UP Board 10th Math Model Paper 2027 Solution PDF Download.

UP Board 10th Math Model Paper 2027 Solution: यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं के गणित पेपर 2027 की बेहतर तैयारी के लिए यहाँ से ऑफिशियल मॉडल पेपर का पूरा सॉल्यूशन पीडीएफ डाउनलोड करें। इस पोस्ट में आपको नए परीक्षा पैटर्न के हिसाब से 70 अंकों का पूरा पेपर, उसके सटीक स्टेप-बाय-स्टेप हल और बहुविकल्पीय से लेकर विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों को हल करने का सही तरीका मिलेगा, ताकि बोर्ड परीक्षा में आपका एक भी नंबर न कटे।

CBSE/UP Board Class 10 Maths Paper Solution

यूपी बोर्ड कक्षा 10 गणित मॉडल पेपर 2027 – संपूर्ण हल सहित PDF

UP Board Class 10th Maths – Full Solved Paper 2026-27

खण्ड ‘अ’ (OMR आधारित 20 बहुविकल्पीय प्रश्न / 20 MCQs – कुल अंक: 20)
खण्ड ‘अ’ – प्रश्न संख्या 1 से 20 तक का चरणबद्ध हल
प्रश्न 1. किन्हीं दो संख्याओं का LCM 60 तथा HCF 3 है। एक संख्या 12 है तो दूसरी संख्या होगी-
(A) 20
(B) 15
(C) 180
(D) 36
चरणबद्ध हल:
दिया है: LCM = 60, HCF = 3, पहली संख्या = 12
प्रयुक्त सूत्र: पहली संख्या × दूसरी संख्या = LCM × HCF
गणना: 12 × दूसरी संख्या = 60 × 3 = 180
दूसरी संख्या = 18012 = 15
अंतिम उत्तर: (B) 15
प्रश्न 2. नीचे दिए गए ग्राफ में शून्यकों की संख्या है-
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
चरणबद्ध हल:
स्पष्टीकरण: किसी भी बहुपद के आलेख (ग्राफ) में X-अक्ष को प्रतिच्छेद करने वाले बिंदुओं की संख्या ही उस बहुपद के शून्यकों की संख्या होती है।
दिया गया परवलयाकार (Parabola) आलेख X-अक्ष को स्पष्टतः 2 बिंदुओं पर काटता है। अतः इसके शून्यकों की संख्या 2 होगी।
अंतिम उत्तर: (B) 2
प्रश्न 3. संख्या n2 – 1, 8 से विभाज्य होती है, यदि n है एक-
(A) पूर्णांक
(B) प्राकृत संख्या
(C) विषम संख्या
(D) सम संख्या
चरणबद्ध हल:
जाँच: यदि हम n के स्थान पर विषम संख्याएँ (1, 3, 5, 7, …) रखते हैं:
यदि n = 1 ⇒ 12 – 1 = 0 (8 से विभाज्य है)
यदि n = 3 ⇒ 32 – 1 = 8 (8 से विभाज्य है)
यदि n = 5 ⇒ 52 – 1 = 24 (8 से विभाज्य है)
अतः संख्या n2 – 1 सदैव 8 से विभाज्य होगी जब n एक विषम संख्या हो।
अंतिम उत्तर: (C) विषम संख्या
प्रश्न 4. रेखाएं a1x + b1y + c1 = 0 तथा a2x + b2y + c2 = 0 का कोई हल नहीं होगा, यदि-
(A) a1a2 = b1b2 ≠ c1c2
(B) a1a2 ≠ b1b2 ≠ c1c2
(C) a1a2 ≠ b1b2
(D) a1a2 = b1b2 = c1c2
चरणबद्ध हल:
शर्त: दो रैखिक समीकरणों द्वारा निरूपित रेखाएँ समांतर होने पर कोई हल नहीं होता है।
समांतर रेखाओं (असंगत युग्म) की प्रतिबंध शर्त: a1a2 = b1b2 ≠ c1c2 होती है।
अंतिम उत्तर: (A) a1a2 = b1b2 ≠ c1c2
प्रश्न 5. दिए गए कथन में कौन सा सत्य है-
(A) दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल सदैव अपरिमेय संख्या होती है।
(B) दो परिमेय संख्याओं का योगफल सदैव परिमेय संख्या होती है।
(C) दो अपरिमेय संख्याओं का योगफल सदैव अपरिमेय संख्या होती है।
(D) एक परिमेय तथा एक अपरिमेय संख्याओं का योगफल सदैव परिमेय संख्या होती है।
चरणबद्ध हल:
स्पष्टीकरण: गणितीय नियम (Closure Property) के अनुसार, किन्हीं दो परिमेय संख्याओं का योगफल सदैव एक परिमेय संख्या ही प्राप्त होता है। (जैसे 12 + 13 = 56 जो कि परिमेय है)।
अंतिम उत्तर: (B) दो परिमेय संख्याओं का योगफल सदैव परिमेय संख्या होती है।
प्रश्न 6. द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के बारे में निम्न कथन पर विचार कीजिये एवं दिए गए विकल्प में से सही उत्तर का चयन कीजिये-
(i) समीकरण के दो भिन्न वास्तविक मूल होते हैं, यदि b2 – 4ac > 0
(ii) समीकरण के दो बराबर मूल होते हैं, यदि b2 – 4ac = 0
(iii) समीकरण का कोई वास्तविक मूल नहीं होता है, यदि b2 – 4ac < 0
(iv) समीकरण के दो से अधिक वास्तविक मूल होते हैं, यदि b2 – 4ac > 0
(A) केवल (i) और (ii) सही हैं।
(B) केवल (ii), (iii) और (iv) सही हैं।
(C) केवल (iii) और (iv) सही हैं।
(D) केवल (i), (ii) और (iii) सही हैं।
चरणबद्ध हल:
नियम (विविक्तकर D = b2 – 4ac):
1. D > 0 ⇒ मूल वास्तविक और भिन्न होते हैं (कथन i सत्य)।
2. D = 0 ⇒ मूल वास्तविक और समान होते हैं (कथन ii सत्य)।
3. D < 0 ⇒ कोई वास्तविक मूल नहीं होता (कथन iii सत्य)।
4. द्विघात समीकरण की घात 2 होने के कारण इसके अधिकतम 2 ही मूल हो सकते हैं, अतः (iv) असत्य है।
अंतिम उत्तर: (D) केवल (i), (ii) और (iii) सही हैं।
प्रश्न 7. समांतर श्रेणी 10, 7, 4, …… का 15वाँ पद है-
(A) -52
(B) -32
(C) -42
(D) -30
चरणबद्ध हल:
दिया है: प्रथम पद a = 10, सार्व अंतर d = 7 – 10 = -3, पद संख्या n = 15
प्रयुक्त सूत्र: an = a + (n – 1)d
गणना: a15 = 10 + (15 – 1)(-3) = 10 + 14(-3) = 10 – 42 = -32
अंतिम उत्तर: (B) -32
प्रश्न 8. बिंदु (5, -2), (6, 4) और (7, -2) निम्नलिखित के शीर्ष हैं-
(A) समकोण त्रिभुज
(B) समद्विबाहु त्रिभुज
(C) समबाहु त्रिभुज
(D) विषमबाहु त्रिभुज
चरणबद्ध हल:
माना बिंदु: A(5, -2), B(6, 4), C(7, -2)
दूरी सूत्र: d = √[(x2 – x1)2 + (y2 – y1)2]
AB = √[(6 – 5)2 + (4 – (-2))2] = √[12 + 62] = √[1 + 36] = √37
BC = √[(7 – 6)2 + (-2 – 4)2] = √[12 + (-6)2] = √[1 + 36] = √37
AC = √[(7 – 5)2 + (-2 – (-2))2] = √[22 + 0] = 2
चूँकि AB = BC = √37 है, अर्थात दो भुजाएँ बराबर हैं। अतः यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
अंतिम उत्तर: (B) समद्विबाहु त्रिभुज
प्रश्न 9. “दो समानकोणिक त्रिभुजों में उनकी संगत भुजाओं का अनुपात सदैव समान रहता है”— यह कथन किसका है?
(A) थेल्स का
(B) पाइथागोरस का
(C) बोधायन का
(D) हेरोन का
चरणबद्ध हल:
तथ्य: प्रसिद्ध महान यूनानी गणितज्ञ थेल्स (Thales) ने दो समानकोणिक त्रिभुजों (Equiangular Triangles) की संगत भुजाओं के समानुपात के संबंध में यह ऐतिहासिक कथन दिया था।
अंतिम उत्तर: (A) थेल्स का
प्रश्न 10. दिए गए चित्र में O केंद्र वाले वृत्त पर स्पर्श रेखाएं PA और PB इस प्रकार हैं कि ∠APB = 50° है, तो ∠OAB बराबर है—
(A) 25°
(B) 30°
(C) 40°
(D) 50°
चरणबद्ध हल:
स्पष्टीकरण: बाह्य बिंदु P से वृत्त पर खींची गई स्पर्श रेखाएँ बराबर होती हैं (PA = PB)।
⇒ ΔPAB में ∠PAB = ∠PBA
ΔPAB के तीनों कोणों का योग: ∠APB + ∠PAB + ∠PBA = 180°
50° + 2∠PAB = 180° ⇒ 2∠PAB = 130° ⇒ ∠PAB = 65°
चूँकि त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लम्ब होती है, ∠OAP = 90°।
अतः ∠OAB = ∠OAP – ∠PAB = 90° – 65° = 25°
अंतिम उत्तर: (A) 25°
प्रश्न 11. 2 tan 30°1 – tan2 30° का मान है-
(A) cos 60°
(B) sin 60°
(C) tan 60°
(D) sin 30°
चरणबद्ध हल:
प्रयुक्त सूत्र: 2 tan θ1 – tan2 θ = tan 2θ
यहाँ θ = 30° रखने पर: tan(2 × 30°) = tan 60°
वैकल्पिक मान विधि: tan 30° = 1√3
व्यंजक = 2 × (1√3)1 – (1√3)2 = 2√31 – 13 = 2√323 = √3 = tan 60°
अंतिम उत्तर: (C) tan 60°
प्रश्न 12. त्रिज्या r तथा कोण θ° वाले त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल होगा-
(A) θ180 × πr2
(B) θ180 × 2πr
(C) θ720 × 2πr2
(D) θ360 × 2πr
चरणबद्ध हल:
प्रयुक्त सूत्र: त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = θ360 × πr2
विकल्प (C) का सरलीकरण करने पर: θ720 × 2πr2 = θ360 × πr2 प्राप्त होता है।
अंतिम उत्तर: (C) θ720 × 2πr2
प्रश्न 13. गिल्ली-डंडे के खेल में गिल्ली का आकार निम्नलिखित का संयोजन है-
(A) दो बेलन
(B) एक शंकु और एक बेलन
(C) दो शंकु और एक बेलन
(D) दो बेलन और एक शंकु
चरणबद्ध हल:
संरचना: गिल्ली का मध्य भाग बेलनाकार (Cylindrical) होता है तथा इसके दोनों सिरों (Ends) पर एक-एक शंकु (Cone) का आकार बना होता है।
अतः गिल्ली मुख्य रूप से दो शंकु और एक बेलन का संयोजन है।
अंतिम उत्तर: (C) दो शंकु और एक बेलन
प्रश्न 14. नीचे कुछ कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात और उनके मान दिए हुए हैं-
a. sin 90° ⇒ iii. 1
b. cos 90° ⇒ iv. 0
c. tan 60° ⇒ ii. √3
d. sec 45° ⇒ i. √2
(A) a-ii, b-iii, c-iv, d-i
(B) a-i, b-ii, c-iii, d-iv
(C) a-iii, b-iv, c-ii, d-i
(D) a-iv, b-i, c-iii, d-ii
चरणबद्ध हल:
त्रिकोणमितीय मान तालिका से:
1. sin 90° = 1 ⇒ a-iii
2. cos 90° = 0 ⇒ b-iv
3. tan 60° = √3 ⇒ c-ii
4. sec 45° = √2 ⇒ d-i
अंतिम उत्तर: (C) a-iii, b-iv, c-ii, d-i
प्रश्न 15. किसी समय पर एक खंभे की छाया, खंभे की लंबाई की √3 गुनी है तो सूर्य का उन्नयन कोण होगा-
(A) 30°
(B) 60°
(C) 45°
(D) 90°
चरणबद्ध हल:
माना: खंभे की ऊँचाई (लम्ब) = h, छाया की लंबाई (आधार) = h√3
प्रयुक्त सूत्र: tan θ = लम्बआधार
tan θ = hh√3 = 1√3
चूँकि tan 30° = 1√3, अतः θ = 30°
अंतिम उत्तर: (A) 30°
प्रश्न 16. (1 + tanθ + secθ)(1 + cotθ – cosecθ) का मान होगा-
(A) 0
(B) 1
(C) 2
(D) -1
चरणबद्ध हल:
sin और cos के पदों में बदलने पर:
= [1 + sinθcosθ + 1cosθ] × [1 + cosθsinθ – 1sinθ]
= [cosθ + sinθ + 1cosθ] × [sinθ + cosθ – 1sinθ]
= (sinθ + cosθ)2 – 12sinθ cosθ = 1 + 2 sinθ cosθ – 1sinθ cosθ = 2 sinθ cosθsinθ cosθ = 2
अंतिम उत्तर: (C) 2
प्रश्न 17. निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या किसी घटना की प्रायिकता नहीं हो सकती?
(A) 23
(B) -1.5
(C) 15%
(D) 0.7
चरणबद्ध हल:
नियम: किसी भी घटना E की प्रायिकता P(E) सदैव 0 और 1 के मध्य होती है (0 ≤ P(E) ≤ 1)।
प्रायिकता का मान कभी भी ऋणात्मक (< 0) या 1 से अधिक नहीं हो सकता। अतः -1.5 किसी घटना की प्रायिकता नहीं हो सकती।
अंतिम उत्तर: (B) -1.5
प्रश्न 18. संचयी बारंबारता सारणी की रचना करना निम्नलिखित में उपयोगी होता है-
(A) माध्य
(B) माध्यिका
(C) बहुलक
(D) उपरोक्त सभी
चरणबद्ध हल:
तथ्य: वर्गीकृत आँकड़ों का माध्यक/माध्यिका (Median) ज्ञात करने के लिए संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency – cf) सारणी तैयार करना अनिवार्य होता है।
अंतिम उत्तर: (B) माध्यिका
प्रश्न 19. निम्नलिखित सारणी का माध्यिका वर्ग होगा-
वर्ग अंतराल 0-5 5-10 10-15 15-20 20-25
बारंबारता (f) 6 4 6 10 4
(A) 15-20
(B) 10-15
(C) 0-5
(D) 20-25
चरणबद्ध हल:
संचयी बारंबारता (cf) ज्ञात करने पर:
0-5: cf = 6 | 5-10: cf = 10 | 10-15: cf = 16 | 15-20: cf = 26 | 20-25: cf = 30
कुल बारंबारता N = 30 ⇒ N2 = 15
15 से ठीक बड़ी संचयी बारंबारता 16 है, जिसका संगत वर्ग अंतराल 10-15 है।
अंतिम उत्तर: (B) 10-15
प्रश्न 20. यदि किसी बंटन का माध्य 16 और बहुलक 13 हो, तो बंटन की माध्यिका होगी-
(A) 13
(B) 15
(C) 208
(D) 14
चरणबद्ध हल:
अनुभवजन्य सूत्र (Empirical Relationship): बहुलक = 3 × माध्यिका – 2 × माध्य
13 = 3 × माध्यिका – 2 × 16
13 = 3 × माध्यिका – 32
3 × माध्यिका = 13 + 32 = 45
माध्यिका = 453 = 15
अंतिम उत्तर: (B) 15
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 1 (अति लघु उत्तरीय प्रश्न – सभी उप-प्रश्न | कुल अंक: 12)
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 1 के सभी (क से च तक) विस्तृत चरणबद्ध हल
प्रश्न 1 (क). दर्शाइए कि 3√2 एक अपरिमेय संख्या है। [2 अंक]
दिया है: संख्या = 3√2
सिद्ध करना है: 3√2 एक अपरिमेय संख्या है।
चरणबद्ध हल:
1. माना इसके विपरीत 3√2 एक परिमेय संख्या है।
2. अतः हम दो सह-अभाज्य (co-prime) पूर्णांक a और b (जहाँ b ≠ 0) इस प्रकार ले सकते हैं कि:
3√2 = ab
3. दोनों पक्षों को 3 से विभाजित करने पर:
√2 = a3b
4. चूँकि a, b और 3 सभी पूर्णांक हैं, इसलिए a3b एक परिमेय संख्या है।
5. इसके अनुसार √2 भी एक परिमेय संख्या होनी चाहिए।
6. परंतु यह इस सर्वमान्य तथ्य का विरोध करता है कि √2 एक अपरिमेय संख्या है।
7. यह विरोधाभास हमारी त्रुटिपूर्ण परिकल्पना के कारण प्राप्त हुआ है कि 3√2 एक परिमेय संख्या है।
अंतिम उत्तर: इति सिद्धम् (3√2 एक अपरिमेय संख्या है)।
प्रश्न 1 (ख). बिंदुओं (4, -1) और (-2, -3) को जोड़ने वाले रेखाखंड को सम-त्रिभाजित करने वाले बिंदुओं के निर्देशांक ज्ञात कीजिए। [2 अंक]
दिया है: बिंदु A(4, -1) तथा बिंदु B(-2, -3)
ज्ञात करना है: रेखाखंड AB को सम-त्रिभाजित (Trisect) करने वाले बिंदुओं P और Q के निर्देशांक।
प्रयुक्त सूत्र: विभाजन सूत्र (Section Formula): ( m1x2 + m2x1m1 + m2, m1y2 + m2y1m1 + m2 )
चरणबद्ध हल:
माना बिंदु P और Q रेखाखंड AB को तीन बराबर भागों (AP = PQ = QB) में बांटते हैं।
1. बिंदु P के निर्देशांक (अनुपात m1 : m2 = 1 : 2):
xP = 1(-2) + 2(4)1 + 2 = -2 + 83 = 63 = 2
yP = 1(-3) + 2(-1)1 + 2 = -3 – 23 = –53
अतः बिंदु P के निर्देशांक = (2, -5/3)
2. बिंदु Q के निर्देशांक (अनुपात m1 : m2 = 2 : 1):
xQ = 2(-2) + 1(4)2 + 1 = -4 + 43 = 0
yQ = 2(-3) + 1(-1)2 + 1 = -6 – 13 = –73
अतः बिंदु Q के निर्देशांक = (0, -7/3)
अंतिम उत्तर: सम-त्रिभाजन बिंदुओं के निर्देशांक (2, -5/3) तथा (0, -7/3) हैं।
प्रश्न 1 (ग). “कोण A के किसी मान के लिए sec A = 125 है” कथन सत्य है या असत्य। कारण सहित अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए। [2 अंक]
दिया है: व्यंजक sec A = 125
ज्ञात करना है: कथन की सत्यता / असत्यता का कारण सहित स्पष्टीकरण।
प्रयुक्त सूत्र: समकोण त्रिभुज में, sec A = कर्णआधार
चरणबद्ध हल:
1. किसी भी समकोण त्रिभुज में कर्ण (Hypotenuse) सबसे लंबी भुजा होती है।
2. अतः सर्वदा कर्ण > आधार होता है।
3. sec A = 125 में कर्ण = 12 तथा आधार = 5 है।
4. चूँकि 12 > 5 है, अर्थात कर्ण का मान आधार से अधिक है (sec A = 2.4 ≥ 1)।
5. इसलिए कोण A के किसी मान के लिए sec A = 125 संभव है।
अंतिम उत्तर: दिया गया कथन सत्य है।
प्रश्न 1 (घ). एक वृत्त के चतुर्थांश (Quadrant) का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसकी परिधि 22 सेमी० है। [2 अंक]
दिया है: वृत्त की परिधि = 22 सेमी
ज्ञात करना है: चतुर्थांश का क्षेत्रफल
प्रयुक्त सूत्र: परिधि = 2πr, चतुर्थांश का क्षेत्रफल = 14 πr2
चरणबद्ध हल:
1. माना वृत्त की त्रिज्या r सेमी है।
2. 2 × 227 × r = 22
⇒ r = 22 × 72 × 22 = 72 सेमी
3. चतुर्थांश का क्षेत्रफल = 14 × 227 × (72)2
= 14 × 227 × 494 = 11 × 78 = 778 सेमी2
अंतिम उत्तर: चतुर्थांश का क्षेत्रफल = 778 सेमी2 (या 9.625 वर्ग सेमी) है।
प्रश्न 1 (ङ). यदि P(E) = 0.05 है, तो ‘E नहीं’ की प्रायिकता क्या है? [2 अंक]
दिया है: P(E) = 0.05
ज्ञात करना है: P(E नहीं) अर्थात P(E̅)
प्रयुक्त सूत्र: P(E) + P(E̅) = 1
चरणबद्ध हल:
P(E̅) = 1 – P(E)
P(E̅) = 1 – 0.05 = 0.95
अंतिम उत्तर: ‘E नहीं’ की प्रायिकता = 0.95 है।
प्रश्न 1 (च). यदि बिंदु Q(0,1), बिंदुओं P(5,-3) और R(x,6) से समदूरस्थ है, तो x के मान ज्ञात कीजिए। [2 अंक]
दिया है: बिंदु Q(0, 1), P(5, -3) तथा R(x, 6), जहाँ QP = QR है।
ज्ञात करना है: x का मान
प्रयुक्त सूत्र: दूरी सूत्र = √[(x2 – x1)2 + (y2 – y1)2]
चरणबद्ध हल:
1. चूँकि बिंदु Q, बिंदुओं P और R से समदूरस्थ है: QP = QR ⇒ QP2 = QR2
2. QP2 = (5 – 0)2 + (-3 – 1)2 = 52 + (-4)2 = 25 + 16 = 41
3. QR2 = (x – 0)2 + (6 – 1)2 = x2 + 52 = x2 + 25
4. QP2 = QR2 मान रखने पर:
41 = x2 + 25
x2 = 41 – 25 = 16
x = ±√16 = ±4
अंतिम उत्तर: x का मान ±4 (अर्थात +4 या -4) है।
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 2 (लघु उत्तरीय प्रश्न – किन्हीं पाँच खण्डों के विस्तृत हल | कुल अंक: 20)
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 2 के सभी (क से च तक) विस्तृत चरणबद्ध हल
प्रश्न 2 (क). दो संपूरक कोणों में बड़ा कोण छोटे कोण से 18° अधिक है। उन्हें ज्ञात कीजिए। [4 अंक]
दिया है: दो कोण संपूरक (Supplementary) हैं तथा बड़ा कोण छोटे कोण से 18° अधिक है।
ज्ञात करना है: दोनों कोणों का मान।
प्रयुक्त सूत्र: दो संपूरक कोणों का योगफल = 180° होता है।
चरणबद्ध हल:
1. माना बड़ा कोण = x° तथा छोटा कोण = y°
2. चूँकि दोनों कोण संपूरक हैं:
x + y = 180°   — (समीकरण 1)
3. प्रश्नानुसार (बड़ा कोण छोटे कोण से 18° अधिक है):
x – y = 18°   — (समीकरण 2)
4. समीकरण (1) और समीकरण (2) को जोड़ने पर:
(x + y) + (x – y) = 180° + 18°
2x = 198° ⇒ x = 1982 = 99°
5. x का मान समीकरण (1) में रखने पर:
99° + y = 180°
y = 180° – 99° = 81°
अंतिम उत्तर: बड़ा कोण = 99° तथा छोटा कोण = 81° है।
प्रश्न 2 (ख). समलंब चतुर्भुज ABCD, जिसमें AB || DC है, के विकर्ण AC और BD परस्पर O पर प्रतिच्छेद करते हैं। दो त्रिभुजों की समरूपता कसौटी का प्रयोग करते हुए, दर्शाइए कि OAOC = OBOD है। [4 अंक]
दिया है: समलंब ABCD में AB || DC, विकर्ण AC और BD बिंदु O पर प्रतिच्छेद करते हैं।
सिद्ध करना है: OAOC = OBOD
प्रयुक्त प्रमेय: AA (कोण-कोण) समरूपता कसौटी।
चरणबद्ध हल:
1. त्रिभुज AOB (ΔAOB) और त्रिभुज COD (ΔCOD) में विचार करने पर:
2. ∠AOB = ∠COD (शीर्षाभिमुख कोण / Vertically Opposite Angles)
3. ∠OAB = ∠OCD (एकांतर अंतः कोण / Alternate Interior Angles, क्योंकि AB || DC तथा तिर्यक रेखा AC है)
4. ∠OBA = ∠ODC (एकांतर अंतः कोण, क्योंकि AB || DC तथा तिर्यक रेखा BD है)
5. अतः AA समरूपता कसौटी से:
ΔAOB ~ ΔCOD
6. हम जानते हैं कि दो समरूप त्रिभुजों की संगत भुजाएँ समानुपाती होती हैं:
OAOC = OBOD
अंतिम उत्तर: इति सिद्धम् (OAOC = OBOD)।
प्रश्न 2 (ग). द्विघात बहुपद 3x2 – x – 4 के शून्यक ज्ञात कीजिए। शून्यक तथा गुणांकों के बीच के संबंध की सत्यता की जाँच कीजिये। [4 अंक]
दिया है: द्विघात बहुपद P(x) = 3x2 – x – 4
ज्ञात करना है: शून्यक तथा गुणांकों के मध्य संबंध की सत्यता।
प्रयुक्त सूत्र: α + β = –ba तथा α × β = ca
चरणबद्ध हल:
भाग 1: शून्यक ज्ञात करना:
3x2 – x – 4 = 0
मध्य पद को विभाजित करने पर (3 × -4 = -12, -4 + 3 = -1):
3x2 – 4x + 3x – 4 = 0
x(3x – 4) + 1(3x – 4) = 0
(3x – 4)(x + 1) = 0
यदि 3x – 4 = 0 ⇒ x = 43
यदि x + 1 = 0 ⇒ x = -1
अतः बहुपद के दो शून्यक α = 43 तथा β = -1 हैं।
भाग 2: संबंध की सत्यता की जाँच:
मानक रूप ax2 + bx + c से तुलना करने पर: a = 3, b = -1, c = -4
1. शून्यकों का योगफल (α + β):
α + β = 43 + (-1) = 4 – 33 = 13
–ba = –(-1)3 = 13 ⇒ (α + β = –ba सत्य है)
2. शून्यकों का गुणनफल (α × β):
α × β = (43) × (-1) = –43
ca = –43 ⇒ (α × β = ca सत्य है)
अंतिम उत्तर: शून्यक = 43, -1 हैं तथा गुणांकों के साथ संबंधों की सत्यता प्रमाणित हुई।
प्रश्न 2 (घ). सिद्ध कीजिए कि स्पर्श बिंदु से स्पर्श रेखा पर खींचा गया लंब वृत्त के केंद्र से होकर जाता है। [4 अंक]
दिया है: केंद्र O वाला एक वृत्त, जिसकी स्पर्श रेखा AB वृत्त को बिंदु P पर स्पर्श करती है। बिंदु P पर AB के लम्बवत एक रेखा L खींची गई है।
सिद्ध करना है: स्पर्श बिंदु P पर खींचा गया लंब L वृत्त के केंद्र O से होकर जाता है।
चरणबद्ध हल (विरोधाभास उपपत्ति):
1. माना (विरोधाभास हेतु) बिंदु P पर खींचा गया लंब L केंद्र O से होकर नहीं जाता, बल्कि किसी अन्य बिंदु O’ से होकर जाता है।
2. इसके अनुसार, O’P ⊥ AB होगी।
⇒ ∠O’PB = 90°   — (समीकरण 1)
3. परंतु हम जानते हैं कि वृत्त के केंद्र O को स्पर्श बिंदु P से मिलाने वाली रेखा (त्रिज्या OP) स्पर्श रेखा पर लंब होती है (प्रमेय से)।
⇒ OP ⊥ AB ⇒ ∠OPB = 90°   — (समीकरण 2)
4. समीकरण (1) और (2) की तुलना करने पर:
∠O’PB = ∠OPB = 90°
5. यह केवल तभी संभव हो सकता है जब रेखा खंड O’P तथा OP संपाती (Coincide) हों, अर्थात बिंदु O’ और O एक ही बिंदु हों।
6. अतः स्पर्श बिंदु से स्पर्श रेखा पर खींचा गया लंब सदैव वृत्त के केंद्र से होकर ही गुजरता है।
अंतिम उत्तर: इति सिद्धम्।
प्रश्न 2 (ङ). नीचे दिया हुआ बंटन एक कक्षा के 30 विद्यार्थियों के भार दर्शा रहा है। विद्यार्थियों का माध्यक भार ज्ञात कीजिए। [4 अंक]
भार (किग्रा में) 40-45 45-50 50-55 55-60 60-65 65-70 70-75
छात्र संख्या (f) 2 3 8 6 6 3 2
प्रयुक्त सूत्र: माध्यक = l + [ N2 – cff ] × h
चरणबद्ध हल:
संचयी बारंबारता (cf) की सारणी:
वर्ग अंतराल (भार) बारंबारता (f) संचयी बारंबारता (cf)
40-4522
45-5035
50-55813
55-60 (माध्यक वर्ग)6 (f)19
60-65625
65-70328
70-75230
1. कुल बारंबारता N = Σf = 30 ⇒ N2 = 302 = 15
2. 15 से ठीक बड़ी संचयी बारंबारता 19 है, जिसका संगत वर्ग 55-60 है।
3. माध्यक वर्ग = 55-60, निम्न सीमा l = 55, बारंबारता f = 6, cf (पूर्व वर्ग की) = 13, h = 5
4. सूत्र में मान रखने पर:
माध्यक = 55 + [ 15 – 136 ] × 5
माध्यक = 55 + [ 26 ] × 5 = 55 + 53 = 55 + 1.67 = 56.67 किग्रा
अंतिम उत्तर: विद्यार्थियों का माध्यक भार = 56.67 किग्रा (लगभग) है।
प्रश्न 2 (च). एक डिब्बे में 5 लाल कंचे, 8 सफेद कंचे और 4 हरे कंचे हैं। इस डिब्बे में से एक कंचा यादृच्छया निकाला जाता है। इसकी क्या प्रायिकता है कि निकाला गया कंचा: (i) लाल है? (ii) हरा नहीं है? [4 अंक]
दिया है: लाल कंचे = 5, सफेद कंचे = 8, हरे कंचे = 4
प्रयुक्त सूत्र: P(E) = अनुकूल परिणामों की संख्याकुल संभव परिणामों की संख्या
चरणबद्ध हल:
डिब्बे में कुल कंचों की संख्या (S) = 5 + 8 + 4 = 17
(i) निकाला गया कंचा लाल होने की प्रायिकता:
लाल कंचों की संख्या = 5
P(लाल कंचा) = 517
(ii) निकाला गया कंचा हरा नहीं होने की प्रायिकता:
हरे न होने वाले कंचों (लाल + सफेद) की संख्या = 5 + 8 = 13
P(हरा कंचा नहीं) = 1317
(अथवा: P(हरा नहीं) = 1 – P(हरा) = 1 – 417 = 1317)
अंतिम उत्तर: (i) P(लाल) = 517 तथा (ii) P(हरा नहीं) = 1317 है।
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 3, 4 और 5 (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | विकल्प/OR प्रश्नों सहित | कुल अंक: 18)
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 3 (6 अंक) एवं अथवा (OR) विकल्प का संपूर्ण हल
प्रश्न 3. पाँच वर्ष बाद जैकब की आयु उसके पुत्र की आयु से तीन गुनी हो जाएगी। पाँच वर्ष पूर्व जैकब की आयु उसके पुत्र की आयु की सात गुनी थी। उनकी वर्तमान आयु क्या है? [6 अंक]
ज्ञात करना है: जैकब तथा उसके पुत्र की वर्तमान आयु।
चरणबद्ध हल:
1. माना जैकब की वर्तमान आयु = x वर्ष तथा उसके पुत्र की वर्तमान आयु = y वर्ष है।
2. स्थिति I (पाँच वर्ष बाद):
जैकेब की आयु = (x + 5) वर्ष, पुत्र की आयु = (y + 5) वर्ष
प्रश्नानुसार: (x + 5) = 3(y + 5)
x + 5 = 3y + 15
x – 3y = 10   — (समीकरण 1)
3. स्थिति II (पाँच वर्ष पूर्व):
जैकेब की आयु = (x – 5) वर्ष, पुत्र की आयु = (y – 5) वर्ष
प्रश्नानुसार: (x – 5) = 7(y – 5)
x – 5 = 7y – 35
x – 7y = -30   — (समीकरण 2)
4. समीकरणों का हल (विलोपन विधि द्वारा):
समीकरण (1) में से समीकरण (2) को घटाने पर:
(x – 3y) – (x – 7y) = 10 – (-30)
x – 3y – x + 7y = 10 + 30
4y = 40 ⇒ y = 404 = 10 वर्ष
5. y का मान समीकरण (1) में रखने पर:
x – 3(10) = 10
x – 30 = 10 ⇒ x = 10 + 30 = 40 वर्ष
अंतिम उत्तर: जैकब की वर्तमान आयु = 40 वर्ष तथा पुत्र की वर्तमान आयु = 10 वर्ष है।
अथवा (OR)
प्रश्न 3 (अथवा). एक रेलगाड़ी 480 किमी० की दूरी समान चाल से तय करती है। यदि इसकी चाल 8 किमी०/घंटा कम होती, तो वह उसी दूरी को तय करने में 3 घंटे अधिक लेती। रेलगाड़ी की चाल ज्ञात कीजिए। [6 अंक]
दिया है: कुल तय दूरी = 480 किमी०, चाल में कमी = 8 किमी/घंटा, अतिरिक्त समय = 3 घंटे
ज्ञात करना है: रेलगाड़ी की सामान्य चाल।
प्रयुक्त सूत्र: समय = दूरीचाल
चरणबद्ध हल:
1. माना रेलगाड़ी की सामान्य चाल = x किमी/घंटा है।
2. 480 किमी० दूरी तय करने में लगा समय (t1) = 480x घंटे
3. नई चाल (8 किमी/घंटा कम होने पर) = (x – 8) किमी/घंटा
4. नई चाल से 480 किमी० दूरी तय करने में लगा समय (t2) = 480x – 8 घंटे
5. प्रश्नानुसार (t2 – t1 = 3 घंटे):
480x – 8 – 480x = 3
480 [ x – (x – 8)x(x – 8) ] = 3
480 × 8x2 – 8x = 3
3840x2 – 8x = 3
3(x2 – 8x) = 3840
x2 – 8x = 1280 ⇒ x2 – 8x – 1280 = 0
6. द्विघात समीकरण का गुणनखंडन:
x2 – 40x + 32x – 1280 = 0
x(x – 40) + 32(x – 40) = 0
(x – 40)(x + 32) = 0
यदि x – 40 = 0 ⇒ x = 40
यदि x + 32 = 0 ⇒ x = -32 (अमान्य, क्योंकि चाल ऋणात्मक नहीं हो सकती)
अंतिम उत्तर: रेलगाड़ी की सामान्य चाल = 40 किमी/घंटा है।
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 4 (6 अंक) एवं अथवा (OR) विकल्प का संपूर्ण हल
प्रश्न 4. एक 80 मीटर चौड़ी सड़क के दोनों ओर आमने-सामने समान लंबाई वाले दो खंभे लगे हुए हैं। इन दोनों खंभों के बीच सड़क के एक बिंदु से खंभों के शिखर के उन्नयन कोण क्रमशः 60° एवं 30° हैं। खंभों की ऊँचाई और खंभों से बिंदु की दूरी ज्ञात कीजिये। [6 अंक]
दिया है: सड़क की चौड़ाई BD = 80 मीटर, दो समान खंभे AB = CD = h मीटर, उन्नयन कोण 60° एवं 30°।
ज्ञात करना है: खंभों की ऊँचाई (h) तथा सड़क पर स्थित बिंदु P की दोनों खंभों से दूरियाँ।
चरणबद्ध हल:
1. माना सड़क पर स्थित बिंदु P है। माना बिंदु P की पहले खंभे AB से दूरी BP = x मीटर है।
तब दूसरे खंभे CD से बिंदु P की दूरी PD = (80 – x) मीटर होगी।
2. समकोण त्रिभुज ABP में:
tan 60° = ABBP = hx
√3 = hx ⇒ h = x√3   — (समीकरण 1)
3. समकोण त्रिभुज CDP में:
tan 30° = CDPD = h80 – x
1√3 = h80 – x ⇒ h = 80 – x√3   — (समीकरण 2)
4. समीकरण (1) और (2) की तुलना करने पर:
x√3 = 80 – x√3
3x = 80 – x ⇒ 4x = 80 ⇒ x = 20 मीटर
5. दूरियाँ तथा ऊँचाई:
बिंदु P की पहले खंभे से दूरी (BP) = 20 मीटर
बिंदु P की दूसरे खंभे से दूरी (PD) = 80 – 20 = 60 मीटर
समीकरण (1) से खंभे की ऊँचाई (h) = 20√3 मीटर (अथवा 20 × 1.732 = 34.64 मीटर)
अंतिम उत्तर: खंभों की ऊँचाई = 20√3 मीटर (34.64 मीटर) तथा खंभों से बिंदु की दूरियाँ क्रमशः 20 मीटर और 60 मीटर हैं।
अथवा (OR)
प्रश्न 4 (अथवा). समुद्र तल से 75 मीटर ऊँची लाइट हाउस के शिखर से देखने पर दो समुद्री जहाजों के अवनमन कोण 30° और 45° हैं। यदि लाइट हाउस के एक ही ओर एक जहाज़ दूसरे जहाज़ के ठीक पीछे हो तो दो जहाजों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिये। [6 अंक]
दिया है: लाइट हाउस की ऊँचाई AB = 75 मीटर, जहाजों के अवनमन कोण = 30° तथा 45°।
ज्ञात करना है: दोनों जहाजों के बीच की दूरी (CD = d)।
चरणबद्ध हल:
1. माना AB लाइट हाउस है (AB = 75 मीटर)। दो जहाजों की स्थितियाँ C और D हैं जहाँ C, लाइट हाउस के समीप है।
एकांतर कोण नियम से, उन्नयन कोण ∠ACB = 45° तथा ∠ADB = 30° होंगे।
माना BC = x मीटर तथा जहाजों के मध्य दूरी CD = d मीटर।
2. समकोण त्रिभुज ABC में:
tan 45° = ABBC ⇒ 1 = 75x ⇒ x = 75 मीटर
3. समकोण त्रिभुज ABD में:
tan 30° = ABBD = ABBC + CD
1√3 = 7575 + d
75 + d = 75√3
d = 75√3 – 75 = 75(√3 – 1) मीटर
4. √3 = 1.732 रखने पर:
d = 75(1.732 – 1) = 75 × 0.732 = 54.9 मीटर
अंतिम उत्तर: दोनों जहाजों के बीच की दूरी = 75(√3 – 1) मीटर (या 54.9 मीटर) है।
खण्ड ‘ब’ – प्रश्न संख्या 5 (6 अंक) एवं अथवा (OR) विकल्प का संपूर्ण हल
प्रश्न 5. ऊँचाई 2.4 सेमी० और व्यास 1.4 सेमी० वाले एक ठोस बेलन में से इसी ऊँचाई और इसी व्यास वाला एक शंक्वाकार खोल (Cavity) काट लिया जाता है। शेष बचे ठोस का निकटतम वर्ग सेंटीमीटर तक पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिये। [6 अंक]
दिया है: बेलन व शंकु की ऊँचाई h = 2.4 सेमी, व्यास d = 1.4 सेमी ⇒ त्रिज्या r = 1.42 = 0.7 सेमी।
ज्ञात करना है: शेष बचे ठोस का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल।
प्रयुक्त सूत्र: शंकु की तिर्यक ऊँचाई l = √(r2 + h2), बेलन का वक्र पृष्ठ = 2πrh, शंकु का वक्र पृष्ठ = πrl, वृत्ताकार आधार = πr2
चरणबद्ध हल:
1. शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) ज्ञात करना:
l = √[(0.7)2 + (2.4)2] = √[0.49 + 5.76] = √6.25 = 2.5 सेमी
2. शेष बचे ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल:
= (बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल) + (शंक्वाकार खोल का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल) + (ऊपरी वृत्ताकार आधार का क्षेत्रफल)
= 2πrh + πrl + πr2
= πr (2h + l + r)
= 227 × 0.7 × [ 2(2.4) + 2.5 + 0.7 ]
= 2.2 × [ 4.8 + 2.5 + 0.7 ]
= 2.2 × 8.0 = 17.6 सेमी2
3. निकटतम वर्ग सेंटीमीटर में पूर्ण समानीकरण करने पर: 17.6 सेमी2 ≈ 18 सेमी2
अंतिम उत्तर: शेष बचे ठोस का निकटतम पृष्ठीय क्षेत्रफल = 18 सेमी2 है।
अथवा (OR)
प्रश्न 5 (अथवा). ऊँचाई 220 सेमी० और आधार का व्यास 24 सेमी० वाले एक बेलन, जिस पर ऊँचाई 60 सेमी० और त्रिज्या 8 सेमी० वाला एक अन्य बेलन आरोपित है, से लोहे का एक स्तंभ बना है। इस स्तंभ का द्रव्यमान ज्ञात कीजिये, जबकि दिया है 1 घन सेमी० लोहे का द्रव्यमान लगभग 8 ग्राम होता है। (π = 3.14) [6 अंक]
दिया है: बड़े बेलन हेतु: H = 220 सेमी, व्यास = 24 सेमी ⇒ त्रिज्या R = 12 सेमी।
छोटे बेलन हेतु: h = 60 सेमी, त्रिज्या r = 8 सेमी। 1 सेमी3 लोहे का द्रव्यमान = 8 ग्राम, π = 3.14।
ज्ञात करना है: लोहे के स्तंभ का कुल द्रव्यमान।
चरणबद्ध हल:
1. बड़े बेलन का आयतन (V1):
V1 = πR2H = 3.14 × (12)2 × 220 = 3.14 × 144 × 220 = 99475.2 सेमी3
2. छोटे बेलन का आयतन (V2):
V2 = πr2h = 3.14 × (8)2 × 60 = 3.14 × 64 × 60 = 12057.6 सेमी3
3. स्तंभ का कुल आयतन (V):
V = V1 + V2 = 99475.2 + 12057.6 = 111532.8 सेमी3
4. स्तंभ का कुल द्रव्यमान:
द्रव्यमान = कुल आयतन × 8 ग्राम
द्रव्यमान = 111532.8 × 8 = 892262.4 ग्राम
5. किलोग्राम में परिवर्तन:
द्रव्यमान (किग्रा में) = 892262.41000 = 892.2624 किग्रा ≈ 892.26 किग्रा
अंतिम उत्तर: लोहे के स्तंभ का कुल द्रव्यमान = 892.26 किग्रा (या 892262.4 ग्राम) है।

Brijesh K Yadav

Brijesh Kumar Yadav is an experienced teacher and content creator with over 10 years of professional experience. He is the founder of BestFunda.com, a platform dedicated to guiding students from 10th, 12th, and graduation levels. Brijesh provides valuable career advice through blogs, videos, and social media. As an entrepreneur and career coach, he is passionate about helping students make informed decisions and build successful futures.

Leave a Comment