UP Board Class 12th Physics Model Paper 2027 PDF With Solution.

Brijesh K YadavBrijesh K Yadav|Updated: 5 Oct, 2026

UPMSP द्वारा जारी आधिकारिक मॉडल पेपर (सत्र 2026-27) के अनुसार, यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान (Physics) के परीक्षा पैटर्न, 70 अंकों के विस्तृत अंक विभाजन और 5 अलग-अलग खण्डों की संरचना को इस पोस्ट में विस्तार से समझाया गया है। यदि आप मुख्य बोर्ड परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करना चाहते हैं, तो जानें कि बहुविकल्पीय, अति लघु, लघु तथा विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों का वितरण किस प्रकार रहेगा और पूरे पेपर को निर्धारित समय में कैसे हल करें।

यूपी बोर्ड 12वीं भौतिक विज्ञान मॉडल पेपर 2027 (हल सहित PDF)

खण्ड ‘अ’ (Section A) – बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्र. 1 (क) 2L × 2L × L विमा के एक घनाभ में 4L² क्षेत्रफल वाले पृष्ठ ‘S’ के केंद्र पर एक आवेश q रखा गया है। पृष्ठ ‘S’ के विपरीत पृष्ठ से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स का मान होगा?
(i) q / (12 ε₀)
(ii) q / (3 ε₀)
(iii) q / (2 ε₀)
(iv) q / (6 ε₀)
(iv) q / (6 ε₀)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

पृष्ठ ‘S’ का क्षेत्रफल 4L² (अर्थात 2L × 2L) है। यदि हम इस घनाभ के पृष्ठ ‘S’ के दूसरी ओर ठीक वैसा ही दूसरा घनाभ रख दें, तो आवेश q एक सममित घन (Cube) के केंद्र पर आ जाएगा जिसकी प्रत्येक भुजा 2L होगी।

गॉस के नियम (Gauss’s Law) से सम्पूर्ण बंद घन से निर्गत कुल फ्लक्स (Φ) = q / ε₀
  • घन में कुल 6 समान वर्गाकार फलक (Faces) होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल 2L × 2L = 4L² है।
  • सममिति (Symmetry) के कारण, प्रत्येक फलक से बराबर फ्लक्स गुजरेगा।
  • पृष्ठ ‘S’ का विपरीत पृष्ठ भी घन का एक फलक है।

अतः विपरीत पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स = Φ / 6 = q / (6 ε₀)

💡 Tips: जब भी आवेश किसी सतह पर स्थित हो, तो काल्पनिक गॉसियन पृष्ठ (Gaussian Surface) बनाते समय सममिति का विशेष ध्यान रखें ताकि आवेश केंद्र में आ जाए।
प्र. 1 (ख) किसी चालक की वैद्युत चालकता (Electrical Conductivity) निर्भर करती है:
(i) तापमान पर (Temperature)
(ii) सामग्री की शुद्धता पर (Purity)
(iii) दबाव/दाब पर (Pressure)
(iv) उपरोक्त सभी (All of the above)
(iv) उपरोक्त सभी (All of the above)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

वैद्युत चालकता (σ) किसी पदार्थ का विशिष्ट गुण है जो निम्नलिखित कारकों से प्रभावित होती है:

  • तापमान (Temperature): ताप बढ़ने पर शिथिलन काल (Relaxation time) घटता है, जिससे चालकता बदलती है।
  • शुद्धता (Purity): अपद्रव्य मिलाने से चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में बाधा आती है।
  • दाब (Pressure): यांत्रिक तनाव या दाब से जालक (Lattice) संरचना प्रभावित होती है।
💡 Tips: याद रखें, विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) और वैद्युत चालकता पदार्थ के आकार (लम्बाई/क्षेत्रफल) पर निर्भर नहीं करते, केवल पदार्थ की प्रकृति व भौतिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
प्र. 1 (ग) 1 / (μ₀ × ε₀) की विमा (Dimensions) है:
(i) [L T⁻¹]
(ii) [L⁻¹ T]
(iii) [L² T⁻²]
(iv) [M L T⁻¹]
(iii) [L² T⁻²]

विस्तृत हल (Detailed Solution):

निर्वात में प्रकाश की चाल (Speed of light) ‘c’ का सूत्र होता है:

c = 1 / √(μ₀ × ε₀) ⇒ c² = 1 / (μ₀ × ε₀)
  • चाल (c) का विमीय सूत्र = [L T⁻¹]
  • c² का विमीय सूत्र = [L T⁻¹]² = [L² T⁻²]

अतः 1 / (μ₀ × ε₀) का विमीय सूत्र वही होगा जो वेग के वर्ग (c²) का होता है।

💡 Tips: बोर्ड परीक्षा में प्रायः √(μ₀ ε₀) या 1/√(μ₀ ε₀) की विमा पूछी जाती है। ध्यान दें कि केवल 1/(μ₀ ε₀) में वर्ग (Square) का विमीय सूत्र आएगा।
प्र. 1 (घ) किसी परिपथ पर प्रत्यावर्ती वोल्टता v(t) = 30 Sin(1000t) वोल्ट लगाने पर धारा i(t) = 0.3 Sin(1000t – 60°) एम्पीयर बहती है। परिपथ में औसत शक्ति होगी:
(i) 2.25 वाट (Watt)
(ii) 4.5 वाट (Watt)
(iii) 9.0 वाट (Watt)
(iv) 18.0 वाट (Watt)
(i) 2.25 वाट (Watt)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

दिया है (Given):

  • शिखर वोल्टता (V₀) = 30 V
  • शिखर धारा (I₀) = 0.3 A
  • कलान्तर (Phase difference, ϕ) = 60°
औसत शक्ति (Pavg) = Vrms × Irms × cos(ϕ) = (V₀ / √2) × (I₀ / √2) × cos(ϕ)

गणना (Calculation):

Pavg = (30 × 0.3 / 2) × cos(60°)

Pavg = 4.5 × (1 / 2) = 2.25 वाट (W)

💡 Tips: सूत्र में cos(ϕ) को शक्ति गुणक (Power Factor) कहते हैं। हमेशा V₀ और I₀ के स्थान पर RMS मानों का उपयोग करें।
प्र. 1 (ङ) e चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन में λ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश हेतु मुख्य उच्चिष्ठ तथा प्रथम निम्निष्ठ के बीच कोणीय दूरी θ होगी:
(i) λ / e
(ii) λ / 2e
(iii) λ / 4e
(iv) π / 2
(i) λ / e

विस्तृत हल (Detailed Solution):

एकल झिरी द्वारा विवर्तन (Diffraction at single slit) में निम्निष्ठ (Minimum) प्राप्त होने की शर्त है:

e × sin(θ) = nλ

प्रथम निम्निष्ठ (n = 1) के लिए: e × sin(θ) = λ

चूँकि विवर्तन कोण θ अत्यंत सूक्ष्म होता है, अतः sin(θ) ≈ θ।

इसलिए, कोणीय स्थिति θ = λ / e प्राप्त होती है। यही मुख्य उच्चिष्ठ के केंद्र से प्रथम निम्निष्ठ की कोणीय दूरी है।

💡 Tips: यदि मुख्य उच्चिष्ठ की कुल कोणीय चौड़ाई (Total Angular Width) पूछी जाए तो वह 2θ = 2λ/e होगी।
प्र. 1 (च) शुद्ध जर्मेनियम (Germanium) को p-टाइप अर्धचालक (p-type Semiconductor) बनाने के लिए उसमें मिलाया जाने वाला अपद्रव्य है:
(i) ऐलुमिनियम (Aluminium)
(ii) फ़ॉस्फ़ोरस (Phosphorus)
(iii) ऐन्टिमनी (Antimony)
(iv) आर्सेनिक (Arsenic)
(i) ऐलुमिनियम (Aluminium)

विस्तृत हल (Detailed Solution):

p-टाइप अर्धचालक बनाने के लिए निज/शुद्ध अर्धचालक में त्रि-संयोजी (Trivalent) अपद्रव्य परमाणु मिलाए जाते हैं।

  • ऐलुमिनियम (Al): त्रि-संयोजी (Trivalent) तत्व है, जो कोटर (Hole) उत्पन्न करता है।
  • फ़ॉस्फ़ोरस, आर्सेनिक, ऐन्टिमनी: पंच-संयोजी (Pentavalent) तत्व हैं, जिनका प्रयोग n-टाइप अर्धचालक बनाने में होता है।
💡 Tips: याद रखने का आसान नियम: p-टाइप = 3 संयोजकता वाले (Al, B, In, Ga); n-टाइप = 5 संयोजकता वाले (P, As, Sb)।

खण्ड ‘ब’ एवं खण्ड ‘स’ (Section B & Section C) – अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

प्र. 2 (क) निर्वात की चुंबकीयशीलता (μ₀) की विमा तथा मात्रक लिखिए।

1. मात्रक (Unit):

निर्वात की चुंबकीयशीलता (Permeability of free space) का एस.आई. (S.I.) मात्रक न्यूटन / एम्पीयर² (N/A²) अथवा हेनरी / मीटर (H/m) होता है।

2. विमीय सूत्र (Dimensional Formula):

दो समांतर धारावाही चालकों के बीच प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाले बल के सूत्र से:

F / L = (μ₀ / 4π) × (2 I₁ I₂ / r) ⇒ μ₀ = (F × r) / (I₁ × I₂ × L)

विमाओं को प्रतिस्थापित करने पर:

  • बल (F) की विमा = [M L T⁻²]
  • दूरी (r, L) की विमा = [L]
  • धारा (I₁, I₂) की विमा = [A]
  • μ₀ की विमा = [M L T⁻²] × [L] / ([A]² × [L]) = [M L T⁻² A⁻²]
💡 Tips: μ₀ का आंकिक मान 4π × 10⁻⁷ N/A² होता है। विमा लिखते समय आवेश के पदों में न लिखकर एम्पीयर [A] के पदों में ही लिखें।
प्र. 2 (ख) किसी कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा (Induced Current) किन-किन बातों पर निर्भर करती है?

उत्तर:

फैराडे के वैद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) नियम तथा ओम के नियम से, प्रेरित धारा i = e / R = (N / R) × (dΦ / dt) होती है। अतः प्रेरित विद्युत धारा निम्नलिखित तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है:

  • चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन की दर (Rate of change of magnetic flux, dΦ / dt): फ्लक्स परिवर्तन जितना तीव्र होगा, प्रेरित धारा उतनी ही अधिक होगी।
  • कुंडली में फेरों की संख्या (Number of turns, N): फेरों की संख्या बढ़ने पर प्रेरित विद्युत वाहक बल एवं धारा का मान बढ़ता है।
  • परिपथ का कुल प्रतिरोध (Total Resistance of circuit, R): परिपथ का प्रतिरोध जितना कम होगा, प्रेरित धारा का मान उतना ही अधिक होगा।
प्र. 2 (ग) विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum) में सबसे बड़ी तथा सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य की तरंगों का नाम लिखिए।

उत्तर:

  • सबसे बड़ी तरंगदैर्ध्य (Longest Wavelength): रेडियो तरंगें (Radio Waves) — इनकी तरंगदैर्ध्य 10⁻¹ मीटर से 10⁴ मीटर तक होती है।
  • सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य (Shortest Wavelength): गामा किरणें (Gamma Rays) — इनकी तरंगदैर्ध्य 10⁻¹⁴ मीटर से 10⁻¹⁰ मीटर तक होती है।
💡 Tips: जिस तरंग की तरंगदैर्ध्य (λ) सबसे छोटी होती है, उसकी आवृत्ति (Frequency) और ऊर्जा (E = hν) सबसे अधिक होती है।
प्र. 2 (घ) यदि प्रिज्म-कोण (Prism Angle) तथा न्यूनतम विचलन कोण (Minimum Deviation Angle) प्रत्येक A हो, तो प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक का मान बताइए।

दिया है (Given): प्रिज्म कोण = A, न्यूनतम विचलन कोण (δm) = A

प्रिज्म के अपवर्तनांक का सूत्र: n = sin[(A + δm) / 2] / sin(A / 2)

हल (Solution):

  • δm = A रखने पर: n = sin[(A + A) / 2] / sin(A / 2)
  • n = sin(2A / 2) / sin(A / 2) = sin(A) / sin(A / 2)
  • त्रिकोणमितीय सूत्र sin(A) = 2 sin(A/2) cos(A/2) का प्रयोग करने पर:
  • n = [2 sin(A/2) cos(A/2)] / sin(A/2)
  • n = 2 cos(A / 2)

अतः प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक 2 cos(A/2) होगा।

प्र. 2 (ङ) हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में बामर श्रेणी (Balmer Series) की द्वितीय रेखा की तरंगदैर्ध्य रिडबर्ग नियतांक (R) के पदों में लिखिए।

हल (Solution):

बामर श्रेणी के लिए निम्नतम ऊर्जा स्तर n₁ = 2 होता है। बामर श्रेणी की द्वितीय रेखा (Hβ रेखा) के लिए उच्चतम ऊर्जा स्तर n₂ = 4 होता है।

रिडबर्ग सूत्र: 1 / λ = R × [ (1 / n₁²) – (1 / n₂²) ]
  • 1 / λ = R × [ (1 / 2²) – (1 / 4²) ]
  • 1 / λ = R × [ (1 / 4) – (1 / 16) ]
  • 1 / λ = R × [ (4 – 1) / 16 ] = 3R / 16
  • λ = 16 / (3R)

अतः बामर श्रेणी की द्वितीय रेखा की तरंगदैर्ध्य 16 / (3R) होगी।

प्र. 2 (च) युग्म उत्पादन (Pair Production) से आप क्या समझते हैं? इसका एक उदाहरण दीजिए।

परिभाषा (Definition):

जब उच्च ऊर्जा वाला कोई गामा-फ़ोटॉन (γ-photon, ऊर्जा ≥ 1.02 MeV) किसी भारी पदार्थ के नाभिक पर आपतित होता है, तो वह नाभिक द्वारा अवशोषित होकर एक इलेक्ट्रॉन (e⁻) तथा एक पॉज़िट्रॉन (e⁺) के युग्म में रूपांतरित हो जाता है। इस घटना को युग्म उत्पादन (Pair Production) कहते हैं।

hν (γ-फ़ोटॉन, 1.02 MeV) ⟶ ₋₁e⁰ (इलेक्ट्रॉन) + ₊₁e⁰ (पॉज़िट्रॉन)

यह घटना आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता सिद्धांत (E = mc²) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

प्र. 3 (क) सिद्ध कीजिए कि किसी आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा U = ½ C V² होती है।

उपपत्ति (Derivation):

माना किसी C धारिता वाले अनावेशित चालक को q आवेश देने पर उसका विभव 0 से बढ़कर V हो जाता है।

  • प्रारंभ में चालक का विभव = 0
  • q आवेश देने पर अंतिम विभव = V
  • चालक का औसत विभव (Average Potential) = (0 + V) / 2 = V / 2

चालक को सूक्ष्म आवेश dq देने में किया गया सूक्ष्म कार्य dW = V’ dq होता है। कुल कार्य (W):

W = आवेश × औसत विभव = q × (V / 2) = ½ q V

चूँकि चालक का आवेश q = C V होता है, अतः q का मान रखने पर:

W = ½ × (C V) × V = ½ C V²

यह किया गया कार्य ही चालक में वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrostatic Potential Energy, U) के रूप में संचित होता है:

U = ½ C V² = ½ q V = ½ (q² / C)

इति सिद्धम् (Hence Proved)।

प्र. 3 (ख) ऐम्पियर के परिपथीय नियम (Ampere’s Circuital Law) का कथन लिखिए एवं इसे प्राप्त (व्युत्पन्न) कीजिए।

कथन (Statement):

किसी बंद समतल वक्र (Closed Loop) के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन (Line Integral), उस बंद वक्र द्वारा परिबद्ध (घिरे) क्षेत्रफल से होकर प्रवाहित होने वाली कुल धारा I का μ₀ गुना होता है।

∫ B · dl = μ₀ I

व्युत्पत्ति (Derivation):

माना एक अनन्त लंबाई के सीधे धारावाही तार में I धारा प्रवाहित हो रही है। तार से r दूरी पर वृत्तीय पथ की कल्पना करते हैं।

  • बायो-सेवर्ट के नियम से, r दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र B = (μ₀ I) / (2π r)
  • प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र B और अल्पांश dl की दिशा समान (θ = 0°) होती है।
  • रेखीय समाकलन: ∫ B · dl = ∫ B dl cos(0°) = B ∫ dl
  • चूँकि ∫ dl = वृत्त की परिधि = 2π r:
  • ∫ B · dl = [ (μ₀ I) / (2π r) ] × (2π r) = μ₀ I

इति सिद्धम् (Hence Proved)।

प्र. 3 (ग) एक कुंडली का स्व-प्रेरण गुणांक (Self-Inductance) 10 mH है। इसमें वैद्युत धारा 5 ms में 5 A से 15 A हो जाती है। कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान ज्ञात कीजिए।

दिया है (Given):

  • स्वप्रेरकत्व (L) = 10 mH = 10 × 10⁻³ H
  • समय अंतराल (Δt) = 5 ms = 5 × 10⁻³ s
  • धारा में परिवर्तन (ΔI) = I₂ – I₁ = 15 A – 5 A = 10 A
प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र: |e| = L × (ΔI / Δt)

हल (Solution):

|e| = (10 × 10⁻³ H) × [ 10 A / (5 × 10⁻³ s) ]

|e| = 10 × (10 / 5) = 10 × 2 = 20 वोल्ट (V)

अतः कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण 20 V होगा।

प्र. 3 (घ) यदि अर्धचालक डायोड का अग्रदिशिक अभिनति प्रतिरोध 50 Ω हो, तो संलग्न परिपथ में सेल से प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए।

परिणामी परिपथ विश्लेषण (Circuit Analysis):

  • ऊपरी शाखा (Diode D₁): डायोड D₁ अग्र अभिनत (Forward Biased) है। अतः यह चालन करेगा। इस शाखा का प्रतिरोध R₁ = Rdiode + Rext = 50 Ω + 200 Ω = 250 Ω।
  • मध्य शाखा (Diode D₂): डायोड D₂ उत्क्रम अभिनत (Reverse Biased) है। अतः इसका प्रतिरोध अनंत माना जाएगा और इस शाखा से शून्य धारा प्रवाहित होगी।
  • मुख्य श्रेणी प्रतिरोध: परिपथ में नीचे श्रेणी में R₃ = 25 Ω जुड़ा है। सेल की वोल्टता V = 6 V है।
कुल प्रभावी प्रतिरोध (Rtotal) = R₁ + R₃ = 250 Ω + 25 Ω = 275 Ω

धारा की गणना (Calculation of Current):

सेल से प्रवाहित कुल धारा I = V / Rtotal

I = 6 / 275 A = 0.0218 एम्पीयर (A) ≈ 21.8 मिली-एम्पीयर (mA)

💡 Tips: अग्र अभिनति में डायोड का दिया गया आंतरिक प्रतिरोध अवश्य जोड़ें और उत्क्रम अभिनत शाखा को परिपथ से हटाकर हल करें।

खण्ड ‘द’ (Section D) – लघु उत्तरीय प्रश्न – II

प्र. 4 (क) अनुगमन वेग (Drift Velocity) से आप क्या समझते हैं? किसी चालक से प्रवाहित विद्युत धारा के लिए अनुगमन वेग के पदों में व्यंजक प्राप्त कीजिए।

1. अनुगमन वेग की परिभाषा (Definition of Drift Velocity):

जब किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर लगाया जाता है, तो चालक के भीतर उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन एक नियत सूक्ष्म औसत वेग (~10⁻⁴ m/s) से उच्च विभव वाले सिरे की ओर खिसकने (Set drift) लगते हैं। इस औसत वेग को अनुगमन वेग या अपवाह वेग (Drift Velocity, vd) कहते हैं।

2. धारा तथा अनुगमन वेग में संबंध (Relation between Current and Drift Velocity):

माना L लंबाई तथा A अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व (प्रति एकांक आयतन इलेक्ट्रॉनों की संख्या) ‘n’ है।

  • चालक का कुल आयतन = A × L
  • चालक में उपस्थित कुल मुक्त इलेक्ट्रॉन = n × A × L
  • चालक का कुल मुक्त आवेश (q) = n A L e (जहाँ e = इलेक्ट्रॉन का आवेश)
  • इलेक्ट्रॉनों द्वारा L लंबाई पार करने में लगा समय (t) = L / vd

ओम के नियम एवं धारा की परिभाषा से प्रवाहित धारा (I):

I = q / t = (n A L e) / (L / vd) ⇒ I = n e A vd

जहाँ I = धारा (एम्पीयर), n = इलेक्ट्रॉन घनत्व, e = इलेक्ट्रॉन का आवेश, A = क्षेत्रफल, vd = अनुगमन वेग।

प्र. 4 (ख) L-C-R संयोजन के लिए श्रेणीक्रम अनुनादी परिपथ बनाइए। इस परिपथ के लिए अनुनादी आवृत्ति का सूत्र प्राप्त कीजिए। अनुनादी आवृत्ति प्रतिरोध पर किस प्रकार निर्भर करती है?

1. अनुनाद की स्थिति (Resonance Condition):

श्रेणीक्रम L-C-R परिपथ में जब प्रेरकत्व प्रतिघात (Prerakiy Pratighat, XL) तथा धारितीय प्रतिघात (Dharitiya Pratighat, XC) का मान आपस में बराबर हो जाता है, तो परिपथ की प्रतिबाधा (Impedance, Z) न्यूनतम (Z = R) हो जाती है। इस स्थिति को वैद्युत अनुनाद (Electrical Resonance) कहते हैं।

अनुनाद पर: XL = XC ⇒ ω L = 1 / (ω C)

2. अनुनादी आवृत्ति का सूत्र (Resonant Frequency Derivation):

  • ω² = 1 / (L C)
  • कौणीय आवृत्ति ω = 1 / √(L C)
  • चूँकि ω = 2π fr होती है, अतः अनुनादी आवृत्ति (fr):
fr = 1 / [ 2π √(L C) ]

3. प्रतिरोध (R) पर निर्भरता:

अनुनादी आवृत्ति का सूत्र स्पष्ट करता है कि fr केवल प्रेरकत्व (L) एवं धारिता (C) पर निर्भर करती है। यह प्रतिरोध (R) के मान पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती। प्रतिरोध केवल अनुनाद के समय अधिकतम धारा के परिमाण को नियंत्रित करता है।

प्र. 4 (ग) प्रिज्म के पदार्थ के लिए अपवर्तनांक का सूत्र अल्पतम विचलन कोण (δm) एवं प्रिज्म कोण (A) के पदों में निगमित कीजिए।

उपपत्ति (Derivation):

माना प्रिज्म कोण A तथा आपतन कोण i एवं अपवर्तन कोण r है। प्रिज्म के लिए कुल विचलन कोण δ = (i₁ + i₂) – (r₁ + r₂) होता है।

  • प्रिज्म के भीतर ज्योमितीय संबंध से: r₁ + r₂ = A
  • अतः विचलन कोण: δ = i₁ + i₂ – A
  • अल्पतम (न्यूनतम) विचलन की स्थिति में: δ = δm, i₁ = i₂ = i, तथा r₁ = r₂ = r

अल्पतम विचलन स्थिति के समीकरणों से:

  • 2r = A ⇒ r = A / 2
  • δm = 2i – A ⇒ i = (A + δm) / 2

स्नेल के नियम (Snell’s Law) से अपवर्तनांक (n):

n = sin(i) / sin(r) ⇒ n = sin[ (A + δm) / 2 ] / sin( A / 2 )

इति सिद्धम् (Hence Proved)।

प्र. 4 (घ) फोटॉन के विराम द्रव्यमान तथा गतिक द्रव्यमान से आप क्या समझते हैं? फोटॉन का संवेग p = h / λ निगमित कीजिए।

1. फोटॉन का विराम एवं गतिक द्रव्यमान:

  • विराम द्रव्यमान (Rest Mass): फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य (Zero) होता है क्योंकि फोटॉन कभी भी विराम अवस्था में नहीं रह सकता; यह सदैव प्रकाश की चाल (c) से गतिमान रहता है।
  • गतिक द्रव्यमान (Kinetic Mass): आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण (E = m c²) तथा प्लांक सूत्र (E = hν) की तुलना करने पर: m c² = hν ⇒ m = hν / c² = h / (c λ)।

2. फोटॉन के संवेग का निगमन (Derivation of Momentum):

फोटॉन का संवेग (p) = गतिक द्रव्यमान (m) × चाल (c)

p = m × c = (hν / c²) × c = hν / c

चूँकि प्रकाश की आवृत्ति एवं तरंगदैर्ध्य का संबंध c = ν λ (अर्थात ν/c = 1/λ) होता है:

p = h / λ

जहाँ h = प्लांक नियतांक तथा λ = फोटॉन की तरंगदैर्ध्य। इति सिद्धम्।

प्र. 4 (ङ) एक विद्युत चुंबकीय तरंग का दोलित वैद्युत क्षेत्र Ey = 30 sin(2 × 10¹¹ t + 300 π x) वोल्ट/मीटर से दिया जाता है। तरंगदैर्ध्य (λ) तथा दोलित चुंबकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।

तुलना (Comparison):

दिए गए समीकरण Ey = 30 sin(2 × 10¹¹ t + 300 π x) की तुलना मानक मानक समीकरण Ey = E₀ sin(ωt + kx) से करने पर:

  • वैद्युत क्षेत्र का आयाम (E₀) = 30 V/m
  • कोणीय आवृत्ति (ω) = 2 × 10¹¹ rad/s
  • संचलनांक नियतांक (k) = 300 π rad/m

(i) तरंगदैर्ध्य की गणना (Wavelength):

k = 2π / λ ⇒ 300 π = 2π / λ ⇒ λ = 2 / 300 = 1 / 150 m ≈ 6.67 × 10⁻³ m (या 6.67 mm)

(ii) दोलित चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक (Magnetic Field Expression):

  • चुंबकीय क्षेत्र का आयाम (B₀) = E₀ / c = 30 / (3 × 10⁸) = 10⁻⁷ टेसला (T)
  • समीकरण में ‘+kx’ पद यह दर्शाता है कि तरंग ऋणात्मक X-अक्ष (-x direction) के अनुदिश गमन कर रही है।
  • वैद्युत क्षेत्र Y-अक्ष के अनुदिश है। अतः चुंबकीय क्षेत्र Z-अक्ष (z-axis) के अनुदिश होगा।
Bz = 10⁻⁷ sin(2 × 10¹¹ t + 300 π x) टेसला (T)
प्र. 5 (क) सेल के आंतरिक प्रतिरोध से आप क्या समझते हैं? दिए गए परिपथ में प्रत्येक सेल के सिरों के बीच विभवांतर ज्ञात कीजिए। (अथवा: व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन शर्त स्थापित कीजिए।)

1. सेल का आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance):

जब किसी सेल की प्लेटों को तार द्वारा जोड़ा जाता है, तो सेल के भीतर उसके विद्युत अपघट्य (Electrolyte) का घोल धारा के प्रवाह में जो रुकावट डालता है, उसे सेल का आंतरिक प्रतिरोध (r) कहते हैं。

2. परिपथ आंकिक हल (Numerical Solution):

चित्र अनुसार घटक (Components): E₁ = 10 V (r₁ = 2 Ω), E₂ = 2 V (r₂ = 1 Ω), R₁ = 3 Ω, R₂ = 2 Ω।

  • दोनों सेलों के धनात्मक ध्रुव विपरीत जुड़े हैं, अतः प्रभावी e.m.f. (Enet) = E₁ – E₂ = 10 – 2 = 8 V
  • परिपथ का कुल प्रतिरोध (Rnet) = r₁ + r₂ + R₁ + R₂ = 2 + 1 + 3 + 2 = 8 Ω
  • परिपथ में प्रवाहित मुख्य धारा I = Enet / Rnet = 8 V / 8 Ω = 1 एम्पीयर (A)

सेल के सिरों का विभवांतर (Terminal Voltage):

  • सेल 1 (10 V – डिस्चार्ज हो रहा है): V₁ = E₁ – I r₁ = 10 – (1 × 2) = 8 वोल्ट (V)
  • सेल 2 (2 V – चार्ज हो रहा है): V₂ = E₂ + I r₂ = 2 + (1 × 1) = 3 वोल्ट (V)
💡 Tips: अथवा विकल्प वाले व्हीटस्टोन सेतु के लिए किरचॉफ के दूसरे नियम का प्रयोग कर बन्द पाश ABCD में P/Q = R/S सिद्ध करें।
प्र. 5 (ख) खगोलीय दूरदर्शी द्वारा अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बनने का विवरण दीजिए तथा इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र लिखिए।

1. संरचना एवं प्रतिबिंब का बनना (Working & Ray Diagram Description):

खगोलीय दूरदर्शी में दो उत्तल लेंस होते हैं — अभिदृश्यक (Objective Lens, Lo) तथा नेत्रिका (Eyepiece, Le)।

  • अनंत पर स्थित वस्तु से आने वाली समांतर किरणें अभिदृश्यक द्वारा उसके मुख्य फोकस Fo पर एक वास्तविक, उल्टा तथा छोटा प्रतिबिंब A’B’ बनाती हैं।
  • यह प्रतिबिंब A’B’ नेत्रिका के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है।
  • नेत्रिका को इस प्रकार समायोजित किया जाता है कि A’B’ इसके फोकस Fe तथा प्रकाशिक केंद्र के बीच आ जाए, जिससे अंतिम प्रतिबिंब A”B” स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D = 25 cm) पर बड़ा, आभासी और उल्टा बनता है।

2. आवर्धन क्षमता का सूत्र (Magnification Formula):

m = – ( fo / fe ) × [ 1 + ( fe / D ) ]

दूरदर्शी की कुल नली की लंबाई L = fo + ue होती है।

प्र. 5 (ग) प्रकाश वैद्युत प्रभाव के प्रयोग में प्राप्त प्रेक्षण: (i) आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ = 1.98 × 10⁻⁷ m, (ii) संस्तब्ध विभव V₀ = 2.5 V। फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा तथा धातु का कार्यफलन ज्ञात कीजिए।

दिया है (Given): λ = 1.98 × 10⁻⁷ m, संस्तब्ध (निरोधी) विभव V₀ = 2.5 V

1. अधिकतम गतिज ऊर्जा (Maximum Kinetic Energy, Kmax):

Kmax = e × V₀ = 1.6 × 10⁻¹⁹ C × 2.5 V = 4.0 × 10⁻¹⁹ जूल (J) = 2.5 eV

2. आपतित फोटॉन की ऊर्जा (Photon Energy, E):

E = (h × c) / λ = (6.63 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) / (1.98 × 10⁻⁷)

E = (1.989 × 10⁻²⁵) / (1.98 × 10⁻⁷) = 1.0045 × 10⁻¹⁸ J ≈ 6.28 eV

3. कार्यफलन की गणना (Work Function, W):

आइंस्टीन के प्रकाश वैद्युत समीकरण E = W + Kmax से:

W = E – Kmax = 6.28 eV – 2.5 eV = 3.78 eV = 6.048 × 10⁻¹⁹ जूल (J)
प्र. 5 (घ) हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोहर की तीनों परिकल्पनाएँ (Postulates) लिखिए एवं समझाइए।

नील्स बोहर की तीन मुख्य परिकल्पनाएँ:

  • 1. स्थायी कक्षा की अवधारणा (Stationary Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित अवीकिरण कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (Angular Momentum, L) h/2π का पूर्ण गुणज होता है।
    L = m v r = (n h) / (2π) [जहाँ n = 1, 2, 3…]
  • 2. अभिकेंद्र बल (Centripetal Force): इलेक्ट्रॉन को वृत्ताकार कक्षा में घूमने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल, नाभिक (प्रोटॉन) तथा इलेक्ट्रॉन के बीच लगने वाले स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Coulomb Force) से प्राप्त होता है।
    (m v² / r) = [ 1 / (4π ε₀) ] × (e² / r²)
  • 3. आवृत्ति नियम (Frequency Condition): स्थायी कक्षा में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करता। जब इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षा (E₂) से निम्न कक्षा (E₁) में कूदता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन फोटॉन के रूप में होता है।
    E₂ – E₁ = h ν
प्र. 5 (ङ) ₆¹²C की प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा की गणना कीजिए। दिया है: ₆¹²C का द्रव्यमान = 12.0038 amu, प्रोटॉन = 1.0081 amu, न्यूट्रॉन = 1.0090 amu।

घटकों का विश्लेषण: ₆¹²C नाभिक में 6 प्रोटॉन तथा (12 – 6) = 6 न्यूट्रॉन हैं। कुल न्यूक्लियॉन = 12।

  • 6 प्रोटॉनों का द्रव्यमान = 6 × 1.0081 amu = 6.0486 amu
  • 6 न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान = 6 × 1.0090 amu = 6.0540 amu
  • न्यूक्लियॉनों का कुल द्रव्यमान = 6.0486 + 6.0540 = 12.1026 amu
  • दिया गया नाभिक का द्रव्यमान = 12.0038 amu

द्रव्यमान क्षति (Mass Defect, Δm):

Δm = 12.1026 – 12.0038 = 0.0988 amu

कुल बंधन ऊर्जा (Total Binding Energy):

E = Δm × 931.5 MeV = 0.0988 × 931.5 MeV = 92.0322 MeV

प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon):

प्रति न्यूक्लियॉन B.E. = 92.0322 MeV / 12 = 7.669 MeV/न्यूक्लियॉन (अथवा ≈ 7.67 MeV)

खण्ड ‘य’ (Section E) – दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्र. 6 (मुख्य) स्थिरवैद्युतिकी में गॉस की प्रमेय (Gauss’s Theorem) लिखिए एवं सिद्ध कीजिए। इसकी सहायता से एकसमान रूप से आवेशित अनन्त लम्बाई के सीधे तार के निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

1. गॉस की प्रमेय का कथन (Statement):

किसी बंद पृष्ठ (Closed Surface) से होकर गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स (Electrostatic Flux, ΦE), उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध (Enclosed) कुल परिद्ध आवेश (Q) का 1/ε₀ गुना होता है।

ΦE = ∫ E · dA = Q / ε₀

2. उपपत्ति (Proof of Gauss’s Law):

माना O बिंदु पर एक बिंदु आवेश +q रखा है तथा r त्रिज्या के एक गोले का गॉसियन पृष्ठ खींचते हैं।

  • गोलीय पृष्ठ पर बिंदु P पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता: E = [ 1 / (4π ε₀) ] × (q / r²)
  • अल्पांश क्षेत्रफल dA से गुजरने वाला फ्लक्स: dΦE = E · dA = E dA cos(0°) = E dA
  • सम्पूर्ण गोले के पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स: ΦE = ∫ E dA = E ∫ dA
  • चूँकि गोले का कुल पृष्ठ क्षेत्रफल ∫ dA = 4π r² होता है:
  • ΦE = [ 1 / (4π ε₀) × (q / r²) ] × (4π r²) = q / ε₀ (इति सिद्धम्)

3. अनन्त लम्बाई के आवेशित तार के कारण वैद्युत क्षेत्र (Application):

माना तार का रेखीय आवेश घनत्व (Linear Charge Density) λ है। r दूरी पर l लम्बाई का बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ (Cylindrical Gaussian Surface) लेते हैं।

  • बेलनाकार पृष्ठ के दोनों समतल वृत्तीय सिरों पर E और dA लंबवत (θ = 90°) हैं, अतः इनसे गुजरने वाला फ्लक्स शून्य होगा।
  • वक्र पृष्ठ (Curved Surface) पर E और dA की दिशा समान (θ = 0°) है।
  • वक्र पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स ΦE = E × (2π r l)
  • गॉस की प्रमेय से: ΦE = Q / ε₀ = (λ l) / ε₀ (चूँकि Q = λ l)
  • E × (2π r l) = (λ l) / ε₀
E = λ / (2π ε₀ r) या E = [ 1 / (4π ε₀) ] × (2λ / r)
💡 Tips: निगमन करते समय चित्र का विवरण एवं गॉसियन पृष्ठ की प्रकृति (बेलनाकार) का उल्लेख करना अत्यंत आवश्यक है।
प्र. 6 (अथवा) समांतर पट्ट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) की धारिता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए, जब पट्टियों के बीच t मोटाई की परावैद्युत (Dielectric) पट्टी रखी हो।

उपपत्ति (Derivation):

माना संधारित्र की पट्टियों का क्षेत्रफल A तथा उनके बीच की दूरी d है। पट्टियों पर आवेश +q एवं -q है (पृष्ठ आवेश घनत्व σ = q / A)। पट्टियों के बीच t मोटाई की K परावैद्युतांक वाली पट्टी रखी है।

  • पट्टियों के बीच निर्वात/वायु की मोटाई = (d – t)
  • परावैद्युत माध्यम की मोटाई = t
  • वायु में वैद्युत क्षेत्र: E₀ = σ / ε₀ = q / (A ε₀)
  • परावैद्युत पट्टी में वैद्युत क्षेत्र: E = σ / (K ε₀) = q / (K A ε₀)

पट्टियों के बीच कुल विभवांतर (V):

V = E₀ × (d – t) + E × t = [ q / (A ε₀) ] × (d – t) + [ q / (K A ε₀) ] × t

सामान्य पद q / (A ε₀) उभयनिष्ठ (Common) लेने पर:

V = [ q / (A ε₀) ] × [ (d – t) + (t / K) ]

धारिता की परिभाषा C = q / V से:

C = (A ε₀) / [ (d – t) + (t / K) ]

विशेष स्थितियाँ (Special Cases):

  • यदि पट्टी पूरी दूरी में भरी हो (t = d): C = K A ε₀ / d
  • यदि धातु की पट्टी रखी हो (K = ∞): C = A ε₀ / (d – t)
प्र. 7 (मुख्य) दो समांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल (F/L = μ₀ I₁ I₂ / 2π r) के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। इसके आधार पर 1 एम्पीयर (1 Ampere) की मानक परिभाषा दीजिए।

1. बल के व्यंजक का निगमन (Derivation):

माना दो सीधे समांतर चालक तार A व B परस्पर r दूरी पर निर्वात में रखे हैं, जिनमें क्रमशः I₁ तथा I₂ धाराएँ बह रही हैं।

  • चालक A में बहती धारा I₁ के कारण चालक B के किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र: B₁ = (μ₀ I₁) / (2π r)
  • चुंबकीय क्षेत्र B₁ में स्थित चालक B की L लंबाई पर लगने वाला लॉरेंज बल: F = I₂ L B₁ sin(90°)
  • B₁ का मान रखने पर: F = I₂ L × [ (μ₀ I₁) / (2π r) ]

चालक की प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाला बल (F/L):

F / L = (μ₀ / 2π) × (I₁ I₂ / r) न्यूटन/मीटर

धारा की दिशा समान होने पर आकर्षण बल (Attraction) तथा दिशा विपरीत होने पर प्रतिकर्षण बल (Repulsion) लगता है।

2. 1 एम्पीयर की मानक परिभाषा (Standard Definition of 1 Ampere):

यदि सूत्र में I₁ = I₂ = 1 A, r = 1 m तथा μ₀/2π = 2 × 10⁻⁷ N/A² रखें:

F / L = 2 × 10⁻⁷ न्यूटन/मीटर

परिभाषा: 1 एम्पीयर वह नियत धारा है जो निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर रखे दो अनन्त लम्बाई के सीधे समांतर चालकों में प्रवाहित करने पर उनके बीच प्रति मीटर लम्बाई पर 2 × 10⁻⁷ न्यूटन का आकर्षण या प्रतिकर्षण बल उत्पन्न करती है।

प्र. 7 (अथवा) श्रेणी L-C-R प्रत्यावर्ती परिपथ के लिए फेजर आरेख (Phasor Diagram) खींचकर परिपथ की प्रतिबाधा (Impedance) एवं कलान्तर (Phase Difference) का सूत्र प्राप्त कीजिए।

1. फेजर आरेख एवं विभवांतर विश्लेषण:

श्रेणी परिपथ में धारा I समान होती है। प्रेरकत्व का विभवांतर VL धारा से 90° अग्रगामी, धारिता का विभवांतर VC धारा से 90° पश्चगामी तथा प्रतिरोध का विभवांतर VR धारा की कला में होता है।

  • परिणामी परिणामी कलातीत विभवांतर = (VL – VC)
  • प्रतिरोध विभवांतर = VR
  • पाइथागोरस प्रमेय से परिणामी वोल्टता: V² = VR² + (VL – VC)²
  • मान रखने पर: V² = (I R)² + (I XL – I XC)² = I² [ R² + (XL – XC)² ]

2. प्रतिबाधा का सूत्र (Impedance, Z):

Z = V / I = √[ R² + (XL – XC)² ] = √[ R² + (ωL – 1/ωC)² ]

3. कलान्तर का सूत्र (Phase Angle, ϕ):

tan(ϕ) = (VL – VC) / VR = (XL – XC) / R = (ωL – 1/ωC) / R
प्र. 8 (मुख्य) हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धांत (Huygens’ Secondary Wavelets Theory) के आधार पर प्रकाश के अपवर्तन के नियमों (Snell’s Law) की व्याख्या कीजिए।

1. अपवर्तन का निगमन (Derivation of Refraction):

माना एक समतल तरंगाग्र (Plane Wavefront) AB दो माध्यमों को पृथक करने वाले पृष्ठ ZZ’ पर आपतन कोण i पर आपतित होता है। प्रथम माध्यम में प्रकाश की चाल v₁ तथा द्वितीय माध्यम में v₂ है।

  • तरंगाग्र के बिंदु B को पृष्ठ के बिंदु A’ तक पहुँचने में लगा समय t है, अतः BA’ = v₁ t।
  • इतने ही समय t में बिंदु A से चलने वाली द्वितीयक तरंगिका द्वितीय माध्यम में दूरी AB’ = v₂ t तय करती है।
  • A’B’ अपवर्तित तरंगाग्र (Refracted Wavefront) है तथा अपवर्तन कोण r है।

समकोण त्रिभुज ΔABA’ तथा ΔAA’B’ से:

  • sin(i) = BA’ / AA’ = (v₁ t) / AA’
  • sin(r) = AB’ / AA’ = (v₂ t) / AA’

भाग देने पर:

sin(i) / sin(r) = (v₁ t) / (v₂ t) = v₁ / v₂ = ₁n₂ (नियतांक)

यह स्नेल का नियम (Snell’s Law) है। चूँकि आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही समतल में होते हैं, अतः अपवर्तन के दोनों नियमों की पुष्टि होती है।

प्र. 8 (अथवा) यंग के द्वि-झिरी (Young’s Double Slit) प्रयोग में दीप्त एवं अदीप्त फ्रिंजों की चौड़ाई के लिए व्यंजक (β = λ D / d) व्युत्पन्न कीजिए।

व्युत्पत्ति (Derivation):

माना दो संकीर्ण झिरियों S₁ व S₂ के बीच की दूरी d है तथा पर्दे की दूरी D है। पर्दे पर केंद्रीय बिंदु O से x दूरी पर स्थित बिंदु P पर पथांतर S₂P – S₁P = (x d) / D होता है।

1. दीप्त फ्रिंजों की स्थिति (Bright Fringes):

संपोषी व्यतिकरण हेतु पथांतर (x d) / D = m λ ⇒ xm = (m λ D) / d (जहाँ m = 0, 1, 2…)

दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी (फ्रिंज चौड़ाई, β):

β = xm+1 – xm = [ (m + 1) λ D / d ] – [ m λ D / d ] = λ D / d

2. अदीप्त फ्रिंजों की स्थिति (Dark Fringes):

विनाशी व्यतिकरण हेतु पथांतर (x d) / D = (2m – 1) λ / 2। इससे भी क्रमागत अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी β = λ D / d ही प्राप्त होती है।

प्र. 9 (मुख्य) p-n संधि डायोड (p-n Junction Diode) की कार्यविधि अग्र एवं उत्क्रम अभिनति में समझाइए। परिपथ आरेख बनाकर p-n संधि डायोड का पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier) के रूप में प्रयोग समझाइए।

1. अभिनति प्रकार (Biasing Types):

  • अग्र अभिनति (Forward Bias): p-क्षेत्र को बैटरी के धन ध्रुव (+) तथा n-क्षेत्र को ऋण ध्रुव (-) से जोड़ा जाता है। अवक्षय परत (Depletion Layer) की चौड़ाई घटती है और परिपथ में मुख्य धारा (mA) बहती है।
  • उत्क्रम अभिनति (Reverse Bias): p-क्षेत्र को ऋण (-) तथा n-क्षेत्र को धन (+) से जोड़ा जाता है। अवक्षय परत की चौड़ाई बढ़ती है और केवल नगण्य सूक्ष्म धारा (µA) बहती है।

2. पूर्ण तरंग दिष्टकारी कार्यविधि (Full Wave Rectifier Working):

इसमें मध्य-निकासी ट्रांसफॉर्मर (Center-Tap Transformer) तथा दो डायोड D₁ व D₂ का उपयोग किया जाता है।

  • प्रथम अर्धचक्र (Positive Half Cycle): सिरा A धनात्मक तथा B ऋणात्मक होता है। डायोड D₁ अग्र अभिनत होकर चालन करता है, जबकि D₂ उत्क्रम अभिनत रहता है। लोड RL में धारा X से Y की ओर बहती है।
  • द्वितीय अर्धचक्र (Negative Half Cycle): सिरा A ऋणात्मक तथा B धनात्मक होता है। डायोड D₂ अग्र अभिनत होकर चालन करता है तथा D₁ बंद रहता है। लोड RL में धारा पुनः X से Y की ओर ही बहती है।

अतः प्रत्यावर्ती धारा के दोनों अर्धचक्रों में लोड से एक ही दिशा में दिष्ट धारा प्राप्त होती है।

प्र. 9 (अथवा) नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) तथा नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की उदाहरण एवं संतुलित रासायनिक समीकरण सहित व्याख्या कीजिए।

1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission):

वह प्रक्रिया जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरैनियम-235) मंद गति के न्यूट्रॉन को अवशोषित कर लगभग दो बराबर हल्के नाभिकों में टूट जाता है तथा अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।

₀n¹ + ₉₂U²³⁵ ⟶ [₉₂U²³⁶] ⟶ ₅₆Ba¹⁴⁴ + ₃₆Kr⁸⁹ + 3 ₀n¹ + Q (200 MeV)

2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion):

वह प्रक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अति हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक) अत्यधिक उच्च ताप एवं दाब पर परस्पर संयुक्त होकर एक भारी एवं स्थायी नाभिक बनाते हैं।

₁H² (ड्यूटीरियम) + ₁H³ (ट्राइटियम) ⟶ ₂He⁴ (हीलीयम) + ₀n¹ + 17.6 MeV

सूर्य तथा तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन ही है।

Brijesh K Yadav
Author & Educator

Brijesh K Yadav

Brijesh Kumar Yadav is an experienced teacher and content creator with over 10 years of professional experience. He is the founder of BestFunda.com, a platform dedicated to guiding students from 10th, 12th, and graduation levels. Brijesh provides valuable career advice through blogs, videos, and social media. As an entrepreneur and career coach, he is passionate about helping students make informed decisions and build successful futures.

Leave a Comment