्हाइटनर या इरेज़र (Eraser) का प्रयोग करना है।
  • अध्यायों का प्रतिनिधित्व:
    • वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) से HCF/LCM व परिमेयता गुणधर्म।
    • बहुपद (Polynomials) से ग्राफिकल शून्यक (Zeros of Polynomial)।
    • दो चर वाले रैखिक समीकरण (Pair of Linear Equations) से रेखाओं की संगतता/असंगतता की शर्तें।
    • द्विघात समीकरण (Quadratic Equations) से विविक्तकर (Discriminant) व मूलों की प्रकृति।
    • समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progression) से n-वाँ पद।
    • निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry) एवं त्रिभुज (Triangles – थेल्स प्रमेय)।
    • त्रिकोणमिति (Trigonometry) के सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं ऊँचाई-दूरी (Heights & Distances) के सीधे मान।
    • वृत्त एवं पृष्ठीय क्षेत्रफल तथा आयतन (Surface Areas & Volumes)।
    • सांख्यिकी (Statistics) से माध्य, माध्यिका, बहुलक का संबंध और प्रायिकता (Probability)।

Section B (खंड ‘ब’) – वर्णनात्मक प्रश्न (50 अंक)

खंड ‘ब’ विस्तृत लिखित उत्तरों का मुख्य भाग है, जहाँ स्टेप-मार्किंग के आधार पर अंक मिलते हैं:

  • प्रश्न संख्या 1 (अति लघु उत्तरीय – 12 अंक):
    • इसमें कुल 6 उप-खंड (क से च) दिए गए हैं और सभी अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।
    • प्रश्नों के प्रकार: 3√2 की अपरिमेयता सिद्ध करना, रेखाखंड का सम-त्रिभाजन (Trisection of Line), sec A के मान का सत्यापन, वृत्त के चतुर्थांश (Quadrant) का क्षेत्रफल, प्रायिकता सूत्र P(E) + P(not E) = 1 तथा समदूरस्थ (Equidistant) बिंदुओं के निर्देशांक।
  • प्रश्न संख्या 2 (लघु उत्तरीय – 20 अंक):
    • इसमें कुल 6 उप-खंड (क से च) दिए गए हैं, जिनमें से परीक्षार्थियों को कोई 5 उप-खंड हल करने हैं। प्रत्येक प्रश्न 4 अंकों का है।
    • प्रश्नों के प्रकार: संपूरक कोणों (Supplementary Angles) पर रैखिक समीकरण, समलम्ब चतुर्भुज (Trapezium) में समरूपता प्रमेय OA/OC = OB/OD, द्विघात बहुपद 3x² – x – 4 के शून्यक व गुणांकों में संबंध, वृत्त की स्पर्श रेखा (Tangent to a Circle) पर प्रमेय, वर्गीकृत आंकड़ों से माध्यक भार (Median Weight) की गणना और कंचों पर आधारित प्रायिकता।
  • प्रश्न संख्या 3 (दीर्घ उत्तरीय – 6 अंक):
    • बीजगणित पर आधारित इबारती प्रश्न (Word Problem)।
    • इसमें जैकब और उसके पुत्र की आयु संबंधी रैखिक समीकरण अथवा रेलगाड़ी की चाल (Speed of Train) पर आधारित द्विघात समीकरण का आंतरिक विकल्प दिया गया है।
  • प्रश्न संख्या 4 (दीर्घ उत्तरीय – 6 अंक):
    • त्रिकोणमिति के अनुप्रयोग (Applications of Trigonometry – ऊँचाई और दूरी)।
    • 80 मीटर चौड़ी सड़क के दोनों ओर समान ऊँचाई के खंभों का उन्नयन कोण अथवा समुद्र तल से 75 मीटर ऊँचे लाइट हाउस से दो जहाजों के अवनमन कोण (Angles of Depression) के बीच की दूरी ज्ञात करने का प्रश्न।
  • प्रश्न संख्या 5 (दीर्घ उत्तरीय – 6 अंक):
    • पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन (Mensuration / Surface Areas and Volumes)।
    • बेलन में से शंक्वाकार खोल (Conical Cavity) काटने के बाद शेष बचे ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल अथवा दो बेलनों से बने लोहे के भारी स्तंभ का आयतन व द्रव्यमान (Mass Calculation) ज्ञात करने का प्रश्न।

Conclusion

यूपी बोर्ड कक्षा 10 गणित का यह प्रतिदर्श प्रश्नपत्र अत्यधिक स्कोरिंग है बशर्ते विद्यार्थी समय का सही बंटवारा करें। खंड ‘अ’ के 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न शुरुआती 35 से 40 मिनट में सावधानीपूर्वक ओ०एम०आर० पर हल किए जा सकते हैं। खंड ‘ब’ के 4-अंक और 6-अंक वाले प्रश्नों में रफ कार्य के लिए अलग स्थान रखें तथा ज्यामिति व त्रिकोणमिति के सवालों में स्वच्छ नामांकित चित्र अवश्य बनाएं, क्योंकि सही चित्र और सूत्र लिखने पर भी स्टेप-मार्किंग में पूरे अंक मिलते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: यूपी बोर्ड कक्षा 10 2027 गणित का पेपर कितने अंकों का होगा?

उत्तर: यूपी बोर्ड कक्षा 10 गणित का लिखित बोर्ड पेपर कुल 70 अंकों का होगा। बाकी 30 अंक विद्यालय स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) और प्रोजेक्ट कार्य के लिए निर्धारित होते हैं।

Q2: गणित के पेपर में कितने प्रश्न कितने अंकों के पूछे जाएंगे?

उत्तर: प्रश्नपत्र में मुख्य रूप से दो खंड होंगे। खंड ‘अ’ में 1-1 अंक वाले 20 बहुविकल्पीय प्रश्न (कुल 20 अंक) होंगे। खंड ‘ब’ में 2-2 अंक वाले 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (12 अंक), 4-4 अंक वाले 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (20 अंक), तथा 6-6 अंक वाले 3 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (18 अंक) पूछे जाएंगे।

Q3: क्या गणित के पेपर में प्रश्नों में विकल्प (Choices) मिलेंगे?

उत्तर: हाँ, खंड ‘ब’ के प्रश्न संख्या 2 में दिए गए 6 प्रश्नों में से केवल 5 प्रश्न हल करने हैं। इसके अलावा प्रश्न संख्या 3, 4 और 5 में प्रत्येक प्रश्न में ‘अथवा’ (OR) का विकल्प उपलब्ध है।

Q4: यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं गणित का पेपर हल करने के लिए कितना समय मिलेगा और परीक्षा की पाली क्या होगी?

उत्तर: गणित का पेपर हल करने के लिए कुल 3 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा, जिसमें शुरुआती 15 मिनट प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए तय हैं। यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षाएं सामान्यतः सुबह की पाली (Morning Shift – सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक) में आयोजित की जाती हैं।

UP Board 12th Chemistry Model Paper 2027 Solution PDF Download.

UP Board 12th Chemistry Model Paper 2027: UPMSP ने ऑफिशियल यूपी बोर्ड मॉडल पेपर 2027 जारी कर दिया है। यहाँ पर कक्षा 12वीं के रसायन विज्ञान के मॉडल पेपर का हल विस्तार में दिया गया है, जिसे प्रैक्टिस कर अपनी परीक्षा की तैयारी और असरदार बना सकते हैं। सोल्यूशंस का पीडीएफ भी डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध है.

खण्ड ‘अ’ (Section A) – बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्र. 1 (क) KCl, NaCl और K2SO4 के वांटहॉफ कारक (van ‘t Hoff factor) के मान क्रमशः हैं:
(i) 2, 2 तथा 2
(ii) 2, 2 तथा 3
(iii) 1, 1 तथा 2
(iv) 1, 1 तथा 1
(ii) 2, 2 तथा 3

विस्तृत हल (Detailed Solution):

प्रबल वैद्युतअपघट्यों (Strong Electrolytes) के पूर्ण वियोजन (Complete Dissociation) की स्थिति में वांटहॉफ कारक (i) उत्पन्न आयनों की कुल संख्या के बराबर होता है:

  • KCl: K+ + Cl– ⟶ कुल 2 आयन (i = 2)
  • NaCl: Na+ + Cl– ⟶ कुल 2 आयन (i = 2)
  • K2SO4: 2 K+ + SO42- ⟶ कुल 3 आयन (i = 3)

अतः वांटहॉफ कारक के मान क्रमशः 2, 2 तथा 3 होंगे।

💡 Tips: असंगणित (Non-dissociating) अणुओं जैसे यूरिया या ग्लूकोज के लिए i = 1 होता है, जबकि लवणों में वियोजन के बाद प्राप्त आयनों को गिनकर ‘i’ का मान ज्ञात किया जाता है।
प्र. 1 (ख) निम्नलिखित में से अंतराकाशी यौगिकों (Interstitial Compounds) के अभिलाक्षणिक गुण हैं:

(A) उनके गलनांक शुद्ध धातुओं की तुलना में उच्च होते हैं।
(B) वे बहुत कठोर होते हैं।
(C) वे धात्विक कुचालक होते हैं।
(D) वे रासायनिक रूप से बहुत क्रियाशील होते हैं।

(i) उक्त सभी
(ii) केवल A, B, D
(iii) केवल A, B, C
(iv) केवल A, B
(iv) केवल A, B

विस्तृत हल (Detailed Solution):

संक्रमण धातुओं के अंतराकाशी स्थलों (Interstitial Sites) में छोटे अधातु परमाणु (H, C, N, B) फँस जाने से अंतराकाशी यौगिक बनते हैं। इनके मुख्य गुण निम्न हैं:

  • इनके गलनांक (Melting points) शुद्ध धातुओं की तुलना में अत्यधिक उच्च होते हैं। (कथन A सही)
  • ये अत्यधिक कठोर होते हैं (कुछ बोराइड्स हीरे जितने कठोर होते हैं)। (कथन B सही)
  • ये अपनी धात्विक चालकता (Metallic Conductivity) सुरक्षित रखते हैं, कुचालक नहीं बनते। (कथन C गलत)
  • ये रासायनिक रूप से अक्रिय (Chemically Inert) होते हैं। (कथन D गलत)

अतः केवल कथन A तथा B सत्य हैं।

💡 Tips: याद रखें कि अंतराकाशी यौगिक न तो पूरी तरह आयनिक होते हैं और न ही सहसंयोजी, परंतु ये अपनी धात्विक चालकता को बनाए रखते हैं।
प्र. 1 (ग) कॉलम I में दिए गए उपसहसंयोजन यौगिकों को कॉलम II में दिए गए उनके केन्द्रीय धात्विक परमाणु/आयन से सुमेलित कीजिए:
कॉलम I कॉलम II
(A) क्लोरोफिल (Chlorophyll)(a) रोडियम (Rhodium)
(B) रक्त वर्णक (Hemoglobin)(b) कोबाल्ट (Cobalt)
(C) विल्किंसन उत्प्रेरक (Wilkinson Catalyst)(c) आयरन (Iron)
(D) विटामिन B12 (Vitamin B12)(d) मैग्नीशियम (Magnesium)
(i) A – a, B – b, C – c, D – d
(ii) A – a, B – b, C – d, D – c
(iii) A – d, B – c, C – a, D – b
(iv) A – d, B – c, C – b, D – a
(iii) A – d, B – c, C – a, D – b

विस्तृत हल (Detailed Solution):

जैविक प्रणालियों एवं उद्योगों में महत्वपूर्ण उपसहसंयोजन यौगिकों के केंद्रीय धातु आयन निम्नलिखित हैं:

  • (A) क्लोरोफिल ⟶ (d) मैग्नीशियम (Mg2+): पौधों में प्रकाश-संश्लेषण हेतु जिम्मेदार हरा वर्णक है।
  • (B) रक्त वर्णक (हीमोग्लोबिन) ⟶ (c) आयरन (Fe2+): रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन करने वाला सम्मिश्र है।
  • (C) विल्किंसन उत्प्रेरक [(PPh3)3RhCl] ⟶ (a) रोडियम (Rh): एल्कीन के हाइड्रोजनीकरण में प्रयुक्त होता है।
  • (D) विटामिन B12 (साइनोकोबालामिन) ⟶ (b) कोबाल्ट (Co3+): एंटी-पर्निशियस एनीमिया कारक है।
प्र. 1 (घ) अभिकथन (Assertion): एल्डिहाइड और कीटोन, दोनों ही टॉलेन अभिकर्मक के साथ रजत दर्पण बनाते हैं।
तर्क (Reason): एल्डिहाइड और कीटोन दोनों में कार्बोनिल समूह होता है।
(i) अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं तथा तर्क सही स्पष्टीकरण है।
(ii) अभिकथन और तर्क दोनों ही गलत हैं।
(iii) अभिकथन सही है परंतु तर्क गलत है।
(iv) अभिकथन गलत है परंतु तर्क सही है।
(iv) अभिकथन गलत है परंतु तर्क सही है।

विस्तृत हल (Detailed Solution):

अभिकथन की जाँच: टॉलेन अभिकर्मक [Ammoniacal Silver Nitrate, [Ag(NH3)2]+] एक दुर्बल आक्सीकारक है। यह केवल एल्डिहाइडों को आक्सीकृत करके रजत दर्पण (Silver Mirror) देता है; कीटोन इसका अपचयन नहीं कर पाते। अतः अभिकथन गलत (False) है。

तर्क की जाँच: एल्डिहाइड (R-CHO) एवं कीटोन (R-CO-R) दोनों में ही कार्बोनिल समूह (>C=O) उपस्थित होता है। अतः तर्क सही (True) है।

💡 Tips: टॉलेन परीक्षण एल्डिहाइड तथा कीटोन के बीच विभेद (Distinction) करने की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है।
प्र. 1 (ङ) श्रृंखला में कार्बन परमाणुओं की संख्या अपरिवर्तित रखते हुए ऐल्किल हैलाइडों से प्राथमिक ऐमीन बनाने की सर्वोत्तम विधि है:
(i) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया
(ii) NH3 के साथ अभिक्रिया
(iii) गैब्रिएल थैलीमाइड संश्लेषण
(iv) सैंडमायर अभिक्रिया
(iii) गैब्रिएल थैलीमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

गैब्रिएल थैलीमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis) द्वारा ऐल्किल हैलाइड (R-X) से केवल शुद्ध प्राथमिक ऐमीन (Primary Amine, R-NH2) प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में कार्बन श्रृंखला की लंबाई में कोई परिवर्तन नहीं आता है।

  • हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया में एमाइड से 1 कार्बन कम वाला ऐमीन बनता है।
  • NH3 के साथ अमोनियाअपघटन करने पर 1°, 2°, 3° ऐमीन तथा चतुष्क लवण का मिश्रण बनता है।
प्र. 1 (च) निम्नलिखित में से α-D-फ्रक्टोफ्यूरेनोस (α-D-Fructofuranose) की सही चक्रीय संरचना है:
(i) संरचना (i)
(ii) संरचना (ii)
(iii) संरचना (iii)
(iv) संरचना (iv)
(iii) संरचना (iii)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

D-फ्रक्टोज (D-Fructose) की फ्यूरेनोस (5-सदस्यीय वलय) हावर्थ संरचना में:

  • एनोमेरी कार्बन C-2 पर -OH समूह नीचे (Down) तथा -CH2OH समूह ऊपर (Up) होता है।
  • C-3 पर -OH समूह ऊपर (Up) तथा -H नीचे होता है।
  • C-4 पर -OH समूह नीचे (Down) तथा -H ऊपर होता है।
  • C-5 पर -CH2OH समूह ऊपर (Up) तथा -H नीचे होता है।

अतः यह विशिष्ट विन्यास संरचना (iii) द्वारा प्रदर्शित होता है।

💡 Tips: α-रूप में C-2 का -OH समूह C-5 के -CH2OH समूह के ट्रांस (Trans/विपरीत दिशीय) होता है।

खण्ड ‘ब’ एवं खण्ड ‘स’ (Section B & Section C) – अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

प्र. 2 (क) 2.5 g एथेनोइक अम्ल (CH3COOH) के 75 g बेंजीन में विलयन की मोललता (Molality) की गणना कीजिए।

दिया है (Given):

  • विलेय (CH3COOH) का द्रव्यमान (w) = 2.5 g
  • विलायक (बेंजीन) का द्रव्यमान (W) = 75 g = 75 / 1000 = 0.075 kg
  • CH3COOH का मोलर द्रव्यमान (M) = 12 + (3 × 1) + 12 + 16 + 16 + 1 = 60 g/mol
मोललता (m) = [ विलेय के मोल ] / [ विलायक का द्रव्यमान (kg में) ] = (w / M) / W(kg)

गणना (Calculation):

  • CH3COOH के मोल = 2.5 / 60 = 0.04167 mol
  • मोललता (m) = 0.04167 / 0.075 kg = 0.556 mol/kg (या 0.556 m)

अतः एथेनोइक अम्ल के विलयन की मोललता 0.556 m होगी।

💡 Tips: मोललता विलायक के द्रव्यमान (kg) पर आधारित होती है, इसलिए यह ताप परिवर्तन से प्रभावित नहीं होती।
प्र. 2 (ख) मिश्रधातु (Alloy) किसे कहते हैं? संक्रमण धातुओं से प्राप्त मिश्रधातुओं के कोई दो गुण लिखिए।

1. मिश्रधातु की परिभाषा (Definition):

दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु एवं अधातु के समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture) को मिश्रधातु (Alloy) कहते हैं।

2. संक्रमण धातुओं की मिश्रधातुओं के दो मुख्य गुण:

  • उच्च कठोरता एवं गलनांक (High Hardness & Melting Point): संक्रमण धातुओं के आकार लगभग समान होने के कारण एक धातु दूसरी धातु के क्रिस्टल जालक में आसानी से फिट हो जाती है, जिससे बनी मिश्रधातुएँ अत्यधिक कठोर व उच्च गलनांक वाली होती हैं (उदा. पीतल, कांस्य, स्टेनलेस स्टील)।
  • संक्षारण प्रतिरोधकता (Corrosion Resistance): मिश्रधातुएँ वायु, जल एवं अम्लों के प्रति अत्यधिक स्थायी होती हैं और इनमें आसानी से जंग नहीं लगता।
प्र. 2 (ग) निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए:

(a) डाइक्लोरोबिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
(b) टेट्राऐम्मीनएक्वाक्लोरिडोकॉबाल्ट (III) क्लोराइड

(a) डाइक्लोरोबिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट:

  • केंद्रीय धातु = Pt4+, लिगैंड = 2 Cl–, 2 en (neutral), ऋणायन = NO3–
  • सुलभ संकुल आयन = [Pt(en)2Cl2]2+
[Pt(en)2Cl2](NO3)2

(b) टेट्राऐम्मीनएक्वाक्लोरिडोकॉबाल्ट (III) क्लोराइड:

  • केंद्रीय धातु = Co3+, लिगैंड = 4 NH3, 1 H2O, 1 Cl–, ऋणायन = Cl–
  • सुलभ संकुल आयन = [Co(NH3)4(H2O)Cl]2+
[Co(NH3)4(H2O)Cl]Cl2
प्र. 2 (घ) उभयदंती नाभिकरागी (Ambident Nucleophiles) क्या होते हैं? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।

परिभाषा (Definition):

वे नाभिकरागी (Nucleophiles) जिनमें दो भिन्न परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान (दाता परमाणु) कर सकते हैं, परंतु एक समय में केवल एक ही परमाणु उपसहसंयोजक बंध बनाता है, उभयदंती नाभिकरागी कहलाते हैं।

उदाहरण (Example): सायनाइड आयन (CN–)

सायनाइड आयन में C तथा N दोनों ही दाता परमाणु की भाँति कार्य कर सकते हैं:

  • जब कार्बन (C) परमाणु आक्रमण करता है, तो ऐल्किल सायनाइड (R-CN) बनता है।
  • जब नाइट्रोजन (N) परमाणु आक्रमण करता है, तो ऐल्किल आइसोसायनाइड (R-NC) बनता है।
R-X + KCN ⟶ R-CN + KX (मुख्य उत्पाद: नाइट्राइल)
R-X + AgCN ⟶ R-NC + AgX (मुख्य उत्पाद: आइसोसायनाइड)
प्र. 3 (क) एक प्रोटीन के 200 cm3 जलीय विलयन में 1.26 g प्रोटीन है। 300 K पर इस विलयन का परासरण दाब 2.57 × 10-3 bar पाया गया। प्रोटीन के मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।

दिया है (Given):

  • विलेय (प्रोटीन) का भार (w2) = 1.26 g
  • विलयन का आयतन (V) = 200 cm3 = 0.200 L
  • ताप (T) = 300 K
  • परासरण दाब (π) = 2.57 × 10-3 bar
  • गैस नियतांक (R) = 0.083 L bar mol-1 K-1
परासरण दाब का सूत्र: π = (w2 × R × T) / (M2 × V) ⇒ M2 = (w2 × R × T) / (π × V)

गणना (Calculation):

M2 = (1.26 × 0.083 × 300) / (2.57 × 10-3 × 0.200)

M2 = 31.374 / (0.000514) = 61038.9 g/mol (या ≈ 61039 g/mol)

अतः प्रोटीन का मोलर द्रव्यमान 61,039 g/mol है।

💡 Tips: बृहदअणुओं (Proteins, Polymers) का आणविक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए परासरण दाब विधि ही सर्वाधिक उपयुक्त एवं सटीक विधि है।
प्र. 3 (ख) क्यूमीन (Cumene) से फीनॉल (Phenol) बनाने की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।

व्याख्या एवं अभिक्रिया चरण (Process Steps):

क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेंजीन) को वायु की उपस्थिति में ऑक्सीकृत करने पर क्यूमीन हाइड्रोपरऑक्साइड बनता है, जो तनु अम्ल के साथ जलअपघटित होकर फीनॉल तथा एसीटोन देता है।

C6H5-CH(CH3)2 + O2 ⎯⎯⎯(वायु)⎯⎯⎯> C6H5-C(CH3)2-O-O-H (क्यूमीन हाइड्रोपरऑक्साइड)

C6H5-C(CH3)2-O-O-H ⎯⎯⎯(H+ / H2O)⎯⎯⎯> C6H5OH (फीनॉल) + CH3COCH3 (एसीटोन)

इस औद्योगिक विधि का मुख्य लाभ यह है कि इसमें उप-उत्पाद के रूप में मूल्यवान एसीटोन (Acetone) प्राप्त होता है।

प्र. 3 (ग) एल्डिहाइड तथा कीटोन के क्रमशः दो-दो महत्वपूर्ण उपयोग लिखिए।

1. एल्डिहाइडों के उपयोग (Uses of Aldehydes):

  • फॉर्मेलीन (Formalin): 40% फॉर्मेल्डिहाइड जलीय विलयन का उपयोग जीवविज्ञान प्रयोगशालाओं में जैविक नमूनों (Biological specimens) के परिरक्षण में होता है।
  • बैकेलाइट प्लास्टिक: फॉर्मेल्डिहाइड का उपयोग फीनॉल-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन (बैकेलाइट) बहुलक बनाने में होता है।

2. कीटोनों के उपयोग (Uses of Ketones):

  • औद्योगिक विलायक: प्रोपेनोन (एसीटोन) का उपयोग नेल पॉलिश रिमूवर, रबर, वार्निश तथा गोंद के उत्कृष्ट विलायक के रूप में होता है।
  • औषधि निर्माण: एसीटोन का उपयोग क्लोरोफॉर्म, आयोडोफॉर्म तथा सम्मोहक औषधियों के निर्माण में होता है।
प्र. 3 (घ) D.N.A. में पाए जाने वाले नाइट्रोजन युक्त क्षारकों (Bases) के नाम तथा उनकी रासायनिक श्रेणियाँ बताइए।

उत्तर:

D.N.A. में कुल 4 प्रकार के विषमचक्रीय नाइट्रोजन युक्त क्षारक पाए जाते हैं, जिन्हें दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • 1. प्यूरिन क्षारक (Purine Bases – द्विवलयीय):
    • (i) एडिनिन (Adenine – A)
    • (ii) ग्वानिन (Guanine – G)
  • 2. पिरिमिडिन क्षारक (Pyrimidine Bases – एकवलयीय):
    • (i) साइटोसिन (Cytosine – C)
    • (ii) थाइमिन (Thymine – T)
💡 Tips: R.N.A. में थाइमिन (T) के स्थान पर यूरैसिल (Uracil – U) क्षारक पाया जाता है।

खण्ड ‘द’ – लघु उत्तरीय प्रश्न (3-अंक एवं 4-अंक)

प्र. 4 (क) निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए: (i) आदर्श तथा अनादर्श विलयन, (ii) अतिपरासरी तथा अल्पपरासरी विलयन।

(i) आदर्श तथा अनादर्श विलयन में अंतर (Ideal vs Non-Ideal Solutions):

गुण धर्म आदर्श विलयन (Ideal Solution) अनादर्श विलयन (Non-Ideal Solution)
राऊल्ट का नियम सभी सांद्रताओं पर राऊल्ट के नियम का पालन करते हैं (P = PA + PB)। राऊल्ट के नियम से धनात्मक या ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करते हैं।
एंथैल्पी परिवर्तन (ΔHmix) ΔHmix = 0 (न ऊष्मा निकलती है, न अवशोषित होती है)। ΔHmix ≠ 0 (ऊष्माक्षेपी या ऊष्माशोषी)।
आयतन परिवर्तन (ΔVmix) ΔVmix = 0 (मिश्रण का आयतन घटकों के योग के बराबर रहता है)। ΔVmix ≠ 0 (आयतन बढ़ता या घटता है)।

(ii) अतिपरासरी तथा अल्पपरासरी विलयन में अंतर (Hypertonic vs Hypotonic Solutions):

  • अतिपरासरी विलयन (Hypertonic Solution): जिस विलयन का परासरण दाब (Osmotic Pressure) दूसरे विलयन की तुलना में अधिक होता है। इसमें कोशिका (Cell) रखने पर वह जल बाहर निकलने के कारण सिकुड़ (Plasmolysis) जाती है।
  • अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic Solution): जिस विलयन का परासरण दाब दूसरे विलयन की तुलना में कम होता है। इसमें कोशिका रखने पर जल अंदर प्रवेश करता है जिससे कोशिका फूल जाती है।
प्र. 4 (ख) ईंधन सेल (Fuel Cell) किसे कहते हैं? इसकी इलेक्ट्रोड अभिक्रियाओं तथा इसमें प्रयुक्त उत्प्रेरकों का उल्लेख कीजिए।

1. परिभाषा (Definition):

वे गैल्वेनिक सेल (Galvanic Cells) जो ईंधन (जैसे H2, CO, CH4) के दहन (Combustion) की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं, ईंधन सेल (Fuel Cell) कहलाते हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण H2-O2 ईंधन सेल है।

2. उत्प्रेरक (Catalyst Used):

इलेक्ट्रोड के रूप में सरंध्र कार्बन छड़ों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें सूक्ष्म विभाजित प्लैटिनम (Pt) या पैलेडियम (Pd) उत्प्रेरक के रूप में मिलाया जाता है। इसमें जलीय KOH का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में होता है।

3. इलेक्ट्रोड अभिक्रियाएँ (Electrode Reactions):

एनोड पर (Anode): 2 H2 (g) + 4 OH– (aq) ⟶ 4 H2O (l) + 4 e–
कैथोड पर (Cathodic): O2 (g) + 2 H2O (l) + 4 e– ⟶ 4 OH– (aq)
⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯
कुल अभिक्रिया (Overall Reaction): 2 H2 (g) + O2 (g) ⟶ 2 H2O (l)
💡 Tips: ईंधन सेल की दक्षता (~70%) साधारण तापीय संयत्रों (30-40%) से बहुत अधिक होती है और यह प्रदूषण-रहित जल उप-उत्पाद के रूप में देता है।
प्र. 4 (ग) अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।

1. ताप गुणांक (Temperature Coefficient):

सामान्यतः किसी रासायनिक अभिक्रिया का ताप 10°C (या 10 K) बढ़ाने पर उसका वेग स्थिरांक (Rate Constant, k) लगभग 2 से 3 गुना (Double to Triple) हो जाता है। इसे ताप गुणांक कहते हैं:

ताप गुणांक = k(T + 10) / kT ≈ 2 से 3

2. आरहेनियस समीकरण (Arrhenius Equation):

अभिक्रिया वेग की ताप पर सटीक निर्भरता को स्वीडिश रसायनशास्त्री आरहेनियस ने निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त किया:

k = A × e(-Ea / RT)

जहाँ A = आवृत्ति कारक (Frequency factor), Ea = सक्रिएण ऊर्जा (Activation Energy), R = गैस नियतांक, तथा T = परम ताप (Absolute Temperature)।

  • ताप T बढ़ाने पर पद e(-Ea / RT) का मान बढ़ता है, जिससे प्रभावी टक्करों (Effective Collisions) की संख्या बढ़ती है।
  • दो भिन्न तापों T₁ तथा T₂ पर वेग स्थिरांकों k₁ एवं k₂ का संबंध:
log (k₂ / k₁) = [ Ea / (2.303 R) ] × [ (T₂ – T₁) / (T₁ × T₂) ]
प्र. 4(घ) निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए: (i) Cu+ आयन जलीय विलयन में क्यों स्थायी नहीं होते हैं? (ii) Cu2+ और Fe2+ में से कौन प्रबल अपचायक है और क्यों?

(i) Cu+ आयन का जलीय विलयन में अस्थायी होना (Instability of Cu+ in Aqueous Solution):

जलीय विलयन में Cu+ आयन असमानुपातन (Disproportionation) प्रदर्शित करता है और Cu2+ तथा कॉपर धातु में परिवर्तित हो जाता है:

2 Cu+ (aq) ⟶ Cu2+ (aq) + Cu (s)

कारण: यद्यपि Cu+ से द्वितीय आयनन एंथैल्पी (Second Ionization Enthalpy) द्वारा Cu2+ बनाने में ऊर्जा लगती है, परंतु Cu2+ आयन की जल-योजन एंथैल्पी (Hydration Enthalpy, ΔhydH) का अत्यधिक ऋणात्मक मान इस ऊर्जा की क्षतिपूर्ति से भी अधिक ऊर्जा मुक्त करता है।

(ii) Cu2+ तथा Fe2+ में प्रबल अपचायक (Fe2+ as Stronger Reducing Agent):

Fe2+ एक प्रबल अपचायक है (Fe2+ ⟶ Fe3+ + e–)।

कारण: Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d6 है। एक इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद Fe3+ का विन्यास [Ar] 3d5 बन जाता है, जो कि एक अर्द्धभरित (Half-filled) d-कक्षक होने के कारण अत्यधिक स्थायी (Extremely stable) होता है। इसके विपरीत Cu2+ (3d9) इलेक्ट्रॉन आसानी से त्यागकर 3d8 नहीं बनाना चाहता।

प्र. 5 (क) चतुष्फलकीय उपसहसंयोजन समूहों (Tetrahedral Complexes) में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन (Crystal Field Splitting) को समझाइए।

क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन का सिद्धांत (Crystal Field Splitting in Tetrahedral Field):

चतुष्फलकीय संकुलों में 4 लिगैंड केंद्रीय धातु आयन के अक्षों के मध्य (In-between the axes) से पहुँचते हैं।

  • अक्षों के बीच स्थित d-कक्षक (dxy, dyz, dzx) लिगैंडों के अधिक निकट होते हैं, अतः ये अधिक प्रतिकर्षण अनुभव करते हैं और इनकी ऊर्जा बढ़ जाती है। इन्हें t2 कक्षक समूह कहते हैं।
  • अक्षों पर स्थित d-कक्षक (dx²-y², dz²) लिगैंडों से दूर होते हैं, अतः इनकी ऊर्जा कम हो जाती है। इन्हें e कक्षक समूह कहते हैं।
विपाटन ऊर्जा का संबंध: Δt = (4 / 9) Δo

चूँकि चतुष्फलकीय विपाटन ऊर्जा (Δt) का मान अष्टफलकीय विपाटन ऊर्जा (Δo) का केवल 4/9 भाग होता है, इसलिए यह मान युग्मन ऊर्जा (P) से सदैव कम होता है। अतः चतुष्फलकीय संकुल सदैव उच्च चक्रण संकुल (High Spin Complexes) ही बनाते हैं।

💡 Tips: अष्टफलकीय (Octahedral) के विपरीत, चतुष्फलकीय क्षेत्र में t2 समूह ऊपर (उच्च ऊर्जा) तथा e समूह नीचे (निम्न ऊर्जा) स्थित होता है।
प्र. 5 (ख) 0.00241 M एसिटिक अम्ल की चालकता 7.896 × 10-5 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता (Λm) का परिकलन कीजिए। यदि Λm0 = 390.5 S cm2 mol-1 हो तो इसका वियोजन स्थिरांक (Ka) क्या होगा?

दिया है (Given):

  • सांद्रता (C) = 0.00241 M = 2.41 × 10-3 mol/L
  • विशिष्ट चालकता (κ) = 7.896 × 10-5 S cm-1
  • सीमांत मोलर चालकता (Λm0) = 390.5 S cm2 mol-1

1. मोलर चालकता की गणना (Molar Conductivity, Λm):

Λm = (κ × 1000) / C = (7.896 × 10-5 × 1000) / 0.00241 = 0.07896 / 0.00241 = 32.76 S cm2 mol-1

2. वियोजन की मात्रा (Degree of Dissociation, α):

α = Λm / Λm0 = 32.76 / 390.5 = 0.0839 (या 8.39%)

3. वियोजन स्थिरांक की गणना (Dissociation Constant, Ka):

Ka = (C × α2) / (1 – α) = [ 0.00241 × (0.0839)2 ] / (1 – 0.0839)

Ka = [ 0.00241 × 0.00704 ] / 0.9161 = (1.696 × 10-5) / 0.9161 = 1.85 × 10-5 mol/L

अतः एसिटिक अम्ल का वियोजन स्थिरांक 1.85 × 10-5 mol/L है।

प्र. 5 (ग) आणविक आकृति के आधार पर प्रोटीन के दो वर्गों के नाम बताइए तथा उनका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर: आणविक आकृति के आधार पर प्रोटीनों को दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जाता है:

1. रेषेदार प्रोटीन (Fibrous Proteins):

  • जब पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे के समांतर (Parallel) चलती हैं तथा हाइड्रोजन एवं डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं, तो रेषे जैसी संरचना बनती है।
  • ये सामान्यतः जल में अविलेय (Insoluble in water) होते हैं।
  • उदाहरण: केरेटिन (Keratin – बाल, ऊन, त्वचा में) तथा मायोसिन (Myosin – मांसपेशियों में)।

2. गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins):

  • जब पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ मुड़कर/लपेटकर एक गोलिका (Spherical) जैसी आकृति धारण कर लेती हैं।
  • ये सामान्यतः जल में विलेय (Soluble in water) होते हैं।
  • उदाहरण: इंसुलिन (Insulin) तथा ऐल्बूमिन (Albumin – अंडे में)।
प्र. 5 (घ) निम्नलिखित आलेख (Graphs) की सैद्धांतिक व्याख्या एवं समीकरण रूप लिखिए।

(i) शून्य कोटि अभिक्रिया (Zero Order Reaction – [R] vs t):

समीकरण [R] = -k t + [R]₀ के अनुसार, सांद्रता [R] तथा समय t के बीच आलेख एक ऋणात्मक ढाल (-k) वाली सीधी रेखा (Straight line) होता है जिसका अंतःखंड [R]₀ है।

(ii) प्रथम कोटि अभिक्रिया (First Order Reaction – log([R]₀/[R]) vs t):

समीकरण log([R]₀/[R]) = (k / 2.303) × t के अनुसार, यह मूल बिंदु से होकर जाने वाली सीधी रेखा है जिसकी ढाल k / 2.303 होती है।

(iii) आरहेनियस समीकरण (Arrhenius Plot – ln k vs 1/T):

समीकरण ln k = ln A – (Ea / R) × (1/T) के अनुसार, ln k तथा 1/T के मध्य आलेख एक सीधी रेखा है जिसकी ढाल -Ea / R तथा अंतःखंड ln A होता है।

(iv) प्रथम कोटि अभिक्रिया (ln [R] vs t):

समीकरण ln [R] = -k t + ln [R]₀ के अनुसार, ln [R] तथा t के मध्य ग्राफ ऋणात्मक ढाल (-k) वाली सीधी रेखा होता है।

खण्ड ‘य’ (Section E) – दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5-अंक)

प्र. 6 (क) [मुख्य] निम्नलिखित के कारण बताइए: (i) एथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि एनीलीन नहीं, (ii) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐज़ोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवणों से अधिक स्थायी होते हैं, (iii) एनीलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।

(i) एथिलऐमीन का जल में विलेय होना तथा एनीलीन का अविलेय होना:

एथिलऐमीन (C2H5NH2) जल के अणुओं के साथ अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध (Hydrogen Bonding) आसानी से बना लेती है। इसके विपरीत, एनीलीन (C6H5NH2) में एक बड़ा हाइड्रोफोबिक (जल-विरोधी) ऐरिल/बेंजीन समूह (C6H5-) उपस्थित होता है, जो H-बंध बनने में बाधा उत्पन्न करता है। अतः एनीलीन जल में लगभग अविलेय है।

(ii) ऐरोमैटिक डाइऐज़ोनियम लवणों का उच्च स्थायित्व:

ऐरोमैटिक डाइऐज़ोनियम आयन (C6H5-N2+) में बेंजीन वलय के π-इलेक्ट्रॉनों का डाइऐज़ोनियम समूह के साथ अनुनाद (Resonance) होता है। यह अनुनादी संरचना आयन को स्थायित्व प्रदान करती है, जबकि ऐलिफैटिक डाइऐज़ोनियम लवणों में अनुनाद न होने के कारण वे तुरंत N2 गैस निकालकर ऐल्कोहॉल में अपघटित हो जाते हैं।

(iii) एनीलीन का फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया न दर्शाना:

एनीलीन एक प्रबल लुईस क्षार है। फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया में प्रयुक्त उत्प्रेरक ऐलुमिनियम क्लोराइड (AlCl3) एक प्रबल लुईस अम्ल है। एनीलीन AlCl3 के साथ अभिक्रिया करके तुरंत एक संकुल लवण (Adduct/Salt) बना लेती है:

C6H5-NH2 + AlCl3 ⟶ [C6H5-NH2+—AlCl3–]

इस संकुल के बनने से N-परमाणु पर धनावेश आ जाता है, जिससे बेंजीन वलय अत्यधिक निष्क्रिय (Deactivated) हो जाती है और अभिक्रिया आगे नहीं बढ़ती।

प्र. 6 (क) [अथवा] निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए: (i) एथेनोइक अम्ल को मेथेनेमीन में, (ii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में, (iii) मेथेनेमीन को एथेनेमीन में, (iv) हेक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमिनोपेंटेन में, (v) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में।

(i) एथेनोइक अम्ल से मेथेनेमीन:

CH3COOH + NH3 ⎯⎯(Δ)⎯⎯> CH3CONH2 ⎯⎯(Br2 / KOH)⎯⎯> CH3NH2

(ii) नाइट्रोमेथेन से डाइमेथिलऐमीन:

CH3NO2 ⎯⎯(Fe / HCl)⎯⎯> CH3NH2 ⎯⎯(CHCl3 / KOH)⎯⎯> CH3NC ⎯⎯(Na / C2H5OH)⎯⎯> CH3-NH-CH3

(iii) मेथेनेमीन से एथेनेमीन:

CH3NH2 ⎯⎯(HNO2)⎯⎯> CH3OH ⎯⎯(PCl5)⎯⎯> CH3Cl ⎯⎯(KCN)⎯⎯> CH3CN ⎯⎯(Na / C2H5OH)⎯⎯> CH3CH2NH2

(iv) हेक्सेननाइट्राइल से 1-ऐमिनोपेंटेन:

CH3(CH2)4CN ⎯⎯(H3O+)⎯⎯> CH3(CH2)4COOH ⎯⎯(SOCl2 / NH3)⎯⎯> CH3(CH2)4CONH2 ⎯⎯(Br2 / KOH)⎯⎯> CH3(CH2)4NH2

(v) एथेनेमीन से मेथेनेमीन:

CH3CH2NH2 ⎯⎯(HNO2)⎯⎯> CH3CH2OH ⎯⎯(K2Cr2O7/H+)⎯⎯> CH3COOH ⎯⎯(SOCl2/NH3)⎯⎯> CH3CONH2 ⎯⎯(Br2/KOH)⎯⎯> CH3NH2
प्र. 6 (ख) [मुख्य] निम्नलिखित अभिक्रियाओं को संपन्न कीजिए: (i) प्रोपीन से प्रोपेन-2-ऑल, (ii) बेन्जिल क्लोराइड से बेन्जिल ऐल्कोहॉल, (iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड से प्रोपेन-1-ऑल, (iv) एनिसोल से p-ब्रोमोएनिसोल, (v) फीनॉल से बेन्जीन।

(i) प्रोपीन से प्रोपेन-2-ऑल (अम्ल-प्रेरित जल-योजन – मार्कोनीकॉफ नियम):

CH3-CH=CH2 + H2O ⎯⎯(तनु H2SO4 / H+)⎯⎯> CH3-CH(OH)-CH3

(ii) बेन्जिल क्लोराइड से बेन्जिल ऐल्कोहॉल (नाभिकरागी प्रतिस्थापन):

C6H5-CH2Cl + जलीय KOH ⎯⎯(Δ)⎯⎯> C6H5-CH2OH + KCl

(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड से प्रोपेन-1-ऑल (ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक + फॉर्मेल्डिहाइड):

HCHO + C2H5MgCl ⎯⎯(शुष्क ईथर)⎯⎯> C2H5-CH2-OMgCl ⎯⎯(H3O+)⎯⎯> C2H5-CH2-OH + Mg(OH)Cl

(iv) एनिसोल से p-ब्रोमोएनिसोल (इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक ब्रोमीनीकरण):

C6H5-OCH3 + Br2 ⎯⎯(एथेनोइक अम्ल)⎯⎯> p-Br-C6H4-OCH3 (मुख्य उत्पाद) + HBr

(v) फीनॉल से बेन्जीन (जिंक रज के साथ अपचयन):

C6H5OH + Zn (चूर्ण) ⎯⎯(आसवन/गर्म)⎯⎯> C6H6 (बेन्जीन) + ZnO
प्र. 6 (ख) [अथवा] निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए: (i) कोल्बे अभिक्रिया, (ii) राइमर-टीमन अभिक्रिया, (iii) विलियम्सन ईथर संश्लेषण।

(i) कोल्बे अभिक्रिया (Kolbe’s Reaction):

सोडियम फीनॉक्साइड को CO2 के साथ 400 K ताप एवं 4-7 atm दाब पर गर्म करने के बाद अम्ल द्वारा जलअपघटित करने पर 2-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल (सेलिसिलिक अम्ल) प्राप्त होता है।

C6H5ONa + CO2 ⎯⎯(400 K, 4-7 atm)⎯⎯> C6H4(OH)COONa ⎯⎯(H+)⎯⎯> C6H4(OH)COOH (सेलिसिलिक अम्ल)

(ii) राइमर-टीमन अभिक्रिया (Reimer-Tiemann Reaction):

फीनॉल की अभिक्रिया क्लोरोफॉर्म (CHCl3) तथा जलीय NaOH/KOH के साथ 340 K पर कराने के पश्चात् अम्लीकरण करने पर ऑर्थो-फॉर्मिल फीनॉल (सेलिसिलैल्डिहाइड) मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।

C6H5OH + CHCl3 + 3 NaOH ⎯⎯(340 K)⎯⎯> C6H4(OH)CHO (सेलिसिलैल्डिहाइड) + 3 NaCl + 2 H2O

(iii) विलियम्सन ईथर संश्लेषण (Williamson Ether Synthesis):

ऐल्किल हैलाइड की अभिक्रिया सोडियम ऐल्कोक्साइड या सोडियम फीनॉक्साइड के साथ कराने पर SN2 क्रियाविधि द्वारा ईथर बनता है।

R-X + R’-ONa ⎯⎯(Δ)⎯⎯> R-O-R’ (ईथर) + NaX
उदाहरण: CH3I + C2H5ONa ⟶ C2H5-O-CH3 (मेथॉक्सीएथेन) + NaI
प्र. 7 (क) [मुख्य] अनुच्छेद आधारित प्रश्न: (i) कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समतुल्य अणुभार वाले एल्डिहाइडों/कीटोनों से उच्च क्यों होते हैं? (ii) यह धातुओं से क्रिया कर कौन-सी गैस बनाते हैं? (iii) यह ऐल्कोहॉल से प्रबल अम्ल क्यों हैं? (iv) सोडा लाइम अभिक्रिया लिखिए, (v) α-हाइड्रोजन युक्त अम्ल की रेड फॉस्फोरस व हेलोजन से अभिक्रिया का नाम बताइए।

(i) उच्च क्वथनांक का कारण:

कार्बोक्सिलिक अम्ल के अणुओं में दो अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध बनने के कारण ये वाष्प अवस्था तथा अध्रुवीय विलायकों में भी द्वितय (Dimer) संरचना में रहते हैं। यह मजबूत H-बंध एल्डिहाइड एवं कीटोन में अनुपस्थित होता है।

(ii) धातुओं से अभिक्रिया:

कार्बोक्सिलिक अम्ल विद्युतधनी धातुओं (Na, K, Mg) के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H2 Gas) मुक्त करते हैं।

(iii) ऐल्कोहॉलों की तुलना में प्रबल अम्लीयता:

प्रोटॉन (H+) त्यागने के पश्चात् बना कार्बोक्सिलेट आयन (R-COO–) दो समतुल्य अनुनादी संरचनाओं द्वारा अत्यधिक स्थायी होता है। इसके विपरीत, ऐल्कोहॉल से बना ऐल्कोक्साइड आयन (R-O–) अनुनाद द्वारा स्थायी नहीं हो पाता।

(iv) सोडा लाइम द्वारा विबोक्सिलीकरण (Decarboxylation):

R-COONa + NaOH ⎯⎯(CaO / Δ)⎯⎯> R-H (ऐल्केन) + Na2CO3

(v) α-हाइड्रोजन युक्त अभिक्रिया का नाम:

हेल-वोलहार्ड-ज़ेलिंस्की अभिक्रिया (Hell-Volhard-Zelinsky / HVZ Reaction)
प्र. 7 (क) [अथवा] (i) C5H10 (A) ओज़ोनी-अपघटन से B और C देता है। ‘B’ फेहलिंग तथा आयोडोफॉर्म दोनों परीक्षण देता है। ‘C’ फेहलिंग नहीं देता लेकिन आयोडोफॉर्म देता है। A, B, C पहचानिए। (ii) A से D पहचानिए: CH3COOH ⎯(PCl5)→ A ⎯(H2/Pd-BaSO4)→ B ⎯(CH3MgBr/H3O+)→ C, एवं B ⎯(LiAlH4)→ D।

(i) यौगिक A, B, C की पहचान:

  • यौगिक B: फेहलिंग परीक्षण देता है ⟶ एल्डिहाइड है। आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है ⟶ CH3CHO (एथेनैल) है।
  • यौगिक C: फेहलिंग नहीं देता, पर आयोडोफॉर्म देता है ⟶ CH3COCH3 (प्रोपेनोन / एसीटोन) है।
  • यौगिक A (एल्कीन): CH3CHO + O=C(CH3)2 से निर्मित एल्कीन = CH3-CH=C(CH3)2 (2-मेथिलब्यूट-2-ईन, C5H10)।
A = 2-मेथिलब्यूट-2-ईन [CH3-CH=C(CH3)2]
B = एथेनैल [CH3CHO]
C = प्रोपेनोन [CH3COCH3]

(ii) A से D तक पहचान:

CH3COOH + PCl5 ⟶ CH3COCl [A = एसेटिल क्लोराइड]
CH3COCl + H2 ⎯⎯(Pd-BaSO4)⎯⎯> CH3CHO [B = एथेनैल / एसेटैल्डिहाइड]
CH3CHO + CH3MgBr ⎯⎯(H3O+)⎯⎯> CH3-CH(OH)-CH3 [C = प्रोपेन-2-ऑल]
CH3CHO + LiAlH4 ⟶ CH3CH2OH [D = एथेनॉल]
प्र. 7 (ख) [मुख्य] क्या होता है जब: (i) n-ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ अभिकृत किया जाता है? (ii) शुष्क ईथर में ब्रोमोबेन्जीन की अभिक्रिया Mg से होती है? (iii) एथिल क्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होती है? (iv) मेथिल क्लोराइड की अभिक्रिया KCN से होती है? (v) शुष्क ईथर में मेथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया Na से होती है?

(i) n-ब्यूटिल क्लोराइड + ऐल्कोहॉलीय KOH (विहाइड्रोहैलोजनीकरण – E2):

CH3CH2CH2CH2Cl + alc. KOH ⎯⎯(Δ)⎯⎯> CH3CH2CH=CH2 (ब्यूट-1-ईन) + KCl + H2O

(ii) ब्रोमोबेन्जीन + Mg (ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक का निर्माण):

C6H5Br + Mg ⎯⎯(शुष्क ईथर)⎯⎯> C6H5MgBr (फेनिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड)

(iii) एथिल क्लोराइड + जलीय KOH (नाभिकरागी प्रतिस्थापन):

CH3CH2Cl + aq. KOH ⎯⎯(Δ)⎯⎯> CH3CH2OH (एथेनॉल) + KCl

(iv) मेथिल क्लोराइड + KCN (सायनाइड निर्माण):

CH3Cl + KCN ⎯⎯(जलीय एथेनॉल)⎯⎯> CH3CN (एथेननाइट्राइल / मेथिल सायनाइड) + KCl

(v) मेथिल ब्रोमाइड + सोडियम (वुर्ट्ज़ अभिक्रिया):

2 CH3Br + 2 Na ⎯⎯(शुष्क ईथर)⎯⎯> CH3-CH3 (एथेन) + 2 NaBr
प्र. 7 (ख) [अथवा] निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य कार्बनिक उत्पाद की संरचना लिखिए: (i) CH3CH2CH2Cl + NaI (ऐसीटोन / ऊष्मा), (ii) CH3CH2Br + KCN (जलीय एथेनॉल), (iii) CH3CH2CH2OH + SOCl2, (iv) CH3CH2CH=CH2 + HBr (परॉक्साइड), (v) CH3CH=C(CH3)2 + HBr।

(i) फ़िंकेलस्टाइन अभिक्रिया (Finkelstein Reaction):

CH3CH2CH2Cl + NaI ⎯⎯(ऐसीटोन / Δ)⎯⎯> CH3CH2CH2I (1-आयोडोप्रोपेन) + NaCl↓

(ii) सायनाइड प्रतिस्थापन:

CH3CH2Br + KCN ⎯⎯(जलीय एथेनॉल)⎯⎯> CH3CH2CN (प्रोपेननाइट्राइल) + KBr

(iii) डार्जन अभिक्रिया (Darzen Process):

CH3CH2CH2OH + SOCl2 ⟶ CH3CH2CH2Cl (1-क्लोरोप्रोपेन) + SO2↑ + HCl↑

(iv) खराश प्रभाव / एन्टी-मार्कोनीकॉफ नियम (Peroxide Effect):

CH3CH2CH=CH2 + HBr ⎯⎯(परॉक्साइड)⎯⎯> CH3CH2CH2CH2Br (1-ब्रोमोब्यूटेन)

(v) मार्कोनीकॉफ नियम (Markownikoff’s Addition):

CH3CH=C(CH3)2 + HBr ⟶ CH3-CH2-C(Br)(CH3)2 (2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन)

UP Board 12th Chemistry Model Paper 2027 PDF Download, New Exam Pattern, Marking Scheme & Analysis.

UP Board 12th Chemistry Model Paper 2027: UPMSP ने यूपी बोर्ड Class 12 Chemistry Model Paper 2027 जारी कर दिया है। यहाँ से मॉडल पेपर डाउनलोड करने का डायरेक्ट लिंक दिया और ऑफिसियल वेबसाईट का लिंक दिया गए है, और जानें नए परीक्षा पैटर्न के बारे में और 70 अंकों के ब्लूप्रिंट क्या हैं? कितने-कितने अंकों के कितने प्रश्न आएंगे, इस साल होने वाले रासायनिक विज्ञान के पेपर मे कितने बहुविकल्पीय, आंकिक, शॉर्ट और लॉंग क्वेशन होंगे, कितने अभिक्रियाओं पर आधारित क्वेशन होंगे.

Key Highlights

  • नया प्रश्न प्रारूप: सीधे सवालों के बजाय इस बार केस-आधारित अनुच्छेद (Case Study), ग्राफ और अभिकथन-तर्क वाले प्रश्नों को प्रमुखता दी गई है।
  • 50% से अधिक वेटेज बड़े प्रश्नों का: प्रश्न संख्या 5, 6 और 7 मिलकर कुल 36 अंक बनाते हैं, जो आपके कुल स्कोर की दिशा तय करेंगे।
  • दीर्घ उत्तरीय में पूरा विकल्प: 5-अंक वाले सभी प्रश्नों (प्रश्न 6 व 7) के हर उप-भाग में ‘अथवा’ (OR) का विकल्प उपलब्ध है।
  • संतुलित अंक विभाजन: भौतिक, अकार्बनिक और कार्बनिक तीनों ही शाखाओं से संतुलित प्रश्न पूछे गए हैं, जिससे किसी भी एक भाग को छोड़ना नुकसानदेह हो सकता है।

उत्तर प्रदेश बोर्ड कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान (Chemistry) — नया परीक्षा पैटर्न और मॉडल पेपर विश्लेषण (सत्र 2027)

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) द्वारा सत्र 2027 के लिए जारी आधिकारिक मॉडल पेपर के आधार पर, कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान के 70 अंकों के संपूर्ण प्रश्न पत्र और मार्किंग स्कीम का विस्तृत विश्लेषण.

आगामी बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नए पैटर्न, प्रश्नों के प्रकार और अंक विभाजन को समझना बेहद जरूरी है। आइए इसे आसान भाषा में समझें.

1. प्रश्न पत्र की संरचना और मार्किंग स्कीम (Question Paper Structure)

इस वर्ष रसायन विज्ञान का थ्योरी पेपर 70 अंकों का होगा, जिसे हल करने के लिए विद्यार्थियों को 3 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा (शुरुआत के 15 मिनट प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं)। इस बार के पैटर्न में केवल सीधे सवाल या रटने वाले प्रश्न नहीं हैं, बल्कि छात्रों की वैचारिक समझ (Conceptual Clarity) को परखने के लिए कई नए फॉर्मेट जोड़े गए हैं।

प्रश्न पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे:

  • वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs): बुनियादी अवधारणाओं की जाँच के लिए।
  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न: एक या दो पंक्तियों में सटीक उत्तर देने हेतु।
  • लघु उत्तरीय प्रश्न (Type-I & II): वैचारिक और आंकिक (Numerical) समस्याओं पर आधारित।
  • विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answer): दीर्घ उत्तरीय और विस्तृत रासायनिक क्रियाओं के लिए।
  • विशेष विश्लेषणात्मक प्रश्न:
    • अभिकथन एवं तर्क (Assertion-Reason): तार्किक क्षमता परखने के लिए।
    • कॉलम मिलान (Column Matching): सही मिलान आधारित प्रश्न।
    • आलेख आधारित प्रश्न (Graphs): विभिन्न रासायनिक कोटियों और अभिक्रिया वेग से जुड़े ग्राफ।
    • केस स्टडी / अनुच्छेद-आधारित प्रश्न (Case-based): गद्यांश या स्थिति के आधार पर पूछे जाने वाले व्यावहारिक प्रश्न।

2. तीन प्रमुख शाखाओं का संतुलन (Physical, Inorganic & Organic Chemistry)

यूपी बोर्ड का यह मॉडल पेपर रसायन विज्ञान की तीनों मुख्य शाखाओं के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाता है:

  • भौतिक रसायन (Physical Chemistry): इस हिस्से में आंकिक प्रश्नों (Numericals) और फॉर्मूला आधारित गणनाओं पर विशेष जोर रहता है। उत्तर लिखते समय गणना के सभी चरणों (Step-by-step working) को स्पष्ट रूप से दर्शाना अनिवार्य है, ताकि स्टेप-मार्किंग का पूरा लाभ मिल सके।
  • अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry): इसमें आवर्त सारणी, समन्वय यौगिकों (Coordination Compounds) और डी- एवं एफ-ब्लॉक के तत्वों से जुड़े तथ्यात्मक और संरचनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry): यह भाग ‘नेम्ड रिएक्शन्स’ (Named Reactions), रासायनिक रूपांतरण (Conversions) और क्रिया-विधियों (Mechanisms) पर आधारित होता है। इसमें समीकरणों को संतुलित करना और अभिकर्मकों (Reagents) की सही जानकारी होना सबसे जरूरी है।

Question & Marks Distribution Table

Section / Question (प्रश्न संख्या) Question Type (प्रश्न प्रकार) Sub-Questions (उप-प्रश्न) Total Questions (कुल प्रश्न) Marks per Question (अंक प्रति प्रश्न) Total Marks (कुल अंक)
प्रश्न संख्या 1 बहुविकल्पीय (MCQ) 1 (क से च) 6 1 अंक 06 अंक
प्रश्न संख्या 2 अति लघु उत्तरीय (Very Short) 2 (क से घ) 4 2 अंक 08 अंक
प्रश्न संख्या 3 अति लघु उत्तरीय (Very Short) 3 (क से घ) 4 2 अंक 08 अंक
प्रश्न संख्या 4 लघु उत्तरीय-I (Short Answer-I) 4 (क से घ) 4 3 अंक 12 अंक
प्रश्न संख्या 5 लघु उत्तरीय-II (Short Answer-II) 5 (क से घ) 4 4 अंक 16 अंक
प्रश्न संख्या 6 विस्तृत उत्तरीय (Long Answer) 6 (क, ख – अथवा सहित) 2 5 अंक 10 अंक
प्रश्न संख्या 7 विस्तृत उत्तरीय (Long Answer) 7 (क, ख – अथवा सहित) 2 5 अंक 10 अंक
कुल योग (Grand Total) 26 प्रश्न – 70 अंक

UP Board Class 12th Physics Model Paper 2027 PDF With Solution.

UPMSP द्वारा जारी आधिकारिक मॉडल पेपर (सत्र 2026-27) के अनुसार, यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान (Physics) के परीक्षा पैटर्न, 70 अंकों के विस्तृत अंक विभाजन और 5 अलग-अलग खण्डों की संरचना को इस पोस्ट में विस्तार से समझाया गया है। यदि आप मुख्य बोर्ड परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करना चाहते हैं, तो जानें कि बहुविकल्पीय, अति लघु, लघु तथा विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों का वितरण किस प्रकार रहेगा और पूरे पेपर को निर्धारित समय में कैसे हल करें।

यूपी बोर्ड 12वीं भौतिक विज्ञान मॉडल पेपर 2027 (हल सहित PDF)

खण्ड ‘अ’ (Section A) – बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्र. 1 (क) 2L × 2L × L विमा के एक घनाभ में 4L² क्षेत्रफल वाले पृष्ठ ‘S’ के केंद्र पर एक आवेश q रखा गया है। पृष्ठ ‘S’ के विपरीत पृष्ठ से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स का मान होगा?
(i) q / (12 ε₀)
(ii) q / (3 ε₀)
(iii) q / (2 ε₀)
(iv) q / (6 ε₀)
(iv) q / (6 ε₀)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

पृष्ठ ‘S’ का क्षेत्रफल 4L² (अर्थात 2L × 2L) है। यदि हम इस घनाभ के पृष्ठ ‘S’ के दूसरी ओर ठीक वैसा ही दूसरा घनाभ रख दें, तो आवेश q एक सममित घन (Cube) के केंद्र पर आ जाएगा जिसकी प्रत्येक भुजा 2L होगी।

गॉस के नियम (Gauss’s Law) से सम्पूर्ण बंद घन से निर्गत कुल फ्लक्स (Φ) = q / ε₀
  • घन में कुल 6 समान वर्गाकार फलक (Faces) होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल 2L × 2L = 4L² है।
  • सममिति (Symmetry) के कारण, प्रत्येक फलक से बराबर फ्लक्स गुजरेगा।
  • पृष्ठ ‘S’ का विपरीत पृष्ठ भी घन का एक फलक है।

अतः विपरीत पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स = Φ / 6 = q / (6 ε₀)

💡 Tips: जब भी आवेश किसी सतह पर स्थित हो, तो काल्पनिक गॉसियन पृष्ठ (Gaussian Surface) बनाते समय सममिति का विशेष ध्यान रखें ताकि आवेश केंद्र में आ जाए।
प्र. 1 (ख) किसी चालक की वैद्युत चालकता (Electrical Conductivity) निर्भर करती है:
(i) तापमान पर (Temperature)
(ii) सामग्री की शुद्धता पर (Purity)
(iii) दबाव/दाब पर (Pressure)
(iv) उपरोक्त सभी (All of the above)
(iv) उपरोक्त सभी (All of the above)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

वैद्युत चालकता (σ) किसी पदार्थ का विशिष्ट गुण है जो निम्नलिखित कारकों से प्रभावित होती है:

  • तापमान (Temperature): ताप बढ़ने पर शिथिलन काल (Relaxation time) घटता है, जिससे चालकता बदलती है।
  • शुद्धता (Purity): अपद्रव्य मिलाने से चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में बाधा आती है।
  • दाब (Pressure): यांत्रिक तनाव या दाब से जालक (Lattice) संरचना प्रभावित होती है।
💡 Tips: याद रखें, विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) और वैद्युत चालकता पदार्थ के आकार (लम्बाई/क्षेत्रफल) पर निर्भर नहीं करते, केवल पदार्थ की प्रकृति व भौतिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
प्र. 1 (ग) 1 / (μ₀ × ε₀) की विमा (Dimensions) है:
(i) [L T⁻¹]
(ii) [L⁻¹ T]
(iii) [L² T⁻²]
(iv) [M L T⁻¹]
(iii) [L² T⁻²]

विस्तृत हल (Detailed Solution):

निर्वात में प्रकाश की चाल (Speed of light) ‘c’ का सूत्र होता है:

c = 1 / √(μ₀ × ε₀) ⇒ c² = 1 / (μ₀ × ε₀)
  • चाल (c) का विमीय सूत्र = [L T⁻¹]
  • c² का विमीय सूत्र = [L T⁻¹]² = [L² T⁻²]

अतः 1 / (μ₀ × ε₀) का विमीय सूत्र वही होगा जो वेग के वर्ग (c²) का होता है।

💡 Tips: बोर्ड परीक्षा में प्रायः √(μ₀ ε₀) या 1/√(μ₀ ε₀) की विमा पूछी जाती है। ध्यान दें कि केवल 1/(μ₀ ε₀) में वर्ग (Square) का विमीय सूत्र आएगा।
प्र. 1 (घ) किसी परिपथ पर प्रत्यावर्ती वोल्टता v(t) = 30 Sin(1000t) वोल्ट लगाने पर धारा i(t) = 0.3 Sin(1000t – 60°) एम्पीयर बहती है। परिपथ में औसत शक्ति होगी:
(i) 2.25 वाट (Watt)
(ii) 4.5 वाट (Watt)
(iii) 9.0 वाट (Watt)
(iv) 18.0 वाट (Watt)
(i) 2.25 वाट (Watt)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

दिया है (Given):

  • शिखर वोल्टता (V₀) = 30 V
  • शिखर धारा (I₀) = 0.3 A
  • कलान्तर (Phase difference, ϕ) = 60°
औसत शक्ति (Pavg) = Vrms × Irms × cos(ϕ) = (V₀ / √2) × (I₀ / √2) × cos(ϕ)

गणना (Calculation):

Pavg = (30 × 0.3 / 2) × cos(60°)

Pavg = 4.5 × (1 / 2) = 2.25 वाट (W)

💡 Tips: सूत्र में cos(ϕ) को शक्ति गुणक (Power Factor) कहते हैं। हमेशा V₀ और I₀ के स्थान पर RMS मानों का उपयोग करें।
प्र. 1 (ङ) e चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन में λ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश हेतु मुख्य उच्चिष्ठ तथा प्रथम निम्निष्ठ के बीच कोणीय दूरी θ होगी:
(i) λ / e
(ii) λ / 2e
(iii) λ / 4e
(iv) π / 2
(i) λ / e

विस्तृत हल (Detailed Solution):

एकल झिरी द्वारा विवर्तन (Diffraction at single slit) में निम्निष्ठ (Minimum) प्राप्त होने की शर्त है:

e × sin(θ) = nλ

प्रथम निम्निष्ठ (n = 1) के लिए: e × sin(θ) = λ

चूँकि विवर्तन कोण θ अत्यंत सूक्ष्म होता है, अतः sin(θ) ≈ θ।

इसलिए, कोणीय स्थिति θ = λ / e प्राप्त होती है। यही मुख्य उच्चिष्ठ के केंद्र से प्रथम निम्निष्ठ की कोणीय दूरी है।

💡 Tips: यदि मुख्य उच्चिष्ठ की कुल कोणीय चौड़ाई (Total Angular Width) पूछी जाए तो वह 2θ = 2λ/e होगी।
प्र. 1 (च) शुद्ध जर्मेनियम (Germanium) को p-टाइप अर्धचालक (p-type Semiconductor) बनाने के लिए उसमें मिलाया जाने वाला अपद्रव्य है:
(i) ऐलुमिनियम (Aluminium)
(ii) फ़ॉस्फ़ोरस (Phosphorus)
(iii) ऐन्टिमनी (Antimony)
(iv) आर्सेनिक (Arsenic)
(i) ऐलुमिनियम (Aluminium)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

p-टाइप अर्धचालक बनाने के लिए निज/शुद्ध अर्धचालक में त्रि-संयोजी (Trivalent) अपद्रव्य परमाणु मिलाए जाते हैं।

  • ऐलुमिनियम (Al): त्रि-संयोजी (Trivalent) तत्व है, जो कोटर (Hole) उत्पन्न करता है।
  • फ़ॉस्फ़ोरस, आर्सेनिक, ऐन्टिमनी: पंच-संयोजी (Pentavalent) तत्व हैं, जिनका प्रयोग n-टाइप अर्धचालक बनाने में होता है।
💡 Tips: याद रखने का आसान नियम: p-टाइप = 3 संयोजकता वाले (Al, B, In, Ga); n-टाइप = 5 संयोजकता वाले (P, As, Sb)।

खण्ड ‘ब’ एवं खण्ड ‘स’ (Section B & Section C) – अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

प्र. 2 (क) निर्वात की चुंबकीयशीलता (μ₀) की विमा तथा मात्रक लिखिए।

1. मात्रक (Unit):

निर्वात की चुंबकीयशीलता (Permeability of free space) का एस.आई. (S.I.) मात्रक न्यूटन / एम्पीयर² (N/A²) अथवा हेनरी / मीटर (H/m) होता है।

2. विमीय सूत्र (Dimensional Formula):

दो समांतर धारावाही चालकों के बीच प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाले बल के सूत्र से:

F / L = (μ₀ / 4π) × (2 I₁ I₂ / r) ⇒ μ₀ = (F × r) / (I₁ × I₂ × L)

विमाओं को प्रतिस्थापित करने पर:

  • बल (F) की विमा = [M L T⁻²]
  • दूरी (r, L) की विमा = [L]
  • धारा (I₁, I₂) की विमा = [A]
  • μ₀ की विमा = [M L T⁻²] × [L] / ([A]² × [L]) = [M L T⁻² A⁻²]
💡 Tips: μ₀ का आंकिक मान 4π × 10⁻⁷ N/A² होता है। विमा लिखते समय आवेश के पदों में न लिखकर एम्पीयर [A] के पदों में ही लिखें।
प्र. 2 (ख) किसी कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा (Induced Current) किन-किन बातों पर निर्भर करती है?

उत्तर:

फैराडे के वैद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) नियम तथा ओम के नियम से, प्रेरित धारा i = e / R = (N / R) × (dΦ / dt) होती है। अतः प्रेरित विद्युत धारा निम्नलिखित तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है:

  • चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन की दर (Rate of change of magnetic flux, dΦ / dt): फ्लक्स परिवर्तन जितना तीव्र होगा, प्रेरित धारा उतनी ही अधिक होगी।
  • कुंडली में फेरों की संख्या (Number of turns, N): फेरों की संख्या बढ़ने पर प्रेरित विद्युत वाहक बल एवं धारा का मान बढ़ता है।
  • परिपथ का कुल प्रतिरोध (Total Resistance of circuit, R): परिपथ का प्रतिरोध जितना कम होगा, प्रेरित धारा का मान उतना ही अधिक होगा।
प्र. 2 (ग) विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum) में सबसे बड़ी तथा सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य की तरंगों का नाम लिखिए।

उत्तर:

  • सबसे बड़ी तरंगदैर्ध्य (Longest Wavelength): रेडियो तरंगें (Radio Waves) — इनकी तरंगदैर्ध्य 10⁻¹ मीटर से 10⁴ मीटर तक होती है।
  • सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य (Shortest Wavelength): गामा किरणें (Gamma Rays) — इनकी तरंगदैर्ध्य 10⁻¹⁴ मीटर से 10⁻¹⁰ मीटर तक होती है।
💡 Tips: जिस तरंग की तरंगदैर्ध्य (λ) सबसे छोटी होती है, उसकी आवृत्ति (Frequency) और ऊर्जा (E = hν) सबसे अधिक होती है।
प्र. 2 (घ) यदि प्रिज्म-कोण (Prism Angle) तथा न्यूनतम विचलन कोण (Minimum Deviation Angle) प्रत्येक A हो, तो प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक का मान बताइए।

दिया है (Given): प्रिज्म कोण = A, न्यूनतम विचलन कोण (δm) = A

प्रिज्म के अपवर्तनांक का सूत्र: n = sin[(A + δm) / 2] / sin(A / 2)

हल (Solution):

  • δm = A रखने पर: n = sin[(A + A) / 2] / sin(A / 2)
  • n = sin(2A / 2) / sin(A / 2) = sin(A) / sin(A / 2)
  • त्रिकोणमितीय सूत्र sin(A) = 2 sin(A/2) cos(A/2) का प्रयोग करने पर:
  • n = [2 sin(A/2) cos(A/2)] / sin(A/2)
  • n = 2 cos(A / 2)

अतः प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक 2 cos(A/2) होगा।

प्र. 2 (ङ) हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में बामर श्रेणी (Balmer Series) की द्वितीय रेखा की तरंगदैर्ध्य रिडबर्ग नियतांक (R) के पदों में लिखिए।

हल (Solution):

बामर श्रेणी के लिए निम्नतम ऊर्जा स्तर n₁ = 2 होता है। बामर श्रेणी की द्वितीय रेखा (Hβ रेखा) के लिए उच्चतम ऊर्जा स्तर n₂ = 4 होता है।

रिडबर्ग सूत्र: 1 / λ = R × [ (1 / n₁²) – (1 / n₂²) ]
  • 1 / λ = R × [ (1 / 2²) – (1 / 4²) ]
  • 1 / λ = R × [ (1 / 4) – (1 / 16) ]
  • 1 / λ = R × [ (4 – 1) / 16 ] = 3R / 16
  • λ = 16 / (3R)

अतः बामर श्रेणी की द्वितीय रेखा की तरंगदैर्ध्य 16 / (3R) होगी।

प्र. 2 (च) युग्म उत्पादन (Pair Production) से आप क्या समझते हैं? इसका एक उदाहरण दीजिए।

परिभाषा (Definition):

जब उच्च ऊर्जा वाला कोई गामा-फ़ोटॉन (γ-photon, ऊर्जा ≥ 1.02 MeV) किसी भारी पदार्थ के नाभिक पर आपतित होता है, तो वह नाभिक द्वारा अवशोषित होकर एक इलेक्ट्रॉन (e⁻) तथा एक पॉज़िट्रॉन (e⁺) के युग्म में रूपांतरित हो जाता है। इस घटना को युग्म उत्पादन (Pair Production) कहते हैं।

hν (γ-फ़ोटॉन, 1.02 MeV) ⟶ ₋₁e⁰ (इलेक्ट्रॉन) + ₊₁e⁰ (पॉज़िट्रॉन)

यह घटना आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता सिद्धांत (E = mc²) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

प्र. 3 (क) सिद्ध कीजिए कि किसी आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा U = ½ C V² होती है।

उपपत्ति (Derivation):

माना किसी C धारिता वाले अनावेशित चालक को q आवेश देने पर उसका विभव 0 से बढ़कर V हो जाता है।

  • प्रारंभ में चालक का विभव = 0
  • q आवेश देने पर अंतिम विभव = V
  • चालक का औसत विभव (Average Potential) = (0 + V) / 2 = V / 2

चालक को सूक्ष्म आवेश dq देने में किया गया सूक्ष्म कार्य dW = V’ dq होता है। कुल कार्य (W):

W = आवेश × औसत विभव = q × (V / 2) = ½ q V

चूँकि चालक का आवेश q = C V होता है, अतः q का मान रखने पर:

W = ½ × (C V) × V = ½ C V²

यह किया गया कार्य ही चालक में वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrostatic Potential Energy, U) के रूप में संचित होता है:

U = ½ C V² = ½ q V = ½ (q² / C)

इति सिद्धम् (Hence Proved)।

प्र. 3 (ख) ऐम्पियर के परिपथीय नियम (Ampere’s Circuital Law) का कथन लिखिए एवं इसे प्राप्त (व्युत्पन्न) कीजिए।

कथन (Statement):

किसी बंद समतल वक्र (Closed Loop) के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन (Line Integral), उस बंद वक्र द्वारा परिबद्ध (घिरे) क्षेत्रफल से होकर प्रवाहित होने वाली कुल धारा I का μ₀ गुना होता है।

∫ B · dl = μ₀ I

व्युत्पत्ति (Derivation):

माना एक अनन्त लंबाई के सीधे धारावाही तार में I धारा प्रवाहित हो रही है। तार से r दूरी पर वृत्तीय पथ की कल्पना करते हैं।

  • बायो-सेवर्ट के नियम से, r दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र B = (μ₀ I) / (2π r)
  • प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र B और अल्पांश dl की दिशा समान (θ = 0°) होती है।
  • रेखीय समाकलन: ∫ B · dl = ∫ B dl cos(0°) = B ∫ dl
  • चूँकि ∫ dl = वृत्त की परिधि = 2π r:
  • ∫ B · dl = [ (μ₀ I) / (2π r) ] × (2π r) = μ₀ I

इति सिद्धम् (Hence Proved)।

प्र. 3 (ग) एक कुंडली का स्व-प्रेरण गुणांक (Self-Inductance) 10 mH है। इसमें वैद्युत धारा 5 ms में 5 A से 15 A हो जाती है। कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान ज्ञात कीजिए।

दिया है (Given):

  • स्वप्रेरकत्व (L) = 10 mH = 10 × 10⁻³ H
  • समय अंतराल (Δt) = 5 ms = 5 × 10⁻³ s
  • धारा में परिवर्तन (ΔI) = I₂ – I₁ = 15 A – 5 A = 10 A
प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र: |e| = L × (ΔI / Δt)

हल (Solution):

|e| = (10 × 10⁻³ H) × [ 10 A / (5 × 10⁻³ s) ]

|e| = 10 × (10 / 5) = 10 × 2 = 20 वोल्ट (V)

अतः कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण 20 V होगा।

प्र. 3 (घ) यदि अर्धचालक डायोड का अग्रदिशिक अभिनति प्रतिरोध 50 Ω हो, तो संलग्न परिपथ में सेल से प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए।

परिणामी परिपथ विश्लेषण (Circuit Analysis):

  • ऊपरी शाखा (Diode D₁): डायोड D₁ अग्र अभिनत (Forward Biased) है। अतः यह चालन करेगा। इस शाखा का प्रतिरोध R₁ = Rdiode + Rext = 50 Ω + 200 Ω = 250 Ω।
  • मध्य शाखा (Diode D₂): डायोड D₂ उत्क्रम अभिनत (Reverse Biased) है। अतः इसका प्रतिरोध अनंत माना जाएगा और इस शाखा से शून्य धारा प्रवाहित होगी।
  • मुख्य श्रेणी प्रतिरोध: परिपथ में नीचे श्रेणी में R₃ = 25 Ω जुड़ा है। सेल की वोल्टता V = 6 V है।
कुल प्रभावी प्रतिरोध (Rtotal) = R₁ + R₃ = 250 Ω + 25 Ω = 275 Ω

धारा की गणना (Calculation of Current):

सेल से प्रवाहित कुल धारा I = V / Rtotal

I = 6 / 275 A = 0.0218 एम्पीयर (A) ≈ 21.8 मिली-एम्पीयर (mA)

💡 Tips: अग्र अभिनति में डायोड का दिया गया आंतरिक प्रतिरोध अवश्य जोड़ें और उत्क्रम अभिनत शाखा को परिपथ से हटाकर हल करें।

खण्ड ‘द’ (Section D) – लघु उत्तरीय प्रश्न – II

प्र. 4 (क) अनुगमन वेग (Drift Velocity) से आप क्या समझते हैं? किसी चालक से प्रवाहित विद्युत धारा के लिए अनुगमन वेग के पदों में व्यंजक प्राप्त कीजिए।

1. अनुगमन वेग की परिभाषा (Definition of Drift Velocity):

जब किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर लगाया जाता है, तो चालक के भीतर उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन एक नियत सूक्ष्म औसत वेग (~10⁻⁴ m/s) से उच्च विभव वाले सिरे की ओर खिसकने (Set drift) लगते हैं। इस औसत वेग को अनुगमन वेग या अपवाह वेग (Drift Velocity, vd) कहते हैं।

2. धारा तथा अनुगमन वेग में संबंध (Relation between Current and Drift Velocity):

माना L लंबाई तथा A अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व (प्रति एकांक आयतन इलेक्ट्रॉनों की संख्या) ‘n’ है।

  • चालक का कुल आयतन = A × L
  • चालक में उपस्थित कुल मुक्त इलेक्ट्रॉन = n × A × L
  • चालक का कुल मुक्त आवेश (q) = n A L e (जहाँ e = इलेक्ट्रॉन का आवेश)
  • इलेक्ट्रॉनों द्वारा L लंबाई पार करने में लगा समय (t) = L / vd

ओम के नियम एवं धारा की परिभाषा से प्रवाहित धारा (I):

I = q / t = (n A L e) / (L / vd) ⇒ I = n e A vd

जहाँ I = धारा (एम्पीयर), n = इलेक्ट्रॉन घनत्व, e = इलेक्ट्रॉन का आवेश, A = क्षेत्रफल, vd = अनुगमन वेग।

प्र. 4 (ख) L-C-R संयोजन के लिए श्रेणीक्रम अनुनादी परिपथ बनाइए। इस परिपथ के लिए अनुनादी आवृत्ति का सूत्र प्राप्त कीजिए। अनुनादी आवृत्ति प्रतिरोध पर किस प्रकार निर्भर करती है?

1. अनुनाद की स्थिति (Resonance Condition):

श्रेणीक्रम L-C-R परिपथ में जब प्रेरकत्व प्रतिघात (Prerakiy Pratighat, XL) तथा धारितीय प्रतिघात (Dharitiya Pratighat, XC) का मान आपस में बराबर हो जाता है, तो परिपथ की प्रतिबाधा (Impedance, Z) न्यूनतम (Z = R) हो जाती है। इस स्थिति को वैद्युत अनुनाद (Electrical Resonance) कहते हैं।

अनुनाद पर: XL = XC ⇒ ω L = 1 / (ω C)

2. अनुनादी आवृत्ति का सूत्र (Resonant Frequency Derivation):

  • ω² = 1 / (L C)
  • कौणीय आवृत्ति ω = 1 / √(L C)
  • चूँकि ω = 2π fr होती है, अतः अनुनादी आवृत्ति (fr):
fr = 1 / [ 2π √(L C) ]

3. प्रतिरोध (R) पर निर्भरता:

अनुनादी आवृत्ति का सूत्र स्पष्ट करता है कि fr केवल प्रेरकत्व (L) एवं धारिता (C) पर निर्भर करती है। यह प्रतिरोध (R) के मान पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती। प्रतिरोध केवल अनुनाद के समय अधिकतम धारा के परिमाण को नियंत्रित करता है।

प्र. 4 (ग) प्रिज्म के पदार्थ के लिए अपवर्तनांक का सूत्र अल्पतम विचलन कोण (δm) एवं प्रिज्म कोण (A) के पदों में निगमित कीजिए।

उपपत्ति (Derivation):

माना प्रिज्म कोण A तथा आपतन कोण i एवं अपवर्तन कोण r है। प्रिज्म के लिए कुल विचलन कोण δ = (i₁ + i₂) – (r₁ + r₂) होता है।

  • प्रिज्म के भीतर ज्योमितीय संबंध से: r₁ + r₂ = A
  • अतः विचलन कोण: δ = i₁ + i₂ – A
  • अल्पतम (न्यूनतम) विचलन की स्थिति में: δ = δm, i₁ = i₂ = i, तथा r₁ = r₂ = r

अल्पतम विचलन स्थिति के समीकरणों से:

  • 2r = A ⇒ r = A / 2
  • δm = 2i – A ⇒ i = (A + δm) / 2

स्नेल के नियम (Snell’s Law) से अपवर्तनांक (n):

n = sin(i) / sin(r) ⇒ n = sin[ (A + δm) / 2 ] / sin( A / 2 )

इति सिद्धम् (Hence Proved)।

प्र. 4 (घ) फोटॉन के विराम द्रव्यमान तथा गतिक द्रव्यमान से आप क्या समझते हैं? फोटॉन का संवेग p = h / λ निगमित कीजिए।

1. फोटॉन का विराम एवं गतिक द्रव्यमान:

  • विराम द्रव्यमान (Rest Mass): फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य (Zero) होता है क्योंकि फोटॉन कभी भी विराम अवस्था में नहीं रह सकता; यह सदैव प्रकाश की चाल (c) से गतिमान रहता है।
  • गतिक द्रव्यमान (Kinetic Mass): आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण (E = m c²) तथा प्लांक सूत्र (E = hν) की तुलना करने पर: m c² = hν ⇒ m = hν / c² = h / (c λ)।

2. फोटॉन के संवेग का निगमन (Derivation of Momentum):

फोटॉन का संवेग (p) = गतिक द्रव्यमान (m) × चाल (c)

p = m × c = (hν / c²) × c = hν / c

चूँकि प्रकाश की आवृत्ति एवं तरंगदैर्ध्य का संबंध c = ν λ (अर्थात ν/c = 1/λ) होता है:

p = h / λ

जहाँ h = प्लांक नियतांक तथा λ = फोटॉन की तरंगदैर्ध्य। इति सिद्धम्।

प्र. 4 (ङ) एक विद्युत चुंबकीय तरंग का दोलित वैद्युत क्षेत्र Ey = 30 sin(2 × 10¹¹ t + 300 π x) वोल्ट/मीटर से दिया जाता है। तरंगदैर्ध्य (λ) तथा दोलित चुंबकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।

तुलना (Comparison):

दिए गए समीकरण Ey = 30 sin(2 × 10¹¹ t + 300 π x) की तुलना मानक मानक समीकरण Ey = E₀ sin(ωt + kx) से करने पर:

  • वैद्युत क्षेत्र का आयाम (E₀) = 30 V/m
  • कोणीय आवृत्ति (ω) = 2 × 10¹¹ rad/s
  • संचलनांक नियतांक (k) = 300 π rad/m

(i) तरंगदैर्ध्य की गणना (Wavelength):

k = 2π / λ ⇒ 300 π = 2π / λ ⇒ λ = 2 / 300 = 1 / 150 m ≈ 6.67 × 10⁻³ m (या 6.67 mm)

(ii) दोलित चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक (Magnetic Field Expression):

  • चुंबकीय क्षेत्र का आयाम (B₀) = E₀ / c = 30 / (3 × 10⁸) = 10⁻⁷ टेसला (T)
  • समीकरण में ‘+kx’ पद यह दर्शाता है कि तरंग ऋणात्मक X-अक्ष (-x direction) के अनुदिश गमन कर रही है।
  • वैद्युत क्षेत्र Y-अक्ष के अनुदिश है। अतः चुंबकीय क्षेत्र Z-अक्ष (z-axis) के अनुदिश होगा।
Bz = 10⁻⁷ sin(2 × 10¹¹ t + 300 π x) टेसला (T)
प्र. 5 (क) सेल के आंतरिक प्रतिरोध से आप क्या समझते हैं? दिए गए परिपथ में प्रत्येक सेल के सिरों के बीच विभवांतर ज्ञात कीजिए। (अथवा: व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन शर्त स्थापित कीजिए।)

1. सेल का आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance):

जब किसी सेल की प्लेटों को तार द्वारा जोड़ा जाता है, तो सेल के भीतर उसके विद्युत अपघट्य (Electrolyte) का घोल धारा के प्रवाह में जो रुकावट डालता है, उसे सेल का आंतरिक प्रतिरोध (r) कहते हैं。

2. परिपथ आंकिक हल (Numerical Solution):

चित्र अनुसार घटक (Components): E₁ = 10 V (r₁ = 2 Ω), E₂ = 2 V (r₂ = 1 Ω), R₁ = 3 Ω, R₂ = 2 Ω।

  • दोनों सेलों के धनात्मक ध्रुव विपरीत जुड़े हैं, अतः प्रभावी e.m.f. (Enet) = E₁ – E₂ = 10 – 2 = 8 V
  • परिपथ का कुल प्रतिरोध (Rnet) = r₁ + r₂ + R₁ + R₂ = 2 + 1 + 3 + 2 = 8 Ω
  • परिपथ में प्रवाहित मुख्य धारा I = Enet / Rnet = 8 V / 8 Ω = 1 एम्पीयर (A)

सेल के सिरों का विभवांतर (Terminal Voltage):

  • सेल 1 (10 V – डिस्चार्ज हो रहा है): V₁ = E₁ – I r₁ = 10 – (1 × 2) = 8 वोल्ट (V)
  • सेल 2 (2 V – चार्ज हो रहा है): V₂ = E₂ + I r₂ = 2 + (1 × 1) = 3 वोल्ट (V)
💡 Tips: अथवा विकल्प वाले व्हीटस्टोन सेतु के लिए किरचॉफ के दूसरे नियम का प्रयोग कर बन्द पाश ABCD में P/Q = R/S सिद्ध करें।
प्र. 5 (ख) खगोलीय दूरदर्शी द्वारा अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बनने का विवरण दीजिए तथा इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र लिखिए।

1. संरचना एवं प्रतिबिंब का बनना (Working & Ray Diagram Description):

खगोलीय दूरदर्शी में दो उत्तल लेंस होते हैं — अभिदृश्यक (Objective Lens, Lo) तथा नेत्रिका (Eyepiece, Le)।

  • अनंत पर स्थित वस्तु से आने वाली समांतर किरणें अभिदृश्यक द्वारा उसके मुख्य फोकस Fo पर एक वास्तविक, उल्टा तथा छोटा प्रतिबिंब A’B’ बनाती हैं।
  • यह प्रतिबिंब A’B’ नेत्रिका के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है।
  • नेत्रिका को इस प्रकार समायोजित किया जाता है कि A’B’ इसके फोकस Fe तथा प्रकाशिक केंद्र के बीच आ जाए, जिससे अंतिम प्रतिबिंब A”B” स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D = 25 cm) पर बड़ा, आभासी और उल्टा बनता है।

2. आवर्धन क्षमता का सूत्र (Magnification Formula):

m = – ( fo / fe ) × [ 1 + ( fe / D ) ]

दूरदर्शी की कुल नली की लंबाई L = fo + ue होती है।

प्र. 5 (ग) प्रकाश वैद्युत प्रभाव के प्रयोग में प्राप्त प्रेक्षण: (i) आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ = 1.98 × 10⁻⁷ m, (ii) संस्तब्ध विभव V₀ = 2.5 V। फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा तथा धातु का कार्यफलन ज्ञात कीजिए।

दिया है (Given): λ = 1.98 × 10⁻⁷ m, संस्तब्ध (निरोधी) विभव V₀ = 2.5 V

1. अधिकतम गतिज ऊर्जा (Maximum Kinetic Energy, Kmax):

Kmax = e × V₀ = 1.6 × 10⁻¹⁹ C × 2.5 V = 4.0 × 10⁻¹⁹ जूल (J) = 2.5 eV

2. आपतित फोटॉन की ऊर्जा (Photon Energy, E):

E = (h × c) / λ = (6.63 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) / (1.98 × 10⁻⁷)

E = (1.989 × 10⁻²⁵) / (1.98 × 10⁻⁷) = 1.0045 × 10⁻¹⁸ J ≈ 6.28 eV

3. कार्यफलन की गणना (Work Function, W):

आइंस्टीन के प्रकाश वैद्युत समीकरण E = W + Kmax से:

W = E – Kmax = 6.28 eV – 2.5 eV = 3.78 eV = 6.048 × 10⁻¹⁹ जूल (J)
प्र. 5 (घ) हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोहर की तीनों परिकल्पनाएँ (Postulates) लिखिए एवं समझाइए।

नील्स बोहर की तीन मुख्य परिकल्पनाएँ:

  • 1. स्थायी कक्षा की अवधारणा (Stationary Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित अवीकिरण कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (Angular Momentum, L) h/2π का पूर्ण गुणज होता है।
    L = m v r = (n h) / (2π) [जहाँ n = 1, 2, 3…]
  • 2. अभिकेंद्र बल (Centripetal Force): इलेक्ट्रॉन को वृत्ताकार कक्षा में घूमने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल, नाभिक (प्रोटॉन) तथा इलेक्ट्रॉन के बीच लगने वाले स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Coulomb Force) से प्राप्त होता है।
    (m v² / r) = [ 1 / (4π ε₀) ] × (e² / r²)
  • 3. आवृत्ति नियम (Frequency Condition): स्थायी कक्षा में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करता। जब इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षा (E₂) से निम्न कक्षा (E₁) में कूदता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन फोटॉन के रूप में होता है।
    E₂ – E₁ = h ν
प्र. 5 (ङ) ₆¹²C की प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा की गणना कीजिए। दिया है: ₆¹²C का द्रव्यमान = 12.0038 amu, प्रोटॉन = 1.0081 amu, न्यूट्रॉन = 1.0090 amu।

घटकों का विश्लेषण: ₆¹²C नाभिक में 6 प्रोटॉन तथा (12 – 6) = 6 न्यूट्रॉन हैं। कुल न्यूक्लियॉन = 12।

  • 6 प्रोटॉनों का द्रव्यमान = 6 × 1.0081 amu = 6.0486 amu
  • 6 न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान = 6 × 1.0090 amu = 6.0540 amu
  • न्यूक्लियॉनों का कुल द्रव्यमान = 6.0486 + 6.0540 = 12.1026 amu
  • दिया गया नाभिक का द्रव्यमान = 12.0038 amu

द्रव्यमान क्षति (Mass Defect, Δm):

Δm = 12.1026 – 12.0038 = 0.0988 amu

कुल बंधन ऊर्जा (Total Binding Energy):

E = Δm × 931.5 MeV = 0.0988 × 931.5 MeV = 92.0322 MeV

प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon):

प्रति न्यूक्लियॉन B.E. = 92.0322 MeV / 12 = 7.669 MeV/न्यूक्लियॉन (अथवा ≈ 7.67 MeV)

खण्ड ‘य’ (Section E) – दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्र. 6 (मुख्य) स्थिरवैद्युतिकी में गॉस की प्रमेय (Gauss’s Theorem) लिखिए एवं सिद्ध कीजिए। इसकी सहायता से एकसमान रूप से आवेशित अनन्त लम्बाई के सीधे तार के निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

1. गॉस की प्रमेय का कथन (Statement):

किसी बंद पृष्ठ (Closed Surface) से होकर गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स (Electrostatic Flux, ΦE), उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध (Enclosed) कुल परिद्ध आवेश (Q) का 1/ε₀ गुना होता है।

ΦE = ∫ E · dA = Q / ε₀

2. उपपत्ति (Proof of Gauss’s Law):

माना O बिंदु पर एक बिंदु आवेश +q रखा है तथा r त्रिज्या के एक गोले का गॉसियन पृष्ठ खींचते हैं।

  • गोलीय पृष्ठ पर बिंदु P पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता: E = [ 1 / (4π ε₀) ] × (q / r²)
  • अल्पांश क्षेत्रफल dA से गुजरने वाला फ्लक्स: dΦE = E · dA = E dA cos(0°) = E dA
  • सम्पूर्ण गोले के पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स: ΦE = ∫ E dA = E ∫ dA
  • चूँकि गोले का कुल पृष्ठ क्षेत्रफल ∫ dA = 4π r² होता है:
  • ΦE = [ 1 / (4π ε₀) × (q / r²) ] × (4π r²) = q / ε₀ (इति सिद्धम्)

3. अनन्त लम्बाई के आवेशित तार के कारण वैद्युत क्षेत्र (Application):

माना तार का रेखीय आवेश घनत्व (Linear Charge Density) λ है। r दूरी पर l लम्बाई का बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ (Cylindrical Gaussian Surface) लेते हैं।

  • बेलनाकार पृष्ठ के दोनों समतल वृत्तीय सिरों पर E और dA लंबवत (θ = 90°) हैं, अतः इनसे गुजरने वाला फ्लक्स शून्य होगा।
  • वक्र पृष्ठ (Curved Surface) पर E और dA की दिशा समान (θ = 0°) है।
  • वक्र पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स ΦE = E × (2π r l)
  • गॉस की प्रमेय से: ΦE = Q / ε₀ = (λ l) / ε₀ (चूँकि Q = λ l)
  • E × (2π r l) = (λ l) / ε₀
E = λ / (2π ε₀ r) या E = [ 1 / (4π ε₀) ] × (2λ / r)
💡 Tips: निगमन करते समय चित्र का विवरण एवं गॉसियन पृष्ठ की प्रकृति (बेलनाकार) का उल्लेख करना अत्यंत आवश्यक है।
प्र. 6 (अथवा) समांतर पट्ट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) की धारिता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए, जब पट्टियों के बीच t मोटाई की परावैद्युत (Dielectric) पट्टी रखी हो।

उपपत्ति (Derivation):

माना संधारित्र की पट्टियों का क्षेत्रफल A तथा उनके बीच की दूरी d है। पट्टियों पर आवेश +q एवं -q है (पृष्ठ आवेश घनत्व σ = q / A)। पट्टियों के बीच t मोटाई की K परावैद्युतांक वाली पट्टी रखी है।

  • पट्टियों के बीच निर्वात/वायु की मोटाई = (d – t)
  • परावैद्युत माध्यम की मोटाई = t
  • वायु में वैद्युत क्षेत्र: E₀ = σ / ε₀ = q / (A ε₀)
  • परावैद्युत पट्टी में वैद्युत क्षेत्र: E = σ / (K ε₀) = q / (K A ε₀)

पट्टियों के बीच कुल विभवांतर (V):

V = E₀ × (d – t) + E × t = [ q / (A ε₀) ] × (d – t) + [ q / (K A ε₀) ] × t

सामान्य पद q / (A ε₀) उभयनिष्ठ (Common) लेने पर:

V = [ q / (A ε₀) ] × [ (d – t) + (t / K) ]

धारिता की परिभाषा C = q / V से:

C = (A ε₀) / [ (d – t) + (t / K) ]

विशेष स्थितियाँ (Special Cases):

  • यदि पट्टी पूरी दूरी में भरी हो (t = d): C = K A ε₀ / d
  • यदि धातु की पट्टी रखी हो (K = ∞): C = A ε₀ / (d – t)
प्र. 7 (मुख्य) दो समांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल (F/L = μ₀ I₁ I₂ / 2π r) के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। इसके आधार पर 1 एम्पीयर (1 Ampere) की मानक परिभाषा दीजिए।

1. बल के व्यंजक का निगमन (Derivation):

माना दो सीधे समांतर चालक तार A व B परस्पर r दूरी पर निर्वात में रखे हैं, जिनमें क्रमशः I₁ तथा I₂ धाराएँ बह रही हैं।

  • चालक A में बहती धारा I₁ के कारण चालक B के किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र: B₁ = (μ₀ I₁) / (2π r)
  • चुंबकीय क्षेत्र B₁ में स्थित चालक B की L लंबाई पर लगने वाला लॉरेंज बल: F = I₂ L B₁ sin(90°)
  • B₁ का मान रखने पर: F = I₂ L × [ (μ₀ I₁) / (2π r) ]

चालक की प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाला बल (F/L):

F / L = (μ₀ / 2π) × (I₁ I₂ / r) न्यूटन/मीटर

धारा की दिशा समान होने पर आकर्षण बल (Attraction) तथा दिशा विपरीत होने पर प्रतिकर्षण बल (Repulsion) लगता है।

2. 1 एम्पीयर की मानक परिभाषा (Standard Definition of 1 Ampere):

यदि सूत्र में I₁ = I₂ = 1 A, r = 1 m तथा μ₀/2π = 2 × 10⁻⁷ N/A² रखें:

F / L = 2 × 10⁻⁷ न्यूटन/मीटर

परिभाषा: 1 एम्पीयर वह नियत धारा है जो निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर रखे दो अनन्त लम्बाई के सीधे समांतर चालकों में प्रवाहित करने पर उनके बीच प्रति मीटर लम्बाई पर 2 × 10⁻⁷ न्यूटन का आकर्षण या प्रतिकर्षण बल उत्पन्न करती है।

प्र. 7 (अथवा) श्रेणी L-C-R प्रत्यावर्ती परिपथ के लिए फेजर आरेख (Phasor Diagram) खींचकर परिपथ की प्रतिबाधा (Impedance) एवं कलान्तर (Phase Difference) का सूत्र प्राप्त कीजिए।

1. फेजर आरेख एवं विभवांतर विश्लेषण:

श्रेणी परिपथ में धारा I समान होती है। प्रेरकत्व का विभवांतर VL धारा से 90° अग्रगामी, धारिता का विभवांतर VC धारा से 90° पश्चगामी तथा प्रतिरोध का विभवांतर VR धारा की कला में होता है।

  • परिणामी परिणामी कलातीत विभवांतर = (VL – VC)
  • प्रतिरोध विभवांतर = VR
  • पाइथागोरस प्रमेय से परिणामी वोल्टता: V² = VR² + (VL – VC)²
  • मान रखने पर: V² = (I R)² + (I XL – I XC)² = I² [ R² + (XL – XC)² ]

2. प्रतिबाधा का सूत्र (Impedance, Z):

Z = V / I = √[ R² + (XL – XC)² ] = √[ R² + (ωL – 1/ωC)² ]

3. कलान्तर का सूत्र (Phase Angle, ϕ):

tan(ϕ) = (VL – VC) / VR = (XL – XC) / R = (ωL – 1/ωC) / R
प्र. 8 (मुख्य) हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धांत (Huygens’ Secondary Wavelets Theory) के आधार पर प्रकाश के अपवर्तन के नियमों (Snell’s Law) की व्याख्या कीजिए।

1. अपवर्तन का निगमन (Derivation of Refraction):

माना एक समतल तरंगाग्र (Plane Wavefront) AB दो माध्यमों को पृथक करने वाले पृष्ठ ZZ’ पर आपतन कोण i पर आपतित होता है। प्रथम माध्यम में प्रकाश की चाल v₁ तथा द्वितीय माध्यम में v₂ है।

  • तरंगाग्र के बिंदु B को पृष्ठ के बिंदु A’ तक पहुँचने में लगा समय t है, अतः BA’ = v₁ t।
  • इतने ही समय t में बिंदु A से चलने वाली द्वितीयक तरंगिका द्वितीय माध्यम में दूरी AB’ = v₂ t तय करती है।
  • A’B’ अपवर्तित तरंगाग्र (Refracted Wavefront) है तथा अपवर्तन कोण r है।

समकोण त्रिभुज ΔABA’ तथा ΔAA’B’ से:

  • sin(i) = BA’ / AA’ = (v₁ t) / AA’
  • sin(r) = AB’ / AA’ = (v₂ t) / AA’

भाग देने पर:

sin(i) / sin(r) = (v₁ t) / (v₂ t) = v₁ / v₂ = ₁n₂ (नियतांक)

यह स्नेल का नियम (Snell’s Law) है। चूँकि आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही समतल में होते हैं, अतः अपवर्तन के दोनों नियमों की पुष्टि होती है।

प्र. 8 (अथवा) यंग के द्वि-झिरी (Young’s Double Slit) प्रयोग में दीप्त एवं अदीप्त फ्रिंजों की चौड़ाई के लिए व्यंजक (β = λ D / d) व्युत्पन्न कीजिए।

व्युत्पत्ति (Derivation):

माना दो संकीर्ण झिरियों S₁ व S₂ के बीच की दूरी d है तथा पर्दे की दूरी D है। पर्दे पर केंद्रीय बिंदु O से x दूरी पर स्थित बिंदु P पर पथांतर S₂P – S₁P = (x d) / D होता है।

1. दीप्त फ्रिंजों की स्थिति (Bright Fringes):

संपोषी व्यतिकरण हेतु पथांतर (x d) / D = m λ ⇒ xm = (m λ D) / d (जहाँ m = 0, 1, 2…)

दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी (फ्रिंज चौड़ाई, β):

β = xm+1 – xm = [ (m + 1) λ D / d ] – [ m λ D / d ] = λ D / d

2. अदीप्त फ्रिंजों की स्थिति (Dark Fringes):

विनाशी व्यतिकरण हेतु पथांतर (x d) / D = (2m – 1) λ / 2। इससे भी क्रमागत अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी β = λ D / d ही प्राप्त होती है।

प्र. 9 (मुख्य) p-n संधि डायोड (p-n Junction Diode) की कार्यविधि अग्र एवं उत्क्रम अभिनति में समझाइए। परिपथ आरेख बनाकर p-n संधि डायोड का पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier) के रूप में प्रयोग समझाइए।

1. अभिनति प्रकार (Biasing Types):

  • अग्र अभिनति (Forward Bias): p-क्षेत्र को बैटरी के धन ध्रुव (+) तथा n-क्षेत्र को ऋण ध्रुव (-) से जोड़ा जाता है। अवक्षय परत (Depletion Layer) की चौड़ाई घटती है और परिपथ में मुख्य धारा (mA) बहती है।
  • उत्क्रम अभिनति (Reverse Bias): p-क्षेत्र को ऋण (-) तथा n-क्षेत्र को धन (+) से जोड़ा जाता है। अवक्षय परत की चौड़ाई बढ़ती है और केवल नगण्य सूक्ष्म धारा (µA) बहती है।

2. पूर्ण तरंग दिष्टकारी कार्यविधि (Full Wave Rectifier Working):

इसमें मध्य-निकासी ट्रांसफॉर्मर (Center-Tap Transformer) तथा दो डायोड D₁ व D₂ का उपयोग किया जाता है।

  • प्रथम अर्धचक्र (Positive Half Cycle): सिरा A धनात्मक तथा B ऋणात्मक होता है। डायोड D₁ अग्र अभिनत होकर चालन करता है, जबकि D₂ उत्क्रम अभिनत रहता है। लोड RL में धारा X से Y की ओर बहती है।
  • द्वितीय अर्धचक्र (Negative Half Cycle): सिरा A ऋणात्मक तथा B धनात्मक होता है। डायोड D₂ अग्र अभिनत होकर चालन करता है तथा D₁ बंद रहता है। लोड RL में धारा पुनः X से Y की ओर ही बहती है।

अतः प्रत्यावर्ती धारा के दोनों अर्धचक्रों में लोड से एक ही दिशा में दिष्ट धारा प्राप्त होती है।

प्र. 9 (अथवा) नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) तथा नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की उदाहरण एवं संतुलित रासायनिक समीकरण सहित व्याख्या कीजिए।

1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission):

वह प्रक्रिया जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरैनियम-235) मंद गति के न्यूट्रॉन को अवशोषित कर लगभग दो बराबर हल्के नाभिकों में टूट जाता है तथा अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।

₀n¹ + ₉₂U²³⁵ ⟶ [₉₂U²³⁶] ⟶ ₅₆Ba¹⁴⁴ + ₃₆Kr⁸⁹ + 3 ₀n¹ + Q (200 MeV)

2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion):

वह प्रक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अति हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक) अत्यधिक उच्च ताप एवं दाब पर परस्पर संयुक्त होकर एक भारी एवं स्थायी नाभिक बनाते हैं।

₁H² (ड्यूटीरियम) + ₁H³ (ट्राइटियम) ⟶ ₂He⁴ (हीलीयम) + ₀n¹ + 17.6 MeV

सूर्य तथा तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन ही है।

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UP Board Class 10 Science Model Paper 2027: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं विज्ञान के आधिकारिक मॉडल पेपर का विस्तृत हल यहाँ उपलब्ध करा दिया है। छात्र मॉडल पेपर हल करने के बाद अपने उत्तरों की आसानी से जाँच कर सकते हैं और कठिन प्रश्नों के सटीक समाधान समझ सकते हैं। इसके अलावा, अभ्यास के लिए सीधे पीडीएफ (PDF) डाउनलोड करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

UP Board 10th Model Paper 2027 Solution PDF Download

UP Board Class 10 Science Detailed Solutions
CONCEPTUAL RATIONALE
जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में उपस्थित वर्षा की सूक्ष्म बूंदों पर आपतित होता है, तो ये बूंदें छोटे प्रिज्म (Prism) की भांति कार्य करती हैं। प्रकाश की किरणें सबसे पहले वायु से जल की बूंद में प्रवेश करते समय अपवर्तित (Refracted) होती हैं, फिर जल की बूंद के भीतर विभिन्न रंगों में विभक्त होकर वर्ण-विक्षेपित (Dispersed) होती हैं। तत्पश्चात बूंद की आंतरिक सतह से पूर्ण आंतरिक परावर्तित (Total Internally Reflected) होकर बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तित होती हैं [1]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) अपवर्तन, विक्षेपण तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन
STEP-BY-STEP EXPLANATION
अवतल दर्पण (Concave Mirror) के प्रतिबिम्ब निर्माण के नियमों के अनुसार [2]:
  1. जब वस्तु अनंत (Infinity) पर रखी होती है, तो प्रकाश की समानांतर किरणें फोकस पर मिलती हैं, जिससे प्रतिबिम्ब अत्यधिक छोटा तथा बिंदु आकार (Highly Diminished / Point-sized) बनता है। अतः X = अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार)।
  2. जब वस्तु वक्रता केंद्र C (Center of Curvature) पर रखी होती है, तो प्रतिबिम्ब भी C पर ही बनता है और इसका आकार वस्तु के बिल्कुल बराबर होता है। अतः Y = समान आकार (Same size)।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (D) X- अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार), Y- समान आकार
FORMULA USED
  1. श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance in Series): Req = R1 + R2
  2. ओम का नियम (Ohm’s Law): I = V / Req
  3. जूल का तापन नियम (Joule’s Law of Heating): H = I2 × R × t
STEP-BY-STEP SOLUTION
1. परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध (Req):
Req = 2 Ω + 4 Ω = 6 Ω
2. परिपथ में प्रवाहित कुल धारा (I):
I = VReq = 6 V6 Ω = 1 A
3. श्रेणीक्रम संयोजन में दोनों प्रतिरोधकों में समान धारा (1 A) प्रवाहित होगी। अतः 4 Ω वाले प्रतिरोधक में 5 सेकंड में क्षय हुई ऊष्मा (H):
H = (1 A)2 × 4 Ω × 5 s = 1 × 4 × 5 = 20 Joule (J)
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (C) 20 J
FORMULA USED
  1. रेखीय आवर्धन (Linear Magnification): m = h2h1 = –vu
  2. दर्पण सूत्र (Mirror Formula): 1f = 1v + 1u
STEP-BY-STEP SOLUTION
1. आवर्धन सूत्र से वस्तु की दूरी (u) ज्ञात करना:
m = -0.51.0 = -0.5
–vu = -0.5 ⇒ -(-30)u = -0.5 ⇒ 30u = -0.5
u = 30-0.5 = -60 cm
2. दर्पण सूत्र का प्रयोग करके फोकस दूरी (f) ज्ञात करना [3]:
1f = 1v + 1u = 1-30 + 1-60 = -2 – 160 = -360 = –120
f = -20 cm
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) -20 cm
CONCEPTUAL RATIONALE
वैद्युत उपकरणों के सही संयोजन के नियम [3, 4]:
  1. अमीटर (Ammeter): इसे सदैव मुख्य परिपथ के साथ श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है तथा इसका धनात्मक ध्रुव (+) बैटरी के धनात्मक सिरे से जुड़ना चाहिए।
  2. वोल्टमीटर (Voltmeter): इसे विभवांतर मापने के लिए प्रतिरोधक के साथ समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है और इसका धनात्मक ध्रुव (+) भी बैटरी के धनात्मक सिरे की ओर होता है।
परिपथ चित्र (ii) में अमीटर श्रेणीक्रम में तथा वोल्टमीटर समांतर क्रम में सही ध्रुवता (Polarity) के साथ संयोजित हैं।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) (ii)
CONCEPTUAL RATIONALE
धारावाही परिनालिका (Current-carrying Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (Magnetic Field Lines) समानांतर तथा समान दूरी पर स्थित सीधी रेखाएं होती हैं। यह इस बात का संकेत है कि परिनालिका के अंदर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान (Uniform Magnetic Field) रहता है [3]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (C) सभी बिंदुओं पर समान होती है
CONCEPTUAL RATIONALE
वाहनों की हेडलाइटों तथा टॉर्चों में अवतल दर्पण परावर्तक (Concave Reflector) के रूप में कार्य करता है। जब प्रकाश स्रोत (बल्ब) को अवतल परावर्तक के फोकस के अत्यधिक निकट (Very close to focus) रखा जाता है, तो परावर्तन के पश्चात प्रकाश का एक शक्तिशाली समानांतर किरण-पुंज (Strong Parallel Beam) प्राप्त होता है [4]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) परावर्तक के फोकस के अत्यधिक निकट
CONCEPTUAL RATIONALE
1. इस अभिक्रिया में अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है, अतः यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) है [4]।
2. अभिक्रिया के फलस्वरूप बेरियम सल्फेट (BaSO4) का एक अघुलनशील श्वेत अवक्षेप (White Precipitate) बनता है, इसलिए यह एक अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) भी है [4]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (C) (ii) तथा (iv)
STEP-BY-STEP EXPLANATION
सही रासायनिक सूत्रों का मिलान इस प्रकार है [5]:
  • 1. विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder): कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड → CaOCl2 (iii)
  • 2. बेकिंग सोडा (Baking Soda): सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट → NaHCO3 (iv)
  • 3. धोने का सोडा (Washing Soda): सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट → Na2CO3 · 10H2O (i)
  • 4. प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris): कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट → CaSO4 · ½H2O (ii)
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (A) 1-(iii), 2-(iv), 3-(i), 4-(ii)
CONCEPTUAL RATIONALE
एथेन (Ethane – C2H6) के एक अणु में दो कार्बन परमाणु (C) परस्पर एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करके एकल सहसंयोजी आबंध (Single Covalent Bond) बनाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन-तीन हाइड्रोजन परमाणुओं (H) के साथ इलेक्ट्रॉन युग्म का साझा करता है [6]। चित्र (B) एथेन की सही बिंदु संरचना दर्शाता है।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) चित्र B
CONCEPTUAL RATIONALE
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उच्च सांद्रता के कारण वे ऊष्मा की उत्तम चालक होती हैं। सभी धातुओं में सिल्वर (Silver – Ag) ऊष्मा का सर्वोत्तम चालक है, तथा इसके पश्चात कॉपर (Copper – Cu) का स्थान आता है [6]। (मर्करी और लेड ऊष्मा के तुलनात्मक रूप से कुचालक हैं)।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (A) सिल्वर तथा कॉपर
CONCEPTUAL RATIONALE
चाँदी (Silver – Ag) की वस्तुएं वायुमण्डलीय सल्फर/हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) गैस के साथ संक्षारित (Corroded) होकर काले रंग के सिल्वर सल्फाइड (Ag2S) की पतली परत बना लेती हैं [7]। अतः अभिकथन और कारण दोनों पूर्णतः सही हैं।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (A) अभिकथन और कारण दोनों सही हैं
CONCEPTUAL RATIONALE
यह साल्वे प्रक्रम (Solvay Process) द्वारा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (बेकिंग सोडा – NaHCO3) के निर्माण की रासायनिक अभिक्रिया है। इस प्रक्रिया में सह-उत्पाद के रूप में अमोनियम क्लोराइड (NH4Cl) प्राप्त होता है, अतः यौगिक X = NH4Cl [5, 7]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) NH4Cl
CONCEPTUAL RATIONALE
इंसुलिन, टेस्टोस्टेरोन तथा एड्रेनेलिन मानव शरीर में ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक यानी हॉर्मोन (Hormones) हैं [5]। इसके विपरीत, टाइलिन (Ptyalin/Salivary Amylase) लार में उपस्थित एक पाचक एंजाइम (Enzyme) है जो स्टार्च को माल्टोज़ में बदलता है। अतः टाइलिन अन्य तीनों से विषम है।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (C) टाइलिन
CONCEPTUAL RATIONALE
पत्तियों में रंध्र छिद्र (Stomatal Pore) का खुलना और बंद होना द्वार कोशिकाओं (Guard Cells) की स्फीति (Turgidity) पर निर्भर करता है। जब परासरण द्वारा जल द्वार कोशिकाओं में प्रवेश करता है, तो वे स्फीत (Swell) होकर वक्र हो जाती हैं जिससे छिद्र खुल जाता है। जब जल बाहर निकलता है, तो कोशिकाएं श्लथ (Shrink) हो जाती हैं और छिद्र बंद हो जाता है [5]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) कथन तथा कारण दोनों सही हैं
STEP-BY-STEP EXPLANATION
सही मिलान की व्याख्या [8]:
  • (i) तंत्रिका तंत्र: न्यूरॉन का संवेदी भाग द्रुमिका (Dendrite) है → (ब)
  • (ii) हृदय: मानव हृदय के मुख्य कोष्ठ अलिंद तथा निलय (Atrium & Ventricle) हैं → (अ)
  • (iii) छुईमुई: स्पर्श करने पर होने वाली गति स्पानुकुंचन (Nastic Movement) कहलाती है → (द)
  • (iv) एड्रेनेलिन हॉर्मोन: यह अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) से स्रावित होता है → (स)
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) (i)-ब, (ii)-अ, (iii)-द, (iv)-स
CONCEPTUAL RATIONALE
बीज के अंकुरण (Seed Germination) के विभिन्न भाग [8]:
  • भाग a: प्रांकुर (Plumule) – यह भावी प्ररोह (Shoot System) बनाता है।
  • भाग b: बीजपत्र (Cotyledon) – यह भ्रूण के लिए खाद्य भंडारण करता है।
  • भाग c: मूलांकुर (Radicle) – यह भावी जड़ (Root System) बनाता है।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (C) प्रांकुर, बीजपत्र और मूलांकुर
CONCEPTUAL RATIONALE
मेंडेल के प्रभाविता के नियम (Law of Dominance) के अनुसार, बीज का गोल आकार (R) झुर्रीदार आकार (r) पर तथा पीला रंग (Y) हरे रंग (y) पर पूर्णतः प्रभावी है [9]। इसलिए F1 पीढ़ी के सभी पौधे विषमयुग्मजी गोल और पीले (Round and Yellow) बीज वाले होंगे।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (A) गोल और पीले
CONCEPTUAL RATIONALE
खाद्य श्रृंखला (Food Chain) के विभिन्न पोषी स्तरों (Trophic Levels) में अजैव निम्नीकरणीय हानिकारक रसायनों (Non-biodegradable Pesticides) की सांद्रता में उत्तरोत्तर होने वाली वृद्धि को जैव आवर्धन (Biological Magnification) कहते हैं [9]।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (B) खाद्य श्रृंखला में पीडकनाशी एवं रसायनों का अत्यधिक संचित होना
CONCEPTUAL RATIONALE
मानव मादा जनन तंत्र के रेखाचित्र में संकेतांक ‘A’ पार्श्व में स्थित बादाम के आकार के प्राथमिक जननांग अंडाशय (Ovary) को प्रदर्शित करता है [9]। अंडाशय का मुख्य कार्य मादा युग्मक (अंडकोशिका/Egg) का निर्माण करना तथा एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्राव करना है।
FINAL ANSWER

सही विकल्प: (D) अंडाशय
FORMULA / RAY DIAGRAM RULES USED
उत्तल दर्पण (Convex Mirror) द्वारा प्रतिबिम्ब बनने के मुख्य नियम:
  1. मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित प्रकाश किरणें परावर्तन के पश्चात मुख्य फोकस F (Focus) से आती हुई प्रतीत होती हैं।
  2. वक्रता केंद्र C (Center of Curvature) की दिशा में आपतित किरण परावर्तन के बाद उसी मार्ग पर वापस लौट जाती है।
STEP-BY-STEP EXPLANATION
1. स्थिति 1 (जब बिंब अनंत पर स्थित हो):
  • प्रतिबिंब का स्थान (Position): दर्पण के पीछे मुख्य फोकस F पर बनता है।
  • प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature): आभासी एवं सीधा (Virtual and Erect)।
  • प्रतिबिंब का आकार (Size): अत्यधिक छोटा अर्थात बिंदु आकार (Highly Diminished / Point-sized)।
2. स्थिति 2 (जब बिंब अनंत तथा ध्रुव P के बीच स्थित हो):
  • प्रतिबिंब का स्थान (Position): दर्पण के पीछे ध्रुव P तथा फोकस F के बीच बनता है।
  • प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature): आभासी एवं सीधा (Virtual and Erect)।
  • प्रतिबिंब का आकार (Size): बिंब (वस्तु) से छोटा (Diminished)।
FINAL ANSWER

निष्कर्ष: उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा एवं छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। अनंत पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब फोकस पर बिंदु रूप में तथा सीमित दूरी पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब P व F के मध्य वस्तु से छोटा बनता है।
(i) (क) वाक्य का संशोधन (Correction of Statement A):
  • त्रुटि (Error): दिए गए वाक्य में निकट दृष्टि दोष (Myopia) की परिभाषा गलत लिखी गई है।
  • वैज्ञानिक तथ्य: निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास की वस्तुएं तो स्पष्ट देख लेता है, परंतु दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता।
  • संशोधित सही वाक्य: “निकट दृष्टि दोषयुक्त (Myopic) व्यक्ति निकट रखी वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से देख सकता है, परंतु दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता।“
(i) (ख) वाक्य का संशोधन (Correction of Statement B):
  • त्रुटि (Error): प्रिज्म में सभी रंगों का विचलन समान नहीं होता।
  • वैज्ञानिक तथ्य: वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) के कारण अलग-अलग तरंगदैर्घ्य (Wavelength) के प्रकाश अलग-अलग कोणों पर विचलित होते हैं। बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक तथा लाल रंग का विचलन सबसे कम होता है।
  • संशोधित सही वाक्य: “किसी प्रिज्म से गुजरने के पश्चात, प्रकाश के विभिन्न वर्ण आपतित किरण के सापेक्ष अलग-अलग (विभिन्न) कोणों पर झुकते हैं। बैंगनी वर्ण सबसे अधिक तथा लाल वर्ण सबसे कम कोण पर झुकता है।“
(ii) आयताकार काँच के स्लैब से अपवर्तन (Refraction through Rectangular Glass Slab):
  • जब प्रकाश किरण वायु (विरल माध्यम / Rare Medium) से काँच (सघन माध्यम / Dense Medium) में प्रवेश करती है, तो यह अभिलंब (Normal) की ओर झुकती है (i > r)।
  • जब प्रकाश किरण काँच से पुनः वायु में निकलती है, तो यह अभिलंब से दूर हटती है।
  • निर्गत किरण (Emergent Ray) आपतित किरण (Incident Ray) के समानांतर (Parallel) होती है, परंतु इसमें पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement) उत्पन्न होता है।
FINAL ANSWER

दोनों वाक्यों का सही वैज्ञानिक रूप ऊपर स्पष्ट कर दिया गया है। काँच के स्लैब में निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर निकलती है।
FORMULA USED
  1. विद्युत सामर्थ्य/ऊष्मा सूत्र (Heat-Power Relation): H = P · t = (V2 / R) · t
  2. विभवांतर सूत्र (Potential Difference Formula): V = √(H · R / t)
STEP-BY-STEP SOLUTION
1. प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा यानी विद्युत शक्ति (P) की गणना:
P = Ht = 100 J1 s = 100 W (Watt)
2. शक्ति एवं विभवांतर के संबंध P = V2 / R द्वारा विभवांतर (V) ज्ञात करना:
100 = V24 Ω
V2 = 100 × 4 = 400
V = √400 = 20 V
(वैकल्पिक विधि: H = I2Rt ⇒ 100 = I2 × 4 × 1 ⇒ I = 5 A. इसके बाद V = I × R = 5 × 4 = 20 V)।
FINAL ANSWER

प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर (Potential Difference, V) = 20 V (वोल्ट)
1. मुख्य अवयव (Key Components):
  • विद्युन्मय तार (Live Wire): लाल रोधन (Red Insulation) युक्त, जो 220 V के उच्च विभव पर होता है।
  • उदासीन तार (Neutral Wire): काला रोधन (Black Insulation) युक्त, जो 0 V विभव पर होता है।
  • भूसंपर्क तार (Earth Wire): हरा रोधन (Green Insulation) युक्त, जो सुरक्षा हेतु भूमि में दबी तांबे की प्लेट से जुड़ा होता है।
  • विद्युत मीटर एवं बोर्ड फ्यूज/MCB: मुख्य आपूर्ति लाइन में लगे होते हैं।
2. परिपथ का वर्णन एवं विशेषताएं (Circuit Features):
  • समांतर क्रम संयोजन (Parallel Connection): घरेलू परिपथ में सभी उपकरणों को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है ताकि प्रत्येक उपकरण को 220 V का समान विभवांतर मिले तथा एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण निर्बाध चलते रहें।
  • भूसंपर्कन (Earthing): धातु के आवरण वाले उपकरणों (जैसे गीजर, फ्रिज, प्रेस) में क्षरित धारा से विद्युत आघात (Electric Shock) से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • फ्यूज / MCB: अतिभारण (Overloading) तथा लघुपथन (Short Circuit) के समय धारा अत्यधिक बढ़ने पर पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है।
अथवा (OR)
OR QUESTION SOLUTION: विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
1. तापीय प्रभाव की परिभाषा (Definition):
जब किसी उच्च प्रतिरोध वाले चालक (जैसे नाइक्रोम तार) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक का प्रतिरोध विद्युत ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) में परिवर्तित कर देता है, जिससे चालक अत्यधिक गर्म हो जाता है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Joule’s Heating Effect) कहते हैं।
सूत्र: H = I2 · R · t = V · I · t = (V2 / R) · t
2. व्यावहारिक अनुप्रयोग (Practical Applications):
  1. विद्युत तापन उपकरण (Electric Heating Appliances): विद्युत हीटर, प्रेस (Electric Iron), गीजर तथा टोस्टर में उच्च प्रतिरोध व उच्च गलनांक वाली नाइक्रोम (Nichrome) मिश्रधातु की कुंडली का प्रयोग किया जाता है।
  2. विद्युत बल्ब (Electric Bulb): बल्ब में अत्यधिक उच्च गलनांक (3380°C) वाली टंगस्टन (Tungsten) धातु का फिलामेंट लगाया जाता है, जो गर्म होकर तीव्र प्रकाश उत्सर्जित करता है।
  3. विद्युत फ्यूज (Electric Fuse): परिपथ सुरक्षा हेतु श्रेणीक्रम में कम गलनांक वाली मिश्रधातु (टिन व लेड) का फ्यूज तार लगाया जाता है, जो अतिप्रवाह (Overcurrent) पर पिघलकर परिपथ की रक्षा करता है।
FINAL ANSWER

खण्ड ‘ब’ का उपखण्ड (i) भौतिक विज्ञान सम्पूर्ण हल किया जा चुका है।
(i) लेड नाइट्रेट का तापीय अपघटन (Thermal Decomposition of Lead Nitrate):
2Pb(NO3)2(s) Δ→ 2PbO(s) + 4NO2(g)↑ + O2(g)↑
  • व्याख्या: लेड नाइट्रेट Pb(NO3)2 को गर्म करने पर यह अपघटित होकर पीले रंग का लेड ऑक्साइड (PbO), भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) गैस तथा ऑक्सीजन (O2) गैस बनाता है।
(ii) मैंगनीज डाइऑक्साइड की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया:
MnO2(s) + 4HCl(aq) → MnCl2(aq) + 2H2O(l) + Cl2(g)↑
  • व्याख्या: इस रेडॉक्स अभिक्रिया में मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) का अपचयन (Reduction) मैंगनीज क्लोराइड (MnCl2) में तथा HCl का ऑक्सीकरण (Oxidation) क्लोरीन गैस (Cl2) में होता है।
(iii) एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification Reaction):
CH3COOH(l) + C2H5OH(l) सांद्र H2SO4→ CH3COOC2H5(l) + H2O(l)
  • व्याख्या: एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic Acid) तथा एथेनॉल (Ethanol) अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके मीठी गंध वाला एस्टर यानी एथिल एथेनोएट (CH3COOC2H5) बनाते हैं।
(iv) कॉपर सल्फाइड की जारण/भर्जन अभिक्रिया (Roasting):
2Cu2S(s) + 3O2(g) Δ→ 2Cu2O(s) + 2SO2(g)↑
  • व्याख्या: क्युप्रस सल्फाइड (Cu2S) को वायु की उपस्थिति में गर्म (भर्जन) करने पर यह क्युप्रस ऑक्साइड (Cu2O) तथा सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस में परिवर्तित हो जाता है।
FINAL ANSWER

सभी 4 अभिक्रियाओं के पूर्ण संतुलित समीकरण (Balanced Chemical Equations) ऊपर प्रस्तुत किए गए हैं।
(i) कार्बन एवं उसके यौगिकों का ईंधन के रूप में उपयोग:
  • कार्बन तथा इसके हाइड्रोकार्बन यौगिक (जैसे मेथेन, एलपीजी, कोयला) वायु में दहन (Combustion) पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
  • इनका प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) उपयुक्त होता है और दहन के पश्चात कोई हानिकारक विषैला अवशेष नहीं बचता।
C + O2 → CO2 + ऊष्मा (Heat) + प्रकाश
(ii) आयनिक यौगिकों का उच्च गलनांक:
  • आयनिक यौगिकों में धनायन (Cations) तथा ऋणायन (Anions) परस्पर मजबूत स्थिरविद्युत आकर्षण बल (Strong Electrostatic Force of Attraction) द्वारा जुड़े होते हैं।
  • इस मजबूत अंतर-आयनिक आबंध (Inter-ionic Bond) को तोड़ने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसीलिए इनका गलनांक (Melting Point) एवं क्वथनांक अत्यधिक उच्च होता है।
(iii) लोहे की कील डुबोने पर कॉपर सल्फेट विलयन का रंग बदलना:
  • सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में आयरन (Fe), कॉपर (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
  • लोहा कॉपर सल्फेट विलयन से तांबे को विस्थापित (Displace) कर देता है, जिससे नीले रंग का कॉपर सल्फेट बदलकर हरे रंग के फेरस सल्फेट (FeSO4) में परिवर्तित हो जाता है।
Fe(s) + CuSO4(aq) [नीला] → FeSO4(aq) [हरा] + Cu(s)
(iv) मधुमक्खी के डंक में दर्द एवं जलन का कारण:
  • मधुमक्खी के डंक में मेथेनॉइक अम्ल (Methanoic Acid / Formic Acid – HCOOH) उपस्थित होता है।
  • जब मधुमक्खी काटती है, तो यह अम्ल त्वचा के अंदर प्रविष्ट हो जाता है, जिससे अम्ल के प्रभाव से दर्द एवं जलन होती है। (दुर्बल क्षार जैसे बेकिंग सोडा लगाने से अम्ल उदासीन हो जाता है)।
FINAL ANSWER

चारों रासायनिक परिघटनाओं के सटीक कारण एवं समीकरण स्पष्ट कर दिए गए हैं।
(i) द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction):
  • परिभाषा: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है और नए यौगिक बनते हैं, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
  • उदाहरण: सोडियम सल्फेट तथा बेरियम क्लोराइड के जलीय विलयन की अभिक्रिया:
Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s)↓ [श्वेत अवक्षेप] + 2NaCl(aq)
(ii) pH स्केल (pH Scale):
  • परिभाषा: किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता (H+ ion concentration) को मापने वाले स्केल को pH स्केल कहते हैं। (pH = -log[H+])।
  • पैमाना: इसका मान 0 से 14 तक होता है।
    • pH < 7 → अम्लीय विलयन (Acidic)
    • pH = 7 → उदासीन विलयन (Neutral, जैसे शुद्ध जल)
    • pH > 7 → क्षारीय विलयन (Basic)
(iii) मिसेल का निर्माण (Micelle Formation / Cleansing Action of Soap):
  • साबुन के अणु (C17H35COONa) के दो सिरे होते हैं:
    1. जलरागी सिरा (Hydrophilic Head): आयनिक सिरा जो जल में घुलनशील होता है।
    2. जलविरागी सिरा (Hydrophobic Tail): लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ जो तेल/मैले कणों में घुलनशील होती है।
  • जल में साबुन घोलने पर अणु इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि हाइड्रोकार्बन सिरा तेल के कण की ओर (केंद्र में) तथा आयनिक सिरा बाहर जल की ओर होता है। इस गोलिया संरचना को मिसेल (Micelle) कहते हैं, जो मैल को खींचकर जल में निलंबित कर देता है।
अथवा (OR)
OR QUESTION SOLUTION: गद्यांश पर आधारित प्रश्न
(i) सबसे नीचे स्थित धातुओं की क्रियाशीलता एवं उदाहरण:
  • सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुओं की क्रियाशीलता अत्यधिक कम (सबसे कम अभिक्रियाशील) होती है। ये धातुएं वायुमंडल से अभिक्रिया नहीं करतीं और भूपर्पटी में स्वतंत्र/मुक्तावस्था (Native State) में पाई जाती हैं।
  • दो धातुएं: गोल्ड/सोना (Gold – Au) एवं प्लैटिनम (Platinum – Pt) या सिल्वर/चाँदी (Ag)।
(ii) मध्य की धातुओं का भूपर्पटी में रूप:
  • सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएं (जैसे Fe, Zn, Pb) भूपर्पटी में मुख्यतः अपने ऑक्साइड (Oxides), सल्फाइड (Sulfides) या कार्बोनेट (Carbonates) अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
(iii) क्रियाशीलता के आधार पर धातुओं का वर्गीकरण:
  • अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं को 3 वर्गों (Three Categories) में विभाजित किया गया है:
    1. उच्च अभिक्रियाशील धातुएं (High Reactivity Metals – Na, K, Ca)
    2. मध्यम अभिक्रियाशील धातुएं (Medium Reactivity Metals – Fe, Zn, Pb)
    3. निम्न अभिक्रियाशील धातुएं (Low Reactivity Metals – Cu, Ag, Au)
(iv) सबसे ऊपर स्थित धातुएं एवं निष्कर्षण विधि:
  • दो धातुएं: सोडियम (Sodium – Na) तथा पोटैशियम (Potassium – K) या कैल्शियम (Ca)।
  • परिष्करण/निष्कर्षण विधि: अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण इन धातुओं के गलित क्लोराइडों का विद्युत अपघटनी अपचयन / परिष्करण (Electrolytic Reduction / Electrolysis) करके शुद्ध धातु कैथोड पर प्राप्त की जाती है।
FINAL ANSWER

खण्ड ‘ब’ का उपखण्ड (ii) रसायन विज्ञान सम्पूर्ण हल किया जा चुका है।
(i) पर्यावरण पर निर्भर लिंग निर्धारण वाले जीव (Non-Genetic Sex Determination):
  • कुछ सरीसृपों एवं जीवों में लिंग निर्धारण आनुवंशिक (Genes) न होकर पर्यावरणीय कारकों (जैसे निषेचित अंडे के ऊष्मायन तापमान / Incubation Temperature) पर निर्भर करता है।
  • दो उदाहरण: घोंघा (Snail) (जो अपना लिंग बदल सकता है) तथा कछुआ (Turtle) / छिपकली (Agama Lizard)।
(ii) जनकों से संतति में जाने वाला आनुवंशिक सेट (Genetic Material Transfer):
  • जनकों (माता-पिता) से संतति में डीएनए (DNA) अणुओं से बने गुणसूत्रों (Chromosomes) का जीन सेट स्थानांतरित होता है।
  • प्रत्येक जनक (माता एवं पिता) संतति को गुणसूत्रों का आधा सेट (Half set of Chromosomes – 23 गुणसूत्र) प्रदान करता है, जिससे संतति में द्विगुणित (2n = 46) स्थिति पुनर्स्थापित होती है।
(iii) सूरज के कथन की सत्यता एवं मानव में लिंग निर्धारण की व्याख्या:
  • हाँ, हम सूरज की बात से पूर्णतः सहमत हैं। मानवों में लिंग निर्धारण पूरी तरह से आनुवंशिक (Genetic Basis) होता है।
  • वैज्ञानिक स्पष्टीकरण:
    1. मानव कोशिका में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम (Autosomes) तथा 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) होते हैं।
    2. मादा (स्त्री) में दोनों लिंग गुणसूत्र समान यानी XX होते हैं, जबकि नर (पुरुष) में ये असमान यानी XY होते हैं।
    3. माता से सदैव X गुणसूत्र वाला युग्मक (अंडकोशिका) प्राप्त होता है। पिता से दो प्रकार के शुक्राणु बनते हैं – 50% X गुणसूत्र वाले तथा 50% Y गुणसूत्र वाले।
    4. यदि X-अंडकोशिका का निषेचन X-शुक्राणु से होता है, तो संतति पुत्री (XX) होती है। यदि Y-शुक्राणु से होता है, तो संतति पुत्र (XY) होता है।
FINAL ANSWER

निष्कर्ष: मानव में लिंग निर्धारण पिता के लिंग गुणसूत्र (X या Y) द्वारा आनुवंशिक रूप से तय होता है।
REPRODUCTIVE ORGANS OF FLOWER
  1. पुमंग (Androecium / Stamens) – नर जननांग: इसके दो मुख्य भाग होते हैं—
    • परागकोश (Anther): जिसमें परागकण (Pollen Grains) बनते हैं।
    • पुंतंतु (Filament): पतली डंडीनुमा संरचना।
  2. जायांग (Gynoecium / Pistil / Carpel) – मादा जननांग: इसके तीन मुख्य भाग होते हैं—
    • वर्तिकाग्र (Stigma): ऊपर चिपचिपा सिरा जहाँ परागकण उतरते हैं।
    • वर्तिका (Style): पतली लंबी नलिका।
    • अंडाशय (Ovary): निचला फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovule / Egg) उपस्थित होते हैं।
TYPES OF FLOWERS
  • 1. एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flower): वे पुष्प जिनमें केवल पुमंग (नर अंग) या केवल जायांग (मादा अंग) उपस्थित होता है।
    उदाहरण: पपीता (Papaya), तरबूज (Watermelon), मक्का (Maize)।
  • 2. उभयलिंगी पुष्प (Bisexual / Hermaphrodite Flower): वे पुष्प जिनमें नर जननांग (पुमंग) तथा मादा जननांग (जायांग) दोनों एक ही पुष्प में उपस्थित होते हैं।
    उदाहरण: गुड़हल (Hibiscus), सरसों (Mustard), मटर (Pea)।
FINAL ANSWER

पुष्प के नर अंग व मादा अंग की उपस्थिति के आधार पर एकलिंगी व उभयलिंगी वर्गीकरण स्पष्ट कर दिया गया है।
(i) चित्र की पहचान (Identification):
  • यह चित्र विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों (Ecosystems) जैसे—मैदानी (Forest), घास के मैदान (Grassland) तथा जलीय (Aquatic) पारिस्थितिक तंत्रों में जीवों के बीच खाद्य संबंधों को दर्शाने वाली आहार श्रृंखलाओं (Food Chains) एवं खाद्य जाल (Food Web) से संबंधित है।
(ii) प्रथम पोषी स्तर (First Trophic Level):
  • आहार श्रृंखला में प्रथम पोषी स्तर (T1) सदैव उत्पादक यानी स्वपोषी पौधे (Producers / Autotrophs – हरे पौधे व जल-पादप) होते हैं।
(iii) भोजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया (Process of Food Production):
  • उत्पादक (हरे पौधे) प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उपयोग करके सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज/कार्बोहाइड्रेट) में बदलते हैं और सभी उपभोक्ताओं के लिए भोजन निर्मित करते हैं।
6CO2 + 12H2O → (सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल) → C6H12O6 + 6O2 + 6H2O
(iv) आहार श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह व रूपांतरण (Energy Flow & Transformation):
  • ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (Unidirectional) होता है: सौर ऊर्जा → उत्पादक → शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) → मांसाहारी (द्वितीयक/तृतीयक उपभोक्ता)।
  • 10% नियम (Lindeman’s 10% Law): एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर में केवल 10% ऊर्जा ही कार्बनिक पदार्थ के रूप में स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीव की उपापचयी क्रियाओं (Respiration, Growth) तथा ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में व्यय हो जाती है।
FINAL ANSWER

आहार श्रृंखला में ऊर्जा सदैव स्वपोषियों से शाकाहारी व मांसाहारी जीवों की ओर एकदिशीय प्रवाहित होती है।
(i) पुनरुद्भवन (Regeneration):
  • व्याख्या: जब किसी पूर्ण रूप से विभेदित जीव का शरीर किसी दुर्घटना से कटकर कई टुकड़ों में टूट जाता है, तो इसकी विशिष्ट कोशिकाएं (Regenerative Cells) विभाजित होकर पुनः पूर्ण नए जीव का निर्माण कर लेती हैं।
  • उदाहरण: प्लेनेरिया (Planaria) तथा हाइड्रा (Hydra)।
(ii) मुकुलन (Budding):
  • व्याख्या: जीव के शरीर की सतह पर कोशिका विभाजन के कारण एक छोटा उभार बनता है जिसे मुकुल (Bud) कहते हैं। यह मुकुल निरंतर वृद्धि करके एक नन्हे जीव में बदल जाता है और परिपक्व होकर जनक के शरीर से अलग हो स्वतंत्र जीवन जी ता है।
  • उदाहरण: हाइड्रा (Hydra) तथा ईस्ट (Yeast)।
(iii) बीजाणु समासंघ (Spore Formation):
  • व्याख्या: कवकों के धागे जैसी संरचना (कवकजाल / Hyphae) के ऊपर गोल बीजाणुधानी (Sporangium) पाई जाती है। इसके अंदर गोल, सूक्ष्म एवं मोटे आवरण वाले बीजाणु (Spores) बनते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षित रहकर ये बीजाणु नम सतह मिलने पर अंकुरित होकर नया कवक बनाते हैं।
  • उदाहरण: राइजोपस / ब्रेड मोल्ड (Rhizopus / Bread Mould)।
अथवा (OR)
OR QUESTION SOLUTION: वृक्क में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
मानव वृक्क (Kidney) की कार्यात्मक इकाई वृक्काणु (नेफ्रॉन / Nephron) होती है। मूत्र निर्माण प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में संपन्न होती है:
  1. 1. अतिसूक्ष्म निस्पंदन (Glomerular Filtration / Ultrafiltration):
    • वृक्क धमनी की शाखाएं उच्च दाब के साथ रुधिर को केशिकागुच्छ (Glomerulus) में लाती हैं।
    • बोमेन सम्पुट (Bowman’s Capsule) की पतली भित्ति से जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण तथा यूरिया छनकर नेफ्रॉन की नलिका में आ जाते हैं (रक्त कोशिकाएं व प्रोटीन नहीं छनते)। इस छनित द्रव को प्रारंभिक निस्पंद कहते हैं।
  2. 2. वर्णात्मक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption):
    • जब यह प्रारम्भिक निस्पंद नेफ्रॉन की कुंडलित नलिका (Tubule) से गुजरता है, तो शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण (Na+, Cl–) तथा जल का रुधिर केशिकाओं द्वारा पुनः अवशोषण कर लिया जाता है।
  3. 3. नलिकाकार स्रावण (Tubular Secretion):
    • केशिकाओं में बचा अतिरिक्त अपशिष्ट (K+ आयन, H+ आयन तथा औषधियां) पुनः नेफ्रॉन नलिका में स्रावित कर दिया जाता है।
    • अंत में बचा हुआ सांद्रित द्रव मूत्र (Urine) कहलाता है, जिसमें मुख्य रूप से यूरिया, यूरिक अम्ल, जल व लवण होते हैं। यह मूत्र संग्राहक वाहिनी (Collecting Duct) से होता हुआ मूत्राशय (Urinary Bladder) में एकत्र हो जाता है।
FINAL ANSWER

सम्पूर्ण प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र (Model Paper 824) के सभी 31 प्रश्नों का 100% सटीक, चरणबद्ध एवं स्पष्ट हल पूर्ण हो गया है।

UP Board Class 10th Math Model Paper 2027: नए पैटर्न का डीप एनालिसिस (Deep Analysis)

UP Board Class 10th Math Model Paper 2027 का एकदम सटीक और पूरा एनालिसिस। जानें Objective, Short और Long Questions का Chapter-wise breakdown और गणित में 70/70 स्कोर करने का शानदार तरीका।

Key Highlights:

  • पूर्णांक और समय: गणित (Mathematics) की लिखित परीक्षा कुल 70 अंकों की होगी और इसे हल करने के लिए 3 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा।
  • दो खंडों (Sections) में पेपर: पूरा प्रश्नपत्र दो हिस्सों—खंड ‘अ’ (20 अंकों के Objective Questions) और खंड ‘ब’ (50 अंकों के Descriptive Questions) में बंटा है।
  • OMR शीट पर 20 सवाल: खंड ‘अ’ के सभी 20 बहुविकल्पीय सवालों के जवाब आपको OMR शीट पर नीले या काले बॉल पॉइंट पेन से भरने होंगे।
  • लॉन्ग सवालों में फुल चॉइस: 6-6 अंकों वाले सभी दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) सवालों में ‘अथवा’ (Internal Choice) दिया गया है, जिससे आपको अपनी पसंद का सवाल चुनने का मौका मिलता है।

UP Board Class 10 2027 Exam Pattern (पेपर पैटर्न)

यूपी बोर्ड कक्षा 10 2027 (UP Board 10th) गणित का पेपर मुख्य रूप से दो खण्डों (Section A और Section B) में विभाजित रहेगा। परीक्षा के लिए कुल 3 घंटे 15 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें से प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए दिए जाएंगे। यह पूरा लिखित पेपर 70 अंकों (Marks) का होगा।

Marks Distribution Table (मार्क्स डिस्ट्रीब्यूशन टेबल)

नीचे दी गई टेबल में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार के कितने प्रश्न आएंगे और उनके लिए कितने अंक निर्धारित हैं:

Marks Distribution Table
सेक्शन (Section) प्रश्न का प्रकार (Question Type) कुल प्रश्न (Total Questions) अंक प्रति प्रश्न (Marks/Q) कुल अंक (Total Marks)
खण्ड ‘अ’ (Section A) बहुविकल्पीय (MCQ) 20 1 20
खण्ड ‘ब’ (Section B) अति लघुउत्तरीय (Very Short) 6 (सभी अनिवार्य) 2 12
खण्ड ‘ब’ (Section B) लघुउत्तरीय (Short Answer) 5 (6 में से 5) 4 20
खण्ड ‘ब’ (Section B) दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) 3 (विकल्प के साथ) 6 18
कुल (Total) 70

Section A Analysis (खण्ड ‘अ’ का विश्लेषण)

पेपर का पहला खण्ड पूरी तरह से ऑब्जेक्टिव है।

  • इस खण्ड में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाएंगे।
  • प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा, जिसका मतलब है कि यह खण्ड कुल 20 मार्क्स का है।
  • छात्रों को इन सभी 20 प्रश्नों के उत्तर अपनी ओ०एम०आर० (OMR) शीट पर अंकित करने होंगे।
  • ध्यान रखें कि ओ०एम०आर० शीट पर एक बार उत्तर अंकित करने के बाद उसे काटने, इरेज़र (Eraser) या व्हाइटनर लगाने की अनुमति नहीं है।

Section B Analysis (खण्ड ‘ब’ का विश्लेषण)

पेपर का दूसरा खण्ड पूरी तरह से वर्णनात्मक (Descriptive) है और यह कुल 50 अंकों का है। इस खण्ड में कुल 5 मुख्य प्रश्न (प्रश्न संख्या 1 से 5) दिए गए हैं, जिनका विश्लेषण इस प्रकार है:

  • Question 1 (Very Short Answers): इस प्रश्न के अंतर्गत 6 उप-खण्ड (क से च तक) दिए गए हैं और सभी को हल करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न 2 मार्क्स का है, अतः यह हिस्सा कुल 12 अंकों (6 x 2) का होगा।
  • Question 2 (Short Answers): इस प्रश्न में कुल 6 उप-खण्ड दिए जाएंगे, जिनमें से छात्रों को किन्हीं 5 उप-खण्डों को हल करना होगा। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 मार्क्स मिलेंगे, जिससे यह भाग कुल 20 अंकों (5 x 4) का बन जाता है।
  • Question 3, 4, 5 (Long Answers): ये तीनों प्रश्न दीर्घ उत्तरीय हैं और प्रत्येक प्रश्न के लिए 6 मार्क्स निर्धारित हैं। इन तीनों प्रश्नों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें ‘अथवा’ (OR) का विकल्प दिया गया है, यानी आपको दो में से कोई एक प्रश्न चुनकर हल करना होगा। इस प्रकार यह भाग कुल 18 अंकों (3 x 6) का होगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: यूपी बोर्ड कक्षा 10 2027 के मैथ का पेपर कुल कितने मार्क्स का होगा?

उत्तर: यूपी बोर्ड कक्षा 10 2027 के गणित (Maths) का लिखित (थ्योरी) पेपर कुल 70 मार्क्स का होगा। (शेष 30 अंक विद्यालय स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन या प्रैक्टिकल के लिए होते हैं।)

Q2: मैथ के पेपर में कितने क्वेश्चन कितने मार्क्स के आएंगे?

उत्तर: यूपी बोर्ड 10th गणित के पेपर में अंकों का विभाजन इस प्रकार है: 1-1 अंक के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न आएंगे (कुल 20 अंक)। इसके अलावा, वर्णनात्मक खण्ड में 2 अंक वाले 6 प्रश्न (कुल 12 अंक), 4 अंक वाले 5 प्रश्न (कुल 20 अंक) और 6 अंक वाले 3 प्रश्न (कुल 18 अंक) पूछे जाएंगे।

Q3: मैथ के पेपर को सॉल्व करने के लिए कितने घंटे का समय मिलेगा और उसकी शिफ्ट क्या रहेगी?

उत्तर: परीक्षा को सॉल्व करने के लिए कुल 3 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा। इसमें से शुरुआत के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित होते हैं और 3 घंटे पेपर लिखने के लिए मिलते हैं। यूपी बोर्ड कक्षा 10 की परीक्षाएं आमतौर पर सुबह की शिफ्ट (Morning Shift) में ही आयोजित की जाती हैं।

Sidebar for Model Papers

UP Board Class 10 Science Model Paper 2027 PDF Download.

UP Board Class 10 Science Model Paper 2027: यूपी बोर्ड 10वीं विज्ञान के नए मॉडल पेपर का पूरा विश्लेषण। जानें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के चैप्टर-वाइज मार्क्स, OMR प्रश्न और 70 में से 70 स्कोर करने का सटीक फॉर्मूला।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • पूर्णांक और समय: कुल थ्योरी परीक्षा 70 अंकों की होगी जिसके लिए 3 घंटे 15 मिनट मिलेंगे (15 मिनट प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं)।
  • दो खंड और तीन उपखंड: पूरा पेपर खंड ‘अ’ (20 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न) और खंड ‘ब’ (50 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न) में बंटा है। दोनों खंडों में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के तीन अलग-अलग उपखंड (i), (ii), और (iii) शामिल हैं।
  • OMR शीट पर 20 प्रश्न: खंड ‘अ’ के सभी 20 बहुविकल्पीय प्रश्न OMR शीट पर नीले या काले बॉल पॉइंट पेन से भरने होंगे।
  • वर्णनात्मक भाग में बड़े विकल्प: खंड ‘ब’ के तीनों उपखंडों के 6-6 अंक वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में आंतरिक विकल्प (अथवा) दिया गया है।

UP Board Class 10 Science Model Paper 2027 Marks Distribution

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी किया गया कक्षा 10वीं विज्ञान का आधिकारिक मॉडल पेपर छात्रों के लिए सबसे सटीक मार्गदर्शक है। बोर्ड परीक्षा में 90+ या पूरे 70 में से 70 अंक लाने के लिए सिर्फ किताबें पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि भौतिक विज्ञान (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा रहे हैं।

मॉडल पेपर के अनुसार, परीक्षा कुल 70 अंकों की होगी और शेष 30 अंक स्कूल स्तर पर होने वाले प्रयोगात्मक व प्रोजेक्ट कार्य के लिए रहेंगे। प्रश्नपत्र को दो प्रमुख खंडों में बांटा गया है: खंड ‘अ’ (20 अंक) और खंड ‘ब’ (50 अंक)।

1. खंड ‘अ’ (बहुविकल्पीय प्रश्न) – 20 प्रश्न (20 अंक)

खंड ‘अ’ में कुल 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। इनके उत्तर OMR शीट पर देने होते हैं। इस खंड को तीन उपखंडों में व्यवस्थित किया गया है:

  • उपखंड (i) भौतिक विज्ञान (प्रश्न 1 से 7): कुल 7 प्रश्न (7 अंक)। इसमें प्रकाश का अपवर्तन/परावर्तन, दर्पण सूत्र एवं फोकस दूरी, विद्युत परिपथ, प्रतिरोध पर आधारित ऊष्मा क्षय तथा चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता जैसे व्यावहारिक प्रश्न शामिल हैं।
  • उपखंड (ii) रसायन विज्ञान (प्रश्न 8 से 13): कुल 6 प्रश्न (6 अंक)। इसमें रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (द्विविस्थापन, अवक्षेपण), अम्ल-क्षार व लवण के रासायनिक सूत्र (मिलान प्रश्न), कार्बनिक यौगिकों की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना, धातुओं की ऊष्मा चालकता तथा अभिकथन-तर्क (Assertion-Reason) वाले प्रश्न पूछे गए हैं।
  • उपखंड (iii) जीव विज्ञान व पर्यावरण (प्रश्न 14 से 20): कुल 7 प्रश्न (7 अंक)। इसमें जैव प्रक्रम (रंध्रों की कार्यप्रणाली), हार्मोन व अंतःस्रावी ग्रंथियां, मेंडल का आनुवंशिकता नियम (द्विसंकर संकरण), जनन तंत्र (चित्र आधारित पहचान) तथा आहार श्रृंखला में जैव आवर्धन से जुड़े प्रश्न दिए गए हैं।

2. खंड ‘ब’ (वर्णनात्मक प्रश्न) – 50 अंक का पूरा हिसाब

खंड ‘ब’ उत्तर-पुस्तिका (कॉपी) में हल करने वाला मुख्य भाग है। इसमें कुल 11 प्रश्न हैं जो तीन अलग-अलग उपखंडों में बंटे हैं।

छात्रों की सुविधा के लिए खंड ‘ब’ का विस्तृत अंक विभाजन और प्रश्नों का प्रकार नीचे तालिका में दिया गया है:

उपखंड / विषय प्रश्न संख्या प्रश्न का प्रकार एवं टॉपिक विकल्प (Options) कुल अंक
उपखंड (i)
भौतिक विज्ञान
प्रश्न 1 किरण आरेख एवं प्रतिबिम्ब स्थिति का वर्णन अनिवार्य 4 अंक (2+2)
प्रश्न 2 दृष्टि दोष व प्रिज्म तथा काँच स्लैब अपवर्तन चित्र अनिवार्य 4 अंक (2+2)
प्रश्न 3 विद्युत ऊष्मा एवं विभवांतर आंकिक प्रश्न (Numerical) अनिवार्य 4 अंक
प्रश्न 4 घरेलू विद्युत परिपथ अथवा धारा का तापीय प्रभाव 2 में से कोई 1 6 अंक (3+3)
उपखंड (ii)
रसायन विज्ञान
प्रश्न 5 संतुलित रासायनिक समीकरण लिखना अनिवार्य 4 अंक (1×4)
प्रश्न 6 वैज्ञानिक कारण स्पष्टीकरण (ईंधन, आयनिक यौगिक) अनिवार्य 4 अंक (1×4)
प्रश्न 7 संक्षिप्त टिप्पणी अथवा धातु निष्कर्षण केस-स्टडी 2 में से कोई 1 6 अंक
उपखंड (iii)
जीव विज्ञान
प्रश्न 8 मानव में लिंग निर्धारण व आनुवंशिकी अनिवार्य 4 अंक (1+1+2)
प्रश्न 9 पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का चित्र व व्याख्या अनिवार्य 4 अंक (2+2)
प्रश्न 10 आहार श्रृंखला आरेख आधारित प्रश्नोत्तर अनिवार्य 4 अंक (1×4)
प्रश्न 11 अलैंगिक जनन सचित्र अथवा नेफ्रॉन द्वारा मूत्र निर्माण 2 में से कोई 1 6 अंक
खंड ‘ब’ के सभी 11 प्रश्नों का कुल योग: 50 अंक

3. खंड ‘ब’ के प्रश्नों का विस्तृत विश्लेषण

  • उपखंड (i) भौतिक विज्ञान (कुल 18 अंक):
    • प्रश्न 1 (4 अंक): उत्तल/अवतल दर्पण द्वारा अनंत तथा निश्चित दूरी पर रखी वस्तु के किरण आरेख को देखकर प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार और प्रकृति लिखनी होती है।
    • प्रश्न 2 (4 अंक): निकट दृष्टि दोष और प्रिज्म द्वारा वर्ण-विक्षेपण के गलत कथनों को सही करना तथा काँच की पट्टी (ग्लास स्लैब) से पार्श्व विस्थापन का स्वच्छ चित्र बनाना।
    • प्रश्न 3 (4 अंक): जूल के तापन नियम पर आधारित सीधा गणितीय सवाल।
    • प्रश्न 4 (6 अंक – दीर्घ उत्तरीय): घरेलू वायरिंग (फ्यूज, अर्थिंग, श्रेणी/समांतर क्रम) का स्पष्ट आरेख या फिर विद्युत बल्ब/हीटर में तापीय प्रभाव के व्यावहारिक उपयोग। इसमें आंतरिक विकल्प मिलता है।
  • उपखंड (ii) रसायन विज्ञान (कुल 14 अंक):
    • प्रश्न 5 (4 अंक): लेड नाइट्रेट का तापन, मैंगनीज डाइऑक्साइड पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, एस्टरीकरण तथा कॉपर सल्फाइड के भर्जन की संतुलित रासायनिक अभिक्रियाएं लिखनी होती हैं।
    • प्रश्न 6 (4 अंक): चार तार्किक प्रश्नों के सटीक कारण बताने होते हैं—जैसे आयनिक यौगिकों के मजबूत बंध, कॉपर सल्फेट में लोहे की कील का रंग बदलना और मधुमक्खी के डंक का रासायनिक प्रभाव।
    • प्रश्न 7 (6 अंक – दीर्घ उत्तरीय): साबुन की मिसेल संरचना, pH मान और रासायनिक अभिक्रियाओं पर टिप्पणी लिखिए या फिर धातु सक्रियता श्रेणी पर दिए गए अनुच्छेद (Paragraph) को पढ़कर 4 प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
  • उपखंड (iii) जीव विज्ञान व पर्यावरण (कुल 18 अंक):
    • प्रश्न 8 (4 अंक): मानव में गुणसूत्र (XY और XX) के आधार पर लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को तार्किक रूप से समझाना।
    • प्रश्न 9 (4 अंक): पुष्प की लंबवत काट का स्पष्ट नामांकित चित्र (स्त्रीकेसर, पुंकेसर, अंडाशय) बनाना और पादप प्रजनन समझाना।
    • प्रश्न 10 (4 अंक): खाद्य श्रृंखला (घास, हिरण, बाघ / जलीय पारितंत्र) के चित्र को देखकर पोषी स्तर और 10% ऊर्जा प्रवाह के नियम पर आधारित प्रश्नों का उत्तर देना।
    • प्रश्न 11 (6 अंक – दीर्घ उत्तरीय): हाइड्रा/प्लेनेरिया में मुकुलन व पुनर्जनन का सचित्र वर्णन या मानव उत्सर्जन तंत्र में नेफ्रॉन (वृक्काणु) द्वारा मूत्र निर्माण की पूरी क्रियाविधि का नामांकित चित्र सहित वर्णन।

बोर्ड परीक्षा में 70/70 लाने की असरदार रणनीति

  1. उपखंडवार उत्तर लिखें: बोर्ड के स्पष्ट निर्देशानुसार प्रत्येक उपखंड को नए पृष्ठ से शुरू करें और एक उपखंड के सभी प्रश्नों को एक साथ हल करें।
  2. पेंसिल से नामांकित चित्र बनाएं: भौतिक विज्ञान में किरण आरेख और जीव विज्ञान में नेफ्रॉन या पुष्प की काट बनाते समय हमेशा नुकीली पेंसिल और स्पष्ट लेबलिंग का उपयोग करें।
  3. रासायनिक समीकरण संतुलित रखें: रसायन विज्ञान के उत्तरों में केवल शब्दों में न लिखें, साथ में अवस्था संकेत (s, l, g, aq) सहित संतुलित रासायनिक समीकरण जरूर जोड़ें।
  4. न्यूमेरिकल्स में मात्रक (Units) न भूलें: भौतिकी के आंकिक प्रश्नों को हल करते समय अंतिम उत्तर में मात्रक (जैसे वोल्ट, ओम, जूल) लिखना अनिवार्य है, अन्यथा पूरे अंक नहीं मिलते।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. यूपी बोर्ड 10वीं 2027 में विज्ञान का पेपर कुल कितने नंबर का होगा?

उत्तर: यूपी बोर्ड 10वीं विज्ञान की मुख्य बोर्ड लिखित परीक्षा कुल 70 अंकों की होती है। शेष 30 अंक विद्यालय स्तर पर आयोजित होने वाले प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट मूल्यांकन के आधार पर जोड़े जाते हैं।

Q2. विज्ञान के पेपर में OMR शीट पर कितने सवाल आएंगे और किस विषय से कितने होंगे?

उत्तर: खंड ‘अ’ में कुल 20 बहुविकल्पीय प्रश्न (20 अंक) OMR शीट पर हल करने के लिए आते हैं। इनमें भौतिक विज्ञान से 7 प्रश्न (प्रश्न 1 से 7), रसायन विज्ञान से 6 प्रश्न (प्रश्न 8 से 13) और जीव विज्ञान से 7 प्रश्न (प्रश्न 14 से 20) पूछे जाते हैं।

Q3. 10वीं विज्ञान की बोर्ड परीक्षा में न्यूमेरिकल (आंकिक प्रश्न) कितने नंबर का आता है?

उत्तर: वर्णनात्मक खंड ‘ब’ के भौतिक विज्ञान भाग में प्रश्न संख्या 3 सीधा 4 अंक का आंकिक प्रश्न पूछा जाता है (जैसे विद्युत धारा, प्रतिरोध या लेंस/दर्पण सूत्र से)। इसके अलावा 1-2 अंक के छोटे गणना वाले सवाल OMR वाले भाग में भी आ सकते हैं।

Q4. क्या विज्ञान के दीर्घ उत्तरीय (6 नंबर वाले) प्रश्नों में अथवा (Option) मिलता है?

उत्तर: हाँ, भौतिक विज्ञान के प्रश्न 4, रसायन विज्ञान के प्रश्न 7 और जीव विज्ञान के प्रश्न 11—इन तीनों 6-6 अंक वाले प्रश्नों में 1-1 वैकल्पिक प्रश्न (अथवा) दिया जाता है। छात्र अपनी पसंद के अनुसार किसी एक का उत्तर लिख सकते हैं।

Q5. क्या खंड ‘ब’ में उपखंडों को अलग-अलग पेज से शुरू करना जरूरी है?

उत्तर: हाँ, बोर्ड के आधिकारिक निर्देशानुसार खंड ‘ब’ के प्रत्येक उपखंड (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान) को नए पेज से शुरू करना चाहिए और एक उपखंड के सभी प्रश्नों के उत्तर एक साथ क्रम में लिखने चाहिए।

Math Sample Paper Class 10 2027 With Solutions PDF Download.

Mathematics Basic (241) – Solutions CBSE Board Exam 2026-27

MATHEMATICS BASIC (241) SAMPLE QUESTION PAPER

Class X (2026 – 27) – Detailed Solutions
Subject Code: 241 Maximum Marks: 80 Time Allowed: 3 Hours
SECTION A (MCQs & Assertion-Reason) 20 Marks
Q1. Real Numbers [1 Mark]

If HCF (2520, 6600) = 40 and LCM (2520, 6600) = 252 × k, then the value of k is:

(A) 165
(B) 1600
(C) 1625
(D) 1650
Correct Option: (D) 1650
Formula Used:

HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b

Step-by-Step Substitution & Calculation:
  • Given: a = 2520, b = 6600, HCF = 40, LCM = 252 × k
  • 40 × (252 × k) = 2520 × 6600
  • 10080 × k = 16,632,000
  • k = 2520 × 660040 × 252
  • k = 10 × 660040 = 6600040 = 1650
Conceptual Rationale: The product of two numbers is equal to the product of their HCF and LCM. Substituting the given parameters yields k = 1650.
Q2. Polynomials [1 Mark]

If α and β are the zeroes of the polynomial 2x2 − 4x − 5, the value of (α − β)2 is:

(A) 4
(B) 6
(C) 14
(D) 56
Correct Option: (C) 14
Formula Used:

α + β = −ba, αβ = ca, and (α − β)2 = (α + β)2 − 4αβ

Step-by-Step Substitution & Calculation:
  • For polynomial 2x2 − 4x − 5: a = 2, b = −4, c = −5
  • α + β = −(−4)2 = 2
  • αβ = −52
  • (α − β)2 = (2)2 − 4×(−52) = 4 + 10 = 14
Conceptual Rationale: Expressing (α − β)2 in terms of the sum and product of roots gives (2)2 + 10 = 14.
Q3. Pair of Linear Equations in Two Variables [1 Mark]

For what value of p does the pair of linear equations 4x + py + 8 = 0 and 2x + 2y + 2 = 0 have a unique solution?

(A) p = 4 only
(B) p = 2 only
(C) p ≠ 4
(D) p ≠ 2
Correct Option: (C) p ≠ 4
Formula Used:

Condition for unique solution: a1a2 ≠ b1b2

Step-by-Step Substitution & Calculation:
  • Here a1 = 4, b1 = p; a2 = 2, b2 = 2
  • 42 ≠ p2
  • 2 ≠ p2 ⇒ p ≠ 4
Conceptual Rationale: For a unique solution, the ratio of x-coefficients must not equal the ratio of y-coefficients, giving p ≠ 4.
Q4. Pair of Linear Equations in Two Variables [1 Mark]

The sum of the numerator and denominator of a fraction is 11. If the denominator is increased by 1, the fraction becomes 12, then the fraction is:

(A) 29
(B) 38
(C) 47
(D) 56
Correct Option: (C) 47
Formula Used & System Formulation:

Let fraction be xy. Given: x + y = 11 and xy + 1 = 12

Step-by-Step Substitution:
  • 2x = y + 1 ⇒ 2x − y = 1
  • Adding (x + y = 11) and (2x − y = 1): 3x = 12 ⇒ x = 4
  • y = 11 − 4 = 7
  • Required Fraction = 47
Conceptual Rationale: Solving the linear system yields numerator 4 and denominator 7, making the original fraction 4/7.
Q5. Quadratic Equations [1 Mark]

If one root of the quadratic equation ax2 + bx + c = 0 is the reciprocal of the other, then:

(A) b = c
(B) a = b
(C) ac = 1
(D) a = c
Correct Option: (D) a = c
Formula Used:

Product of roots of ax2 + bx + c = 0 is ca

Step-by-Step Substitution:
  • Let roots be α and 1α
  • Product of roots = α × 1α = 1
  • ca = 1 ⇒ a = c
Conceptual Rationale: Since reciprocal roots multiply to 1, setting the product of roots c/a = 1 proves a = c.
Q6. Arithmetic Progressions [1 Mark]

The first term of an AP is p and the common difference is q, then its 10th term is:

(A) q + 10p
(B) p − 9q
(C) p + 9q
(D) p + 10q
Correct Option: (C) p + 9q
Formula Used:

n-th term of an AP: an = a + (n − 1)d

Step-by-Step Substitution:
  • Given: a = p, d = q, n = 10
  • a10 = p + (10 − 1)q = p + 9q
Conceptual Rationale: Substituting first term p and common difference q into the standard n-th term formula gives p + 9q.
Q7. Arithmetic Progressions [1 Mark]

Which term of the AP: 21, 42, 63, 84 … is 210?

(A) 9th
(B) 10th
(C) 11th
(D) 12th
Correct Option: (B) 10th
Formula Used:

an = a + (n − 1)d

Step-by-Step Substitution:
  • a = 21, d = 42 − 21 = 21, an = 210
  • 210 = 21 + (n − 1)21
  • 189 = (n − 1)21 ⇒ n − 1 = 9 ⇒ n = 10
Conceptual Rationale: Solving 21 + (n − 1)×21 = 210 yields n = 10, making 210 the 10th term.
Q8. Coordinate Geometry [1 Mark]

If the point P(5, 2) divides the line segment joining A(8, 5) and B(4, y) in the ratio 3 : 1, then the value of y is:

(A) 4
(B) 3
(C) 2
(D) 1
Correct Option: (D) 1
Formula Used:

Section formula for y-coordinate: yP = m1y2 + m2y1m1 + m2

Step-by-Step Substitution:
  • m1 : m2 = 3 : 1, y1 = 5, y2 = y, yP = 2
  • 2 = 3(y) + 1(5)3 + 1
  • 2 = 3y + 54 ⇒ 8 = 3y + 5 ⇒ 3y = 3 ⇒ y = 1
Conceptual Rationale: Applying the section formula to the ordinate of point P yields y = 1.
Q9. Probability [1 Mark]

A letter from the word INDEPENDENCE is selected at random. What is the probability that the letter selected is a vowel which occurs the maximum number of times in the given word?

(A) 112
(B) 14
(C) 13
(D) 512
Correct Option: (C) 13
Formula Used:

P(E) = Favourable OutcomesTotal Outcomes

Step-by-Step Analysis:
  • Total letters in INDEPENDENCE = 12
  • Frequency of vowels: ‘I’ = 1, ‘E’ = 4
  • Maximum occurring vowel = ‘E’ (Count = 4)
  • P(E) = 412 = 13
Conceptual Rationale: ‘E’ is the most frequent vowel (4 occurrences out of 12 letters), giving probability 4/12 = 1/3.
Q10. Statistics [1 Mark]

For the following distribution, the lower limit of the median class is:

Class 0-5 5-10 10-15 15-20 20-25
Frequency 10 15 12 20 9
(A) 5
(B) 10
(C) 15
(D) 20
Correct Option: (B) 10
Cumulative Frequency Table:
  • 0-5: f = 10, cf = 10
  • 5-10: f = 15, cf = 25
  • 10-15: f = 12, cf = 37
  • 15-20: f = 20, cf = 57
  • 20-25: f = 9, cf = 66
Step-by-Step Determination:
  • N = 66 ⇒ N2 = 33
  • Cumulative frequency just greater than 33 is 37 (Class 10-15).
  • Lower limit of median class 10-15 = 10
Conceptual Rationale: Since N/2 = 33 falls into the cumulative frequency bin of 37 (class 10-15), its lower limit is 10.
Q11. Circles [1 Mark]

The length of a tangent drawn from a point at a distance of 10 cm from the centre of the circle is 8 cm. The radius of the circle is:

(A) 4 cm
(B) 5 cm
(C) 6 cm
(D) 7 cm
Correct Option: (C) 6 cm
Formula Used:

Pythagoras Theorem in right-angled triangle OTP: OP2 = OT2 + PT2

Step-by-Step Substitution:
  • Distance from centre (OP) = 10 cm, Tangent length (PT) = 8 cm
  • 102 = r2 + 82
  • 100 = r2 + 64 ⇒ r2 = 36 ⇒ r = 6 cm
Conceptual Rationale: Tangent is perpendicular to the radius at point of contact. r = √(102 − 82) = 6 cm.
Q12. Statistics [1 Mark]

Mean and median of certain data are 32 and 30 respectively. Using empirical formula, the value of mode is:

(A) 36
(B) 26
(C) 30
(D) 20
Correct Option: (B) 26
Formula Used:

Empirical Relationship: Mode = 3 × Median − 2 × Mean

Step-by-Step Substitution:
  • Given: Median = 30, Mean = 32
  • Mode = 3(30) − 2(32) = 90 − 64 = 26
Conceptual Rationale: Direct substitution into the empirical formula yields Mode = 90 − 64 = 26.
Q13. Triangles / Heights & Distances [1 Mark]

A ladder 15 m long reaches a window 12 m above the ground. The distance of the foot of the ladder from the base of the wall is:

(A) 8 m
(B) 9 m
(C) 10 m
(D) 13 m
Correct Option: (B) 9 m
Formula Used:

Pythagoras Theorem: Hypotenuse2 = Perpendicular2 + Base2

Step-by-Step Substitution:
  • Ladder = 15 m, Height = 12 m
  • 152 = 122 + Base2 ⇒ Base2 = 225 − 144 = 81 ⇒ Base = 9 m
Conceptual Rationale: In the right-angled triangle, base distance = √(225 − 144) = 9 m.
Q14. Introduction to Trigonometry [1 Mark]

The value of sin2 60° − 2 tan2 45° − cos2 30° is:

(A) −2
(B) −1
(C) 1
(D) 2
Correct Option: (A) −2
Trigonometric Values Used:

sin 60° = √32, tan 45° = 1, cos 30° = √32

Step-by-Step Substitution:
  • Expression = 34 − 2(1) − 34 = −2
Conceptual Rationale: Since sin 60° = cos 30°, their squares cancel, leaving −2.
Q15. Triangles [1 Mark]

The perimeter of two similar triangles is 28 cm and 35 cm respectively. If one side of the first triangle is 8 cm, then the corresponding side of the second triangle is:

(A) 10 cm
(B) 12 cm
(C) 14 cm
(D) 16 cm
Correct Option: (A) 10 cm
Theorem Used:

Ratio of perimeters of two similar triangles = Ratio of their corresponding sides.

Step-by-Step Substitution:
  • 2835 = 8x ⇒ 45 = 8x ⇒ 4x = 40 ⇒ x = 10 cm
Conceptual Rationale: Corresponding linear dimensions of similar triangles maintain identical ratios, giving 10 cm.
Q16. Triangles [1 Mark]

If in ΔABC and ΔPQR, ∠B = ∠Q, ∠R = ∠C and AB = 2PQ, then the two triangles are:

(A) Congruent but not similar
(B) Similar but not congruent
(C) Neither congruent nor similar
(D) Congruent as well as similar
Correct Option: (B) Similar but not congruent
Criteria Analysis:
  • By AA Similarity Criterion: Since ∠B = ∠Q and ∠C = ∠R, ΔABC ~ ΔPQR.
  • Side ratio = 2 ≠ 1, so sides are unequal. Hence, they are similar but not congruent.
Conceptual Rationale: Equal corresponding angles satisfy AA similarity, but the 2:1 side ratio violates congruence conditions.
Q17. Circles [1 Mark]

If tangents PA and PB from a point P to a circle with centre O are inclined to each other at an angle of 80°, then ∠AOB is equal to:

(A) 60°
(B) 70°
(C) 80°
(D) 100°
Correct Option: (D) 100°
Property Used:

∠AOB and ∠APB are supplementary (∠AOB + ∠APB = 180°).

Step-by-Step Substitution:
  • ∠AOB + 80° = 180° ⇒ ∠AOB = 100°
Conceptual Rationale: In quadrilateral OAPB, opposite angles at centre and external point are supplementary (180° − 80° = 100°).
Q18. Surface Areas and Volumes [1 Mark]

Two cubes each of volume 64 cm3 are joined end to end to form a cuboid. The total surface area of the resulting cuboid is:

(A) 128 cm2
(B) 160 cm2
(C) 176 cm2
(D) 192 cm2
Correct Option: (B) 160 cm2
Step-by-Step Substitution:
  • Edge of cube a = (64)1/3 = 4 cm
  • Cuboid Dimensions: l = 8 cm, b = 4 cm, h = 4 cm
  • TSA = 2(8×4 + 4×4 + 4×8) = 2(32 + 16 + 32) = 160 cm2
Conceptual Rationale: Combining two 4 cm cubes length-wise forms an 8×4×4 cm cuboid with surface area 160 cm2.
Q19. Assertion-Reason (Probability) [1 Mark]

ASSERTION (A): The probability of getting number 8 on rolling a die is zero (0).

REASON (R): The probability of an impossible event is zero (0).

(A) Both (A) and (R) are true and (R) is the correct explanation of (A).
(B) Both (A) and (R) are true but (R) is not the correct explanation of (A).
(C) (A) is true but (R) is false.
(D) (A) is false but (R) is true.
Correct Option: (A)
Conceptual Rationale: Rolling 8 on a single die is an impossible event, whose probability is 0 as stated in Reason (R).
Q20. Assertion-Reason (Triangles) [1 Mark]

ASSERTION (A): If a line divides any two sides of a triangle in the same ratio, then the line is parallel to the third side.

REASON (R): Line drawn from midpoint of one side of triangle parallel to another will bisect the third side.

(A) Both (A) and (R) are true and (R) is the correct explanation of (A).
(B) Both (A) and (R) are true but (R) is not the correct explanation of (A).
(C) (A) is true but (R) is false.
(D) (A) is false but (R) is true.
Correct Option: (B)
Conceptual Rationale: Both statements are true geometric theorems, but Reason (R) is the Mid-point theorem, not the explanation for Converse of BPT in Assertion (A).
SECTION B (Very Short Answers) 10 Marks
Q21. Real Numbers [2 Marks]

Q21 (A): Find the smallest number which when increased by 17 is exactly divisible by both 520 and 468.

Final Answer: 4663
Step-by-Step Calculation:
  • Prime factorization of 520 = 23 × 5 × 13
  • Prime factorization of 468 = 22 × 32 × 13
  • LCM(520, 468) = 23 × 32 × 5 × 13 = 4680
  • Required number = 4680 − 17 = 4663
CBSE Marking Scheme: Finding LCM (4680) [1M] | Subtracting 17 to get 4663 [1M]
OR

Q21 (B): Show that (25)n will never end with digit zero for any natural number n.

Conclusion: (25)n never ends with digit 0
Proof:
  • (25)n = (52)n = 52n
  • By Fundamental Theorem of Arithmetic, prime factorization is unique. Since factor 2 is missing, it cannot end with 0.
Q22. Introduction to Trigonometry [2 Marks]

If 3 sin θ = 4 cos θ, find the value of sin θ + cos2 θ.

Final Answer: 2925 (1.16)
Step-by-Step Evaluation:
  • tan θ = 4/3 ⇒ sin θ = 4/5, cos θ = 3/5
  • sin θ + cos2 θ = 45 + (35)2 = 45 + 925 = 2925
Q23. Polynomials [2 Marks]

If one zero of the quadratic polynomial 2x2 − 3x + p is 3, find the value of p. Also, find the other zero.

Final Answer: p = −9 and Other Zero = −32
Calculation:
  • p(3) = 0 ⇒ 2(3)2 − 3(3) + p = 0 ⇒ 18 − 9 + p = 0 ⇒ p = −9
  • Sum of zeroes = 3 + β = 3/2 ⇒ β = −3/2
Q24. Circles [2 Marks]

In the given figure, PA is a common tangent and QB and PC are tangents from Q and P. If QB = 5 cm and PC = 9 cm, evaluate length of PQ.

Final Answer: PQ = 4 cm (VI Variant: 8 cm)
  • QA = QB = 5 cm, and PA = PC = 9 cm (tangents from external point)
  • PQ = PA − QA = 9 − 5 = 4 cm
Q25. Coordinate Geometry [2 Marks]

Q25 (A): Points A(3, 1), B(5, 1), C(a, b) and D(4, 3) are vertices of a parallelogram ABCD. Find values of a and b.

Final Answer: a = 6, b = 3
  • Midpoint AC = Midpoint BD ⇒ (3+a2, 1+b2) = (92, 2)
  • 3 + a = 9 ⇒ a = 6 | 1 + b = 4 ⇒ b = 3
OR

Q25 (B): Find a linear relation between x and y such that P(x, y) is equidistant from A(1, 4) and B(−1, 2).

Final Answer: x + y − 3 = 0
  • PA2 = PB2 ⇒ (x − 1)2 + (y − 4)2 = (x + 1)2 + (y − 2)2
  • Simplifying gives 4x + 4y − 12 = 0 ⇒ x + y − 3 = 0
SECTION C (Short Answers) 18 Marks
Q26. Real Numbers [3 Marks]

Given that √5 is irrational, prove that 2 + 3√5 is irrational.

Proof Completed
  • Assume 2 + 3√5 = a/b (where a, b are co-prime integers, b ≠ 0).
  • 3√5 = a − 2bb ⇒ √5 = a − 2b3b
  • Since a, b are integers, RHS is rational, which means √5 is rational.
  • This contradicts the fact that √5 is irrational. Hence, 2 + 3√5 is irrational.
Q27. Circles [3 Marks]

Q27 (A): Prove that AP = 12(AB + BC + CA).

Proof Completed
  • Tangents: AP = AR, BP = BQ, CQ = CR
  • Perimeter ΔABC = AB + BC + CA = AB + (BQ + QC) + CA = (AB + BP) + (CR + CA) = AP + AR = 2AP
  • Hence, AP = 12(AB + BC + CA).
OR

Q27 (B): Prove that ∠APB = 2∠OAB.

Proof Completed
  • In ΔPAB, PA = PB ⇒ ∠PAB = 90° − θ/2 (where θ = ∠APB)
  • ∠OAP = 90° ⇒ ∠OAB = 90° − (90° − θ/2) = θ/2 ⇒ ∠APB = 2∠OAB.
Q28. Coordinate Geometry [3 Marks]

Determine ratio in which (−6, y) divides segment joining A(−3, −1) and B(−8, 9). Also find y.

Final Answer: Ratio = 3 : 2 and y = 5
  • −6 = k(−8) − 3k + 1 ⇒ −6k − 6 = −8k − 3 ⇒ 2k = 3 ⇒ k = 3/2
  • y = (3/2)(9) + 1(−1)(3/2) + 1 = 25/25/2 = 5
Q29. Introduction to Trigonometry [3 Marks]

In right ΔACB, AB = 29, BC = 21, ∠ABC = θ. Find: (i) 1 + tan2 θ, (ii) cos2 θ − sin2 θ.

Final Answers: (i) 841441  |  (ii) 41841
  • AC = √(292 − 212) = √400 = 20
  • (i) 1 + tan2 θ = 1 + (20/21)2 = 841/441
  • (ii) cos2 θ − sin2 θ = (21/29)2 − (20/29)2 = 41/841
Q30. Statistics [3 Marks]

Q30 (A): Mean of distribution is 48, total frequency is 50. Find missing frequencies x and y.

Final Answer: x = 12, y = 13
  • Equation 1: 25 + x + y = 50 ⇒ x + y = 25
  • Equation 2: Σfixi / 50 = 48 ⇒ 9x + 13y = 277
  • Solving gives x = 12, y = 13
OR

Q30 (B): Find the Modal weight of 50 students.

Final Answer: 60.56 kg
  • Modal class = 55 − 65 (f1 = 20, f0 = 10, f2 = 12, h = 10, l = 55)
  • Mode = 55 + [20 − 1040 − 22] × 10 = 55 + 5.56 = 60.56 kg
Q31. Pair of Linear Equations [3 Marks]

The sum of digits of a two-digit number is 9. Nine times this number is twice the reversed number. Find the number.

Final Answer: 18
  • x + y = 9  and  9(10x + y) = 2(10y + x) ⇒ 8x − y = 0
  • Adding equations: 9x = 9 ⇒ x = 1, y = 8. Number = 18.
SECTION D (Long Answers – 5 Marks) 20 Marks
Q32. Triangles (Thales Theorem / BPT) [5 Marks]

Prove that if a line is drawn parallel to one side of a triangle intersecting other two sides, then it divides the sides in the same ratio.

Proof Completed
Proof Outline:
  • Area(ΔADE)/Area(ΔBDE) = (1/2)×AD×EN(1/2)×DB×EN = AD/DB
  • Area(ΔADE)/Area(ΔDEC) = (1/2)×AE×DM(1/2)×EC×DM = AE/EC
  • Since ΔBDE and ΔDEC lie on same base DE and between same parallels DE || BC, Area(ΔBDE) = Area(ΔDEC).
  • Therefore, AD/DB = AE/EC. Hence Proved!
Q33. Quadratic Equations [5 Marks]

Q33 (A): A train travels 360 km at uniform speed. If speed had been 5 km/h more, it would take 1 hour less. Find speed of train.

Final Answer: 40 km/h
  • 360/x − 360/(x + 5) = 1 ⇒ x2 + 5x − 1800 = 0
  • (x − 40)(x + 45) = 0 ⇒ Speed = 40 km/h (rejecting negative speed).
OR

Q33 (B): John and Jivanti have 45 marbles. Both lost 5 marbles each, product of remaining is 124. Find initial marbles.

Final Answer: 36 and 9 marbles
  • (x − 5)(40 − x) = 124 ⇒ x2 − 45x + 324 = 0
  • (x − 36)(x − 9) = 0 ⇒ Initial counts were 36 and 9.
Q34. Surface Areas and Volumes [5 Marks]

Hemisphere drilled out of wooden cube of side 21 cm. Find (i) volume of remaining wood, (ii) total surface area of solid.

Final Answers: (i) 6835.5 cm3  |  (ii) 2992.5 cm2
  • Radius r = 21/2 = 10.5 cm.
  • (i) Volume = a3 − (2/3)πr3 = 9261 − 2425.5 = 6835.5 cm3
  • (ii) TSA = 6a2 − πr2 + 2πr2 = 2646 + 346.5 = 2992.5 cm2
Q35. Heights & Distances [5 Marks]

Q35 (A): Drone observes ambulance with depression angles 30° and 60° (12 minutes later). Find total time taken.

Final Answer: 18 minutes
  • AP1 = h√3, AP2 = h/√3 ⇒ Distance P1P2 = 2h/√3 in 12 min.
  • Remaining distance AP2 takes 6 min ⇒ Total Time = 12 + 6 = 18 minutes.
OR

Q35 (B): Statue 1.6 m tall on pedestal. Elevation to top is 60°, to bottom is 45°. Find height of pedestal.

Final Answer: 0.8(√3 + 1) m (approx. 2.19 m)
  • tan 45° = h/x ⇒ x = h; tan 60° = (h + 1.6)/h ⇒ h(√3 − 1) = 1.6
  • h = 1.6/(√3 − 1) = 0.8(√3 + 1) m (≈ 2.19 m).
SECTION E (Case Study Competency Questions) 12 Marks
Q36. Case Study 1: Areas Related to Circles [4 Marks]

Hand fan sector boundary radius R = 10 cm, inner radius r = 4 cm, θ = 60°.

  • (i) Area of fan: (60/360)×(22/7)×100 = 1100/21 cm2 (52.38 cm2) [1M]
  • (ii) Area of black sheet: (60/360)×(22/7)×(100 − 16) = 44 cm2 [1M]
  • (iii)(A) Tape length: Outer arc + Inner arc + 2(R − r) = 44/3 + 12 = 80/3 cm (26.67 cm) [2M]
  • OR (iii)(B) Central angle for 29.6 cm tape: θ = 72° [2M]
Q37. Case Study 2: Arithmetic Progressions [4 Marks]

Tree plantation: Trees per section = 2n + 3 (2 sections per class). Tn = 4n + 6.

  • (i) Common difference: T1 = 10, T2 = 14 ⇒ d = 4 [1M]
  • (ii) Trees by Class VI: 4(6) + 6 = 30 trees [1M]
  • (iii)(A) Total trees (I to XII): S12 = (12/2)(10 + 54) = 384 trees [2M]
  • OR (iii)(B) Class that planted 34 trees: 4n + 6 = 34 ⇒ Class VII [2M]
Q38. Case Study 3: Probability [4 Marks]

400 T-shirts: 312 Good, 54 Minor defects, 34 Major defects.

  • (i) P(Harish buys): 312/400 = 39/50 (0.78) [1M]
  • (ii) P(Trader buys): 366/400 = 183/200 (0.915) [1M]
  • (iii)(A) P(Not good): 88/400 = 11/50 (0.22) [2M]
  • OR (iii)(B) P(Neither buys): 34/400 = 17/200 (0.085) [2M]

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UP Board 12th New Exam Pattern 2027: 80:20 Marking Rule.

UP Board 12th New Exam Pattern 2027: यूपी बोर्ड 12वीं के नए एग्जाम पैटर्न में क्या बदलाव हुए हैं? थ्योरी और प्रैक्टिकल का मार्क्स सिस्टम और पेपर का नया तरीका यहां आसान भाषा में समझें।

Key Highlights:

  • पेपर का ढांचा (Marks Structure): फिजिक्स, केमिस्ट्री जैसे प्रैक्टिकल वाले विषयों में 70 नंबर की लिखित परीक्षा (Theory) और 30 नंबर का प्रैक्टिकल होगा। वहीं मैथ्स, हिंदी, अंग्रेजी और कॉमर्स जैसे बिना प्रैक्टिकल वाले विषयों का पेपर पूरे 100 नंबर का आएगा।
  • ऑब्जेक्टिव सवालों (MCQs) पर ज्यादा जोर: रटने की आदत को कम करने के लिए अब पेपर में कॉन्सेप्ट पर आधारित बहुविकल्पीय (MCQs) और छोटे उत्तर वाले सवालों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
  • कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं: यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में गलत जवाब देने पर कोई नंबर नहीं कटेंगे (No Negative Marking)। इसलिए परीक्षा में आपको हर सवाल का जवाब लिखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।
  • पास होने का नियम: हर विषय में पास होने के लिए कम से कम 33% नंबर लाना जरूरी है। ध्यान रहे, प्रैक्टिकल वाले विषयों में आपको थ्योरी (कम से कम 23 नंबर) और प्रैक्टिकल (कम से कम 10 नंबर) में अलग-अलग पास होना अनिवार्य है।

यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं (इंटरमीडिएट) के स्टूडेंट्स के लिए 2027 से एग्जाम पैटर्न में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF 2023) के तहत अब यूपी बोर्ड में 80:20 का मार्किंग सिस्टम लागू हो रहा है। बहुत से स्टूडेंट्स इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि यह नया रूल क्या है, किन विषयों पर लागू होगा और क्या हमारा यूपी बोर्ड अब पूरी तरह CBSE पैटर्न पर जा रहा है। इस डिटेल पोस्ट में हम एक अनुभवी टीचर की तरह आपके इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में देंगे, ताकि आप अभी से अपनी तैयारी (Preparation) की सही स्ट्रैटेजी (Strategy) बना सकें।

Key Highlights: UP Board 12th Exam Pattern 2027

विवरण (Particulars)महत्वपूर्ण तथ्य (Key Details)
बोर्ड का नामउत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP)
लागू होने का सत्र2026-2027 (बोर्ड परीक्षा 2027 से)
नया पैटर्न80 मार्क्स थ्योरी + 20 मार्क्स इंटरनल असेसमेंट
किन विषयों पर लागू?सभी गैर-प्रैक्टिकल विषय (हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, गणित आदि)
प्रैक्टिकल विषय पैटर्न70 मार्क्स थ्योरी + 30 मार्क्स प्रैक्टिकल (कोई बदलाव नहीं)
अन्य बोर्ड जिनमें यह लागू हैCBSE, ISC, Maharashtra Board

UP Board में नया 80:20 का रूल क्या है?

पहले यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में जिन सब्जेक्ट्स का प्रैक्टिकल नहीं होता था, उनका सीधा 100 मार्क्स का एक लिखित पेपर (Theory Exam) होता था। स्टूडेंट्स पूरा फोकस सिर्फ उसी फाइनल एग्जाम पर करते थे।

लेकिन 2027 से इन विषयों का फाइनल बोर्ड पेपर अब 80 मार्क्स का होगा। बचे हुए 20 मार्क्स स्कूल द्वारा इंटरनल असेसमेंट (Internal Assessment) के आधार पर दिए जाएंगे। यह 20 मार्क्स स्टूडेंट्स के मंथली टेस्ट, प्रोजेक्ट वर्क, क्लासरूम अटेंडेंस और परफॉरमेंस पर निर्भर करेंगे। इससे स्टूडेंट्स को अपना ओवरऑल परसेंटेज बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा पेपर में अब रटने (Rote learning) वाले प्रश्नों को कम करके लगभग 35% क्वेश्चन ‘एप्लीकेशन-बेस्ड’ (Application-Based) पूछे जाएंगे, जो सीधे आपकी समझ (Concept) को परखेंगे।

यह नया नियम किन-किन सब्जेक्ट्स पर लागू होगा?

नया 80:20 का नियम मुख्य रूप से भाषा (Languages) और मानविकी/कॉमर्स (Humanities/Commerce) के गैर-प्रैक्टिकल विषयों पर लागू किया गया है। साइंस स्ट्रीम के प्रैक्टिकल विषयों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सब्जेक्ट कैटेगरीपहले का पैटर्न (Old Rule)नया एग्जाम पैटर्न 2027 (New Rule)
गैर-प्रैक्टिकल विषय (हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास, अर्थशास्त्र आदि)100 मार्क्स का केवल लिखित पेपर80 मार्क्स लिखित + 20 मार्क्स इंटरनल
प्रैक्टिकल विषय (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, भूगोल आदि)70 मार्क्स लिखित + 30 मार्क्स प्रैक्टिकल70 मार्क्स लिखित + 30 मार्क्स प्रैक्टिकल (पुराना नियम जारी)
गणित (Mathematics) / कॉमर्स100 मार्क्स का लिखित पेपर80 मार्क्स लिखित + 20 मार्क्स इंटरनल

क्या UP Board अब CBSE पैटर्न को फॉलो कर रहा है? (UP Board vs CBSE Comparison)

हाँ, यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) अब धीरे-धीरे पूरी तरह से CBSE के एग्जाम पैटर्न को अडॉप्ट कर रहा है।

  • CBSE, ISC और Maharashtra Board में पहले से है यह नियम: CBSE (Central Board of Secondary Education), CISCE (ISC) और महाराष्ट्र जैसे बड़े स्टेट बोर्ड्स में 80:20 का यह सिस्टम पिछले कई सालों से चल रहा है। वहाँ 12वीं के गैर-प्रैक्टिकल विषयों में 20 मार्क्स का इंटरनल असेसमेंट फिक्स होता है।
  • सिलेबस और किताबें: यूपी बोर्ड पहले ही 100% NCERT सिलेबस लागू कर चुका है, जो पूरी तरह से CBSE में पढ़ाया जाता है।
  • मार्किंग स्कीम की समानता: अब 80:20 रूल लागू होने से यूपी बोर्ड और CBSE का मार्किंग वेटेज बिल्कुल एक समान हो गया है। अब यूपी बोर्ड के बच्चे भी CBSE के बच्चों की तरह इंटरनल मार्क्स के जरिये अच्छा स्कोर कर पाएंगे।
  • यूनिट-वाइज़ सवाल अनिवार्य: CBSE की तरह ही अब यूपी बोर्ड ने भी हर यूनिट (Chapter) से सवाल पूछना अनिवार्य कर दिया है। यानी अब पेपर में एक्सटर्नल चॉइस (अथवा वाले सवाल) सीमित होंगे और आप कोई भी यूनिट छोड़कर (Selective Study) नहीं जा सकते।

2027 Board Exam के लिए तैयारी कैसे शुरू करें? (Pro Tips)

नए पैटर्न को देखते हुए स्टूडेंट्स को अपनी स्ट्रेटेजी (Strategy) में कुछ बदलाव करने होंगे:

  • इंटरनल एग्जाम्स को सीरियसली लें: अब 100 मार्क्स वाले पेपर्स में भी 20 मार्क्स आपके स्कूल टीचर्स के हाथ में हैं। इसलिए स्कूल के मंथली टेस्ट (Monthly Tests), हाफ-ईयरली एग्जाम्स (Half-yearly) और असाइनमेंट्स में अच्छा परफॉर्म करना बहुत जरूरी है।
  • पूरा सिलेबस कवर करें: एग्जाम में हर यूनिट से क्वेश्चन आना फिक्स है। किसी भी चैप्टर को छोड़ना आपके मार्क्स सीधे तौर पर कम कर सकता है।
  • कॉन्सेप्ट (Concept) समझें: 35% सवाल एप्लीकेशन-बेस्ड होंगे। इसलिए केवल किताबी परिभाषाएं रटने के बजाय टॉपिक्स को गहराई से समझें।
  • प्रैक्टिस पर ध्यान दें: 2027 के नए ब्लूप्रिंट पर आधारित प्रीवियस ईयर पेपर्स (PYQs) और मॉडल पेपर्स की ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: क्या 12वीं साइंस के विषयों (Physics, Chemistry) में भी 80:20 का नियम लगेगा?

उत्तर: नहीं, जिन विषयों में पहले से 30 मार्क्स का प्रैक्टिकल होता है, वहाँ 70:30 का ही पुराना नियम लागू रहेगा। 80:20 का रूल केवल हिंदी, अंग्रेजी, गणित और मानविकी/कॉमर्स जैसे गैर-प्रैक्टिकल विषयों पर लागू होगा।

Q2: 20 मार्क्स के इंटरनल असेसमेंट में क्या-क्या शामिल होगा?

उत्तर: इन 20 अंकों में आपके प्रोजेक्ट वर्क, मंथली यूनिट टेस्ट के मार्क्स, क्लास में आपकी अटेंडेंस और आपकी ओवरऑल एक्टिविटी के नंबर शामिल किए जाएंगे। यह पूरी तरह स्कूल स्तर पर तय होगा।

Q3: क्या 2027 के एग्जाम में पास होने के लिए थ्योरी और इंटरनल में अलग-अलग पास होना होगा?

उत्तर: यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार आपको 80 अंक की लिखित परीक्षा और 20 अंक के इंटरनल असेसमेंट दोनों में अलग-अलग न्यूनतम 33% अंक लाकर पास होना अनिवार्य होगा।